उत्तर प्रदेश
2 महीने पहले
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गोंडा में कोबरा का कहर और सपेरे का जज्बा
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। यह कहानी है राम लखन नाम के एक ऐसे अनुभवी सपेरे की, जिसने जीवन भर सांपों को पकड़कर लोगों की सुरक्षा की, लेकिन अंत में उसी कला ने उनकी जान ले ली। रविवार को धानेपुर क्षेत्र में एक विशाल कोबरा सांप के निकलने की सूचना मिलने के बाद राम लखन ने अपनी जान की बाजी लगा दी।
सालों का अनुभव और आखिरी रेस्क्यू
बता दें कि राम लखन पिछले 40 साल से लगातार सांपों को पकड़ने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर छोड़ने का काम कर रहे थे। उनका अनुभव ही उनकी पहचान थी, लेकिन इस बार नियति को कुछ और ही मंजूर था। जब उन्हें खबर मिली कि धानेपुर बाजार में एक बेहद खतरनाक और विशाल कोबरा घूम रहा है, तो वे बिना एक पल गंवाए उसे पकड़ने के लिए घटनास्थल पर पहुँच गए। हालांकि, उन्हें इस बात का तनिक भी अंदाजा नहीं था कि यह उनका जीवन का आखिरी रेस्क्यू ऑपरेशन साबित होने वाला है।
सांप को पकड़ने के दौरान हुआ हादसा
रेस्क्यू के दौरान जैसे ही राम लखन ने कोबरा को काबू करने की कोशिश की, सांप ने तेजी से हमला कर दिया और उन्हें डस लिया। जहरीले सांप के डसते ही राम लखन के शरीर में जहर तेजी से घुलने लगा। उनकी तबीयत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इस स्थिति में भी उन्होंने अपनी बहादुरी का परिचय दिया। वे जानते थे कि यदि उन्होंने सांप को नहीं पकड़ा, तो यह जहरीला कोबरा बाजार में मौजूद अन्य लोगों के लिए घातक साबित हो सकता है। अपनी जान गंवाने की परवाह किए बिना उन्होंने पूरी ताकत जुटाई और सांप को पकड़कर बोरे में बंद कर दिया।
इलाज के लिए अस्पताल में संघर्ष
सांप को कैद करने के बाद राम लखन तुरंत अपने परिजनों और वहां मौजूद स्थानीय लोगों की सहायता से जिला मेडिकल कॉलेज पहुंचे। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि वे मरणासन्न स्थिति में होने के बावजूद उस बोरे को अपने साथ ले गए जिसमें कोबरा बंद था, ताकि डॉक्टर सांप की प्रजाति पहचान सकें और सही एंटी-वेनम का इस्तेमाल कर सकें।
डॉक्टरों की कोशिश और दुखद अंत
इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉक्टर उस समय दंग रह गए जब उन्होंने बोरे में कैद इतने विशाल कोबरा को देखा और राम लखन की बहादुरी के बारे में सुना। डॉक्टरों ने बिना किसी देरी के उन्हें उपचार देना शुरू कर दिया और अपनी पूरी कोशिश की कि उन्हें बचाया जा सके। लेकिन शरीर में जहर के अत्यधिक प्रसार के कारण डॉक्टरों की मेहनत रंग नहीं लाई और अंततः राम लखन ने दम तोड़ दिया। इलाके के लोग अब यही कह रहे हैं कि अगर राम लखन ने उस वक्त अपनी जान जोखिम में डालकर उस कोबरा को न पकड़ा होता, तो वह किसी और मासूम पर हमला कर सकता था। उनकी इस कुर्बानी को गोंडा के लोग हमेशा याद रखेंगे।
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