बिहार के गया में लाल केले की खेती का सफल ट्रायल, सेहत के लिए है वरदान और किसानों के लिए मुनाफे का सौदा भारत एक महीने पहले 63
गया के जेठियन गांव में किसान गोपाल शरण सिंह ने सफलतापूर्वक इंडोनेशियन लाल केले की खेती की है, जो औषधीय गुणों से भरपूर है और शुगर मरीजों के लिए भी बेहद सुरक्षित माना जाता है।

बिहार के कृषि क्षेत्र में एक नया और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के पारंपरिक कृषि पैटर्न से हटकर अब यहां के किसान नए-नए प्रयोग कर रहे हैं और वैश्विक स्तर की फसलों को अपने खेतों में जगह दे रहे हैं। इसी कड़ी में गया जिले से एक बेहद दिलचस्प और उत्साहजनक खबर सामने आई है। बिहार के बाजारों में जल्द ही लोगों को सामान्य पीले केले की जगह एक बेहद खास और अलग किस्म का लाल केला खाने को मिलेगा। औषधीय गुणों और पोषक तत्वों से भरपूर इस विदेशी केले की खेती का ट्रायल गया जिले में पूरी तरह से सफल रहा है। इस सफलता के बाद अब क्षेत्र के अन्य किसानों में भी इसे लेकर भारी उत्सुकता देखी जा रही है और वे भी इसकी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

गया के प्रगतिशील किसान ने पेश की नई मिसाल

गया जिले के जेठियन गांव के रहने वाले प्रगतिशील किसान गोपाल शरण सिंह ने इस अनोखे लाल केले की बागवानी का सफल परीक्षण किया है। उन्होंने प्रायोगिक तौर पर इसके केवल चार पौधे लगाए थे, जिनमें अब बेहतरीन तरीके से फल आने शुरू हो गए हैं। गोपाल शरण सिंह ने बताया कि वे करीब दो साल पूर्व पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की एक नर्सरी से इन पौधों को लेकर आए थे। दो वर्षों की कड़ी मेहनत, वैज्ञानिक देखरेख और उचित सिंचाई के बाद अब इन पौधों में फल पूरी तरह से आ चुके हैं। इस सफल परीक्षण से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि बिहार की मिट्टी और यहां की गर्म जलवायु इस विदेशी किस्म की खेती के लिए बेहद अनुकूल है।

सेहत का खजाना है लाल केला, शुगर के मरीजों के लिए भी सुरक्षित

पारंपरिक पीले केले की तुलना में लाल केला स्वास्थ्य के लिए कहीं अधिक फायदेमंद और गुणकारी माना जाता है। इस केले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका बाहरी छिलका और इसके अंदर का गूदा, दोनों ही लाल रंग के होते हैं। यह केला सामान्य केले की तुलना में बहुत अधिक नरम होता है और खाने में भी काफी मीठा होता है। चिकित्सकों और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी कुछ प्रमुख खूबियां इस प्रकार हैं:

  • पाचन तंत्र के लिए वरदान: लाल केले में डाइटरी फाइबर की मात्रा बहुत अधिक पाई जाती है, जो हमारे पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के साथ-साथ कब्ज की पुरानी समस्या से भी राहत दिलाती है।
  • एनीमिया से बचाव: इस केले में प्रचुर मात्रा में आयरन और विटामिन B6 पाया जाता है। यह शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाकर खून की कमी यानी एनीमिया से लड़ने में मदद करता है और हमारी तंत्रिका तंत्र को पूरी तरह स्वस्थ रखता है।
  • मधुमेह रोगियों के लिए उपयुक्त: आमतौर पर शुगर के मरीजों को केला खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे शुगर लेवल बढ़ने का खतरा रहता है। लेकिन लाल केले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे शुगर के मरीज भी बिना किसी संकोच के आराम से खा सकते हैं।
  • पोषक तत्वों की प्रचुरता: इस विशेष केले में विटामिन सी, पोटेशियम और बीटा-कैरोटीन प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। यह बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो हमारे हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।

वैश्विक स्तर पर मांग और भारतीय राज्यों में खेती

लाल केले की बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए इसकी खेती किसानों के लिए बेहद मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। वैश्विक स्तर पर इसकी खेती बड़े पैमाने पर इंडोनेशिया, अमेरिका, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में की जाती है। इन देशों में लाल केले को एक प्रीमियम फल के रूप में देखा जाता है। भारत की बात करें तो देश के कुछ चुनिंदा राज्यों जैसे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में किसान इसकी खेती कर शानदार मुनाफा कमा रहे हैं। अब इस सूची में बिहार का नाम भी गर्व से जुड़ने जा रहा है। लाल केले की यह नस्ल शुष्क जलवायु के बेहद अनुकूल है और इसकी खेती के लिए किसी विशेष तकनीक की आवश्यकता नहीं होती, इसे सामान्य केले की तरह ही आसानी से उगाया जा सकता है। इसके पौधे में पीले केले की तुलना में उत्पादन भी अधिक होता है।

औषधीय पौधों के विशेषज्ञ हैं गोपाल शरण सिंह

लाल केले की सफल खेती करने वाले किसान गोपाल शरण सिंह गया जिले में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वे विशेष रूप से दुर्लभ और औषधीय पौधों की खेती के लिए पूरे क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं। जेठियन गांव में स्थित उनकी हर्बल नर्सरी में वर्तमान में 200 से अधिक प्रकार के औषधीय पौधे लहलहा रहे हैं। गोपाल शरण सिंह का मानना है कि आने वाले समय में लाल केले की व्यावसायिक बागवानी बिहार के किसानों की तकदीर बदल सकती है और उनकी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकती है। कम लागत और सामान्य रखरखाव में तैयार होने वाली यह फसल पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक मुनाफा देने की क्षमता रखती है और बाजार में इसकी ऊंची कीमत मिलने की पूरी उम्मीद है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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