बिहार
एक घंटा पहले
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गया में गरीब परिवार को मिली राहत
बिहार के औरंगाबाद जिले के रफीगंज प्रखंड अंतर्गत काईचक गांव के रहने वाले मोहम्मद एजाज के लिए उनके तीन साल के बेटे का जन्मजात कटा हुआ होंठ एक बहुत बड़ी चिंता का विषय बना हुआ था। पिता होने के नाते, उन्होंने अपने बेटे को बेहतर भविष्य देने के लिए अपनी सारी जमा पूंजी लगा दी थी। निजी अस्पतालों और बड़े चिकित्सा केंद्रों के चक्कर काटने के दौरान उनके पास जो कुछ भी था, वह सब खर्च हो गया, लेकिन उसके बावजूद बच्चे के इलाज में सफलता नहीं मिल सकी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे पिता का मनोबल पूरी तरह टूट चुका था और उन्हें लग रहा था कि शायद अब उनके बेटे का इलाज मुमकिन नहीं हो पाएगा।
आरबीएसके योजना बनी मसीहा
निराशा के उस दौर में मोहम्मद एजाज की मुलाकात रफीगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम यानी आरबीएसके की टीम से हुई। इस टीम ने उन्हें केवल सांत्वना ही नहीं दी, बल्कि उन्हें सही दिशा भी दिखाई। टीम ने एजाज को गया स्थित अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल जाने का सुझाव दिया। अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आरबीएसके योजना के अंतर्गत कटे हुए होंठ और तालु वाले बच्चों की सर्जरी पूरी तरह से निशुल्क की जाती है। डॉक्टरों की देखरेख में बच्चे का सफल ऑपरेशन किया गया, जिससे अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है और उसके चेहरे पर मुस्कान वापस आ गई है।
पटना एम्स में भी नहीं मिली कामयाबी
मोहम्मद एजाज अपने संघर्ष को याद करते हुए बताते हैं कि वे इससे पहले अपने बेटे को इलाज के लिए पटना स्थित एम्स भी लेकर गए थे। उन्होंने वहां करीब दो महीने तक इलाज के लिए काफी दौड़-भाग की और इस दौरान उनके हजारों रुपये खर्च भी हो गए। दुर्भाग्य से वहां भी इलाज सफल नहीं हो सका, जिससे पिता और अधिक हताश हो गए थे। आखिरकार, आरबीएसके की टीम के हस्तक्षेप और मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल की सुविधाओं ने उनके लिए एक नई राह खोल दी।
निजी अस्पतालों के भारी खर्च से मुक्ति
गया का अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल मगध क्षेत्र के गरीब परिवारों के लिए एक बड़ा सहारा बन गया है। यहां न केवल सर्जरी मुफ्त में हो रही है, बल्कि डॉक्टरों की टीम बेहतरीन परिणाम भी दे रही है। पिछले 20 दिनों के भीतर ही इस अस्पताल में ऐसे 8 बच्चों की सफल सर्जरी की जा चुकी है। यदि कोई सामान्य परिवार किसी बड़े निजी अस्पताल में ऐसी सर्जरी करवाने का फैसला करता है, तो उन्हें पचास हजार रुपये से भी अधिक का खर्च उठाना पड़ता है। गरीब परिवारों के लिए यह राशि जुटाना नामुमकिन जैसा होता है, ऐसे में यह सरकारी सुविधा किसी वरदान से कम नहीं है।
स्पीच थेरेपी की समस्या से बचाव
इस पूरे मामले पर आरबीएसके अस्पताल कोऑर्डिनेटर डॉ. मोहम्मद इरफान ने बताया कि समय रहते की गई सर्जरी बच्चों के भविष्य के लिए कितनी जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कटे होंठ या तालु की सफल सर्जरी से न केवल चेहरे की बनावट सुधरती है, बल्कि आवाज में भी काफी स्पष्टता आती है। डॉक्टर का कहना है कि जो बच्चे अभी बोलने की अवस्था में नहीं हैं, यदि उनकी सर्जरी सही समय पर हो जाए, तो उन्हें भविष्य में बोलने के लिए स्पीच थेरेपी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
सपंर्क करें यदि है ऐसी जरूरत
यदि किसी अन्य माता-पिता को भी अपने बच्चे की ऐसी समस्या के लिए उपचार की आवश्यकता है, तो वे सीधे तौर पर डॉ. इरफान से उनके मोबाइल नंबर 9162924134 पर संपर्क कर सकते हैं। गया के इस अस्पताल में बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ कराई जा रही हैं ताकि किसी भी पिता को पैसों की कमी के कारण अपने बच्चे के इलाज को अधर में न छोड़ना पड़े।
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