क्राइम
एक घंटा पहले
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विचारों
कबड्डी के मैदान से अपराध की दुनिया तक
रोहतक जिले के रिताउली गांव का रहने वाला हिमांशु भाऊ कभी अपनी जिंदगी में कबड्डी खेलकर नाम कमाने का सपना संजोता था। हालांकि, हालात और संगति ने उसे खेल के मैदान से हटाकर अपराध की काली गलियों में धकेल दिया। मात्र 15 साल की उम्र में ही उसने कानून के साथ अपना पहला विवाद खड़ा कर दिया, जब उसके खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज की गई। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि यह लड़का आगे चलकर दिल्ली और एनसीआर के सबसे बड़े सिरदर्द के रूप में उभरेगा।
हिसार से फरार होकर बदला रुख
हिमांशु के आपराधिक जीवन में सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब उसने हिसार के बाल सुधार गृह से भागने का दुस्साहस किया। 2020 में हुई इस फरारी ने उसे एक साधारण अपराधी से बदलकर पेशेवर गैंगस्टर के रास्ते पर खड़ा कर दिया। बाल सुधार गृह से बाहर आने के बाद उसने दिल्ली के नामी बदमाशों के साथ तालमेल बिठाया और अपना खुद का नेटवर्क तैयार करना शुरू किया।
पुर्तगाल से गैंग का संचालन
हिमांशु भाऊ ने अपने अपराधों को अंजाम देने के लिए एक अलग ही रणनीति अपनाई। उसने देश छोड़ने के बाद पुर्तगाल में ठिकाना बनाया और वहीं से अपना पूरा गैंग संचालित करने लगा। हत्या, हत्या की कोशिश, रंगदारी और गैंगवार जैसी वारदातों ने उसे पुलिस की फाइलों में मोस्ट वांटेड बना दिया। उसका नाम आज बड़े अपराधियों की श्रेणी में गिना जाता है, जिसकी धमक दिल्ली के व्यापारियों से लेकर कारोबारियों तक में साफ देखी जा सकती है।
एजेंसी और पुलिस के निशाने पर
आज हिमांशु भाऊ की स्थिति यह है कि वह राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए के रडार पर है। उसे पकड़ने के लिए इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस तक जारी किया जा चुका है। कभी खेल के प्रति समर्पित रहा यह युवक आज एक ऐसे अपराधी में बदल चुका है, जिसकी तलाश में कानून प्रवर्तन एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं। उसका सफर एक चेतावनी है कि कैसे गलत दिशा में उठाया गया एक कदम किसी व्यक्ति के जीवन को पूरी तरह से बर्बाद कर सकता है।
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