स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ी सुरक्षा: फ्रांस ने तैनात किए माइन-स्वीपर युद्धपोत, समुद्री व्यापार होगा सुरक्षित विश्व 2 महीने पहले 74
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपने युद्धपोत और माइनहंटर्स तैनात कर दिए हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सैन्य तैनाती और फ्रांस का बड़ा कदम

मध्य-पूर्व क्षेत्र में तनाव के बढ़ते माहौल के बीच समुद्री रास्तों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए फ्रांस ने एक बड़ा कदम उठाया है। फ्रांस ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपने माइन काउंटरमेजर संसाधनों को तैनात कर दिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य इस संवेदनशील जलमार्ग से समुद्री माइंस को हटाकर जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार करना है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस तैनाती की पुष्टि करते हुए कहा कि उनके देश ने इस क्षेत्र में दो माइनहंटर, दो फ्रिगेट और एक समुद्री गश्ती विमान को भेजा है। इस सैन्य कार्रवाई का एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि होर्मुज के समुद्री मार्ग में जहाजों की आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी रहे और अंतरराष्ट्रीय नौवहन सुरक्षित बना रहे। फ्रांस ने स्पष्ट किया है कि वे अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में समुद्री नेविगेशन को पूरी तरह बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

युद्धपोतों और विमानों की विशिष्ट तैनाती

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि फ्रांस ने मिडिल ईस्ट में अपने विशेष माइन काउंटरमेजर संसाधनों को सक्रिय कर दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि इन दो माइनहंटर्स के साथ दो फ्रिगेट और एक समुद्री गश्ती विमान का बेड़ा तैनात किया गया है। ये सभी संसाधन क्षेत्र में काम कर रहे सहयोगी देशों की सेनाओं के साथ तालमेल बिठाकर काम करेंगे ताकि होर्मुज की जलसीमा में सुरक्षा मानकों को पुनः बहाल किया जा सके।

अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का महत्व

इमैनुएल मैक्रों ने इस फैसले के पीछे 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते यानी MoU को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया। राष्ट्रपति के अनुसार, यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक सकारात्मक कदम है, क्योंकि यह होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को मान्यता देता है। इसी घटनाक्रम और ओमान के सुल्तान के साथ हुई विस्तृत चर्चा के बाद फ्रांस ने अपनी वर्तमान सैन्य तैनाती में रणनीतिक बदलाव करने का निर्णय लिया है।

फ्रांस की आगामी रणनीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता

आगे की कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गॉल अब अपने होम पोर्ट टूलॉन की ओर वापस लौट रहा है। हालांकि, उनके माइन काउंटरमेजर संसाधन और सुरक्षा के लिए तैनात अन्य जहाज क्षेत्र में ही बने रहेंगे ताकि वे अपने साथी देशों के साथ मिलकर किसी भी आपात स्थिति से निपट सकें। इसके साथ ही, फ्रांस और ब्रिटेन ने एक साझा बयान जारी किया है जिसमें जरूरत पड़ने पर एक मल्टीनेशनल मिलिट्री मिशन को शुरू करने के विकल्प पर भी सहमति जताई है। दोनों देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के पालन और नौवहन की स्वतंत्रता के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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