भारत
2 घंटे पहले
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विचारों
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को उन देशों को कड़ा जवाब दिया जो भारत के रूस से तेल खरीदने पर नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं। भारत की रूस नीति पर यूरोप की आलोचना को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश जो हथियार बेचते रहे हैं, उनका इस्तेमाल बरसों से भारत के खिलाफ होता आया है, जबकि यही देश भारत के रूस से तेल खरीदने पर सवाल खड़े कर रहे हैं। भारत के ऊर्जा फैसलों का बचाव करते हुए जयशंकर ने यह भी बताया कि 2022 में मॉस्को पर प्रतिबंध लगने के बाद वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने में मदद के लिए खुद अमेरिका ने भारत को रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया था।
फिनलैंड में आयोजित कुलतारंता वार्ता के दौरान "उभरती शक्तियां और नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा" विषय पर चर्चा में जयशंकर एक सवाल का जवाब दे रहे थे। सवाल में कहा गया था कि रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत रूस के प्रति काफी सहानुभूति दिखा रहा है और रूसी तेल पर हद से ज्यादा निर्भर है।
भारत पर हमलों में इस्तेमाल हो रहे यूरोपीय हथियार
जयशंकर ने कहा, "किसी भी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ है। काश, भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले हथियारों के मामले में मैं यूरोप के बारे में भी यही कह पाता।" जब उनसे इस बात को विस्तार से समझाने को कहा गया, तो उन्होंने जवाब दिया, "यूरोप ऐसे हथियार बेचता है जिनका इस्तेमाल भारत पर हमले के लिए होता है। यह सिर्फ अभी की बात नहीं, बल्कि कई वर्षों से चल रहा है। हम भारतीयों ने कभी ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे यूरोप को खतरा हो। मुझे लगता है यह एक तर्कसंगत बात है।"
भारत क्यों खरीद रहा है रूस से तेल
विदेश मंत्री ने समझाया कि रूस कम कीमत पर तेल देता है और वैश्विक आपूर्ति में सस्ता तेल आने से कीमतें स्थिर रहती हैं। भारत के रूस से तेल खरीदने के पीछे आर्थिक पहलू ज्यादा अहम है और इसमें भू-राजनीति की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध के बाद बदले बाजार परिदृश्य ने रूसी कच्चे तेल को सबसे सुलभ विकल्पों में से एक बना दिया।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में व्यवधान रोकने के लिए अमेरिका ने ही भारत से रूसी तेल खरीदते रहने को कहा था। जयशंकर के अनुसार, "उस समय अमेरिका ने तेल बाजार को स्थिर करने के लिए भारत से सीधे रूसी तेल खरीदने का अनुरोध किया था। हम लागत और उपलब्धता के आधार पर तेल खरीदते हैं।"
लागत और उपलब्धता के आधार पर होती है खरीद
भारत का रुख और स्पष्ट करते हुए विदेश मंत्री ने कहा, "मैं दो बातें कहना चाहूंगा। हम लागत और उपलब्धता के आधार पर तेल खरीदते हैं। उस समय बाजार में उपलब्ध अधिकतर तेल रूसी था, क्योंकि यूरोपीय देश मुख्य रूप से मध्य पूर्व से तेल खरीद रहे थे, जो हमारा पारंपरिक आपूर्तिकर्ता रहा है। ऐसे में परिस्थितियों ने हमें एक खास दिशा में बढ़ने के लिए मजबूर किया।"
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