भारत की बेटियों का दबदबा! बांग्लादेश को 3-1 से रौंदकर छठी बार बना सैफ चैंपियन खेल 2 महीने पहले 39
भारतीय महिला फुटबॉल टीम ने फाइनल में बांग्लादेश को 3-1 से मात देकर छठी बार सैफ महिला चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया. इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही स्टार खिलाड़ी ग्रेस डांगमेई ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कह दिया.

भारतीय महिला फुटबॉल टीम ने एक बार फिर महाद्वीप में अपनी बादशाहत साबित कर दी है. शनिवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने बांग्लादेश को 3-1 के अंतर से शिकस्त देकर छठी बार सैफ महिला चैंपियनशिप का खिताब जीत लिया. यह खिताबी ट्रॉफी भारत ने पूरे सात साल के लंबे इंतजार के बाद हासिल की है.

फाइनल में कब-कब गिरे गोल

खिताबी मुकाबले में भारत की ओर से प्यारी खाका ने 42वें मिनट में पहला गोल दागकर टीम को बढ़त दिलाई. इसके बाद सनफिदा नोंग्रम ने 46वें मिनट में और लिंडा कॉम सर्टो ने 82वें मिनट में निशाना साधकर जीत पर मुहर लगा दी. बांग्लादेश की तरफ से एकमात्र गोल रितु पोर्ना चकमा ने 45+2वें मिनट में किया.

दिलचस्प बात यह रही कि मेजबान टीम इससे पहले ग्रुप चरण में भी इसी प्रतिद्वंद्वी को 3-0 से हरा चुकी थी.

पूरे टूर्नामेंट में भारत का जलवा

भारतीय टीम ने इस प्रतियोगिता में बिना एक भी मैच गंवाए अपना सफर पूरा किया. टीम ने टूर्नामेंट में कुल 18 गोल दागे और अपने खिलाफ सिर्फ एक ही गोल होने दिया, जिससे मैदान पर उसका दबदबा साफ नजर आया.

टीम इंडिया ने अपने अभियान की शुरुआत मालदीव पर 11-0 की एकतरफा जीत के साथ की थी. इसके बाद बांग्लादेश को 3-0 से हराकर भारत ने ग्रुप बी में पहला स्थान हासिल किया था.

दो बार फाइनल तक नहीं पहुंच पाई थी टीम

लगातार पांच बार खिताब अपने नाम करने के बाद भारत पिछले दो संस्करणों में फाइनल तक का सफर भी तय नहीं कर पाया था. इन दोनों मौकों यानी 2022 और 2024 में बांग्लादेश ने नेपाल को हराकर ट्रॉफी जीती थी. भारत ने इससे पहले आखिरी बार 2019 में यह खिताब जीता था.

चैंपियन बनने के बाद ग्रेस डांगमेई का संन्यास

टीम इंडिया के चैंपियन बनते ही स्टार खिलाड़ी ग्रेस डांगमेई ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया. उन्होंने यह घोषणा फाइनल में बांग्लादेश पर 3-1 की जीत के साथ खिताब अपने नाम करने के तुरंत बाद की.

मणिपुर की रहने वाली 30 वर्षीय फॉरवर्ड खिलाड़ी ने 2013 में अपने पदार्पण के बाद से अब तक 95 मौकों पर देश का प्रतिनिधित्व किया. अपना तीसरा सैफ खिताब जीतकर उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का बेहद यादगार अंत किया.

फाइनल मुकाबले में ग्रेस शुरुआती 11 खिलाड़ियों में शामिल नहीं थीं और उन्हें स्थानापन्न खिलाड़ी के रूप में मैदान पर उतारा गया. हालांकि बाद में उन्हें टीम की कप्तानी सौंपी गई और पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान उन्होंने ही ट्रॉफी उठाई.

करीब 15 साल के अपने शानदार सफर में ग्रेस ने केआरवाईपीएचएसए, सेतु एफसी, गोकुलम केरला और श्रीभूमि जैसे देश के दिग्गज क्लबों के लिए मैदान संभाला.

विवेक शर्मा पाबना के खेल संवाददाता हैं, जो क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों की खबरें कवर करते हैं। मैचों के विश्लेषण, खिलाड़ियों की उपलब्धियों और टूर्नामेंट्स पर उनकी गहरी पकड़ है। वे खेल प्रेमियों के लिए हर बड़ी खबर तेजी और सटीकता के साथ लाते हैं।

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