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एक घंटा पहले
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फीफा विश्व कप 2026 की शुरुआत मेजबान अमेरिका ने शानदार अंदाज में की। अपने पहले ही मुकाबले में टीम ने पराग्वे को 4-1 से शिकस्त दी, जो विश्व कप के इतिहास में अमेरिका की सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है। इतना ही नहीं, 32 साल बाद अमेरिका ने अपने घर में ओपनिंग मैच जीतकर अभियान का आगाज किया। इस यादगार जीत के असली हीरो बने फोलारिन बालोगुन, जिन्होंने टीम के लिए पहले दो गोल किए।
दिलचस्प बात यह है कि एक समय बालोगुन के पास इंग्लैंड और नाइजीरिया की ओर से खेलने का भी विकल्प मौजूद था, लेकिन उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए अमेरिका को चुना। आज वही फैसला उन्हें अमेरिकी फुटबॉल का नया चेहरा बना चुका है।
कौन हैं फोलारिन बालोगुन?
बालोगुन का जन्म न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन इलाके में एक नाइजीरियाई परिवार में हुआ था। जन्म के महज एक महीने बाद उनका परिवार इंग्लैंड चला गया और उनका लालन-पालन लंदन में हुआ। आठ साल की उम्र में उन्होंने आर्सेनल की अकादमी में प्रवेश लिया।
युवा स्तर पर बालोगुन ने जहां इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व किया, वहीं अमेरिका की अंडर-18 टीम के लिए भी मैदान पर उतरे। इस तरह अमेरिका के अलावा इंग्लैंड और नाइजीरिया, तीनों देशों की ओर से खेलने का रास्ता उनके सामने खुला हुआ था।
सही समय पर लिया समझदारी भरा फैसला
इंग्लैंड की टीम में स्टार खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है, ऐसे में वहां जगह बना पाना बालोगुन के लिए मुश्किल हो सकता था। दूसरी ओर, नाइजीरिया इस विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने में नाकाम रहा। ऐसे हालात में बालोगुन ने अमेरिका को चुनने का फैसला किया और यह निर्णय बिल्कुल सटीक साबित हुआ। नतीजा यह है कि आज अमेरिका के हर फुटबॉल प्रेमी की जुबान पर सिर्फ एक ही नाम है — बालोगुन।
1930 के बाद रचा इतिहास
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान डेविड बेकहम की मौजूदगी में फोलारिन बालोगुन विश्व कप के किसी मुकाबले में दो गोल करने वाले 1930 के बाद के पहले अमेरिकी खिलाड़ी बन गए। इससे पहले बर्ट पटेनाउड ने पराग्वे के ही खिलाफ अमेरिका की 3-0 की जीत में तीनों गोल दागे थे, जो विश्व कप इतिहास की पहली हैट्रिक थी।
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