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18 जून 2026 का पंचांग: 18 जून को शुद्ध ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के साथ गुरुवार का दिन पड़ रहा है। यह चतुर्थी तिथि गुरुवार शाम 6 बजकर 59 मिनट तक बनी रहेगी। इसी दिन गुरु पुष्य योग का संयोग भी बन रहा है और दोपहर से पहले 11 बजकर 33 मिनट तक पुष्य नक्षत्र रहेगा। खास बात यह है कि 18 जून को विनायक श्री गणेश चतुर्थी का व्रत भी रखा जाएगा। आइए जानते हैं गुरुवार के दिन का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त तथा सूर्योदय और सूर्यास्त का समय।
18 जून 2026 का पंचांग
- शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि- 18 जून 2026 को शाम 6 बजकर 59 मिनट तक
- गुरु पुष्य योग- 18 जून 2026 को सुबह 6 बजकर 1 मिनट से सुबह 11 बजकर 32 मिनट तक
- पुष्य नक्षत्र- 18 जून 2026 को दोपहर पहले 11 बजकर 33 मिनट तक
- 18 जून 2026 विशेष- विनायक श्री गणेश चतुर्थी व्रत
18 जून 2026 का शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:35 ए एम से 05:18 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:13 पी एम से 01:06 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:52 पी एम से 03:46 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 07:17 पी एम से 07:38 पी एम
- अमृत सिद्धि योग- 06:01 ए एम से 11:32 ए एम
- सर्वार्थ सिद्धि योग- 06:01 ए एम से 11:32 ए एम
- रवि योग- 06:01 ए एम से 11:32 ए एम
राहुकाल का समय
- दिल्ली- दोपहर 02:07 से दोपहर बाद 03:52 तक
- मुंबई- दोपहर 02:19 से दोपहर बाद 03:59 तक
- चंडीगढ़- दोपहर 02:10 से दोपहर बाद 03:56 तक
- लखनऊ- दोपहर 01:51 से दोपहर बाद 03:35 तक
- भोपाल- दोपहर 02:03 से दोपहर बाद 03:45 तक
- कोलकाता- दोपहर 01:19 से दोपहर बाद 03:00 तक
- अहमदाबाद- दोपहर 02:22 से शाम 04:04 तक
- चेन्नई- दोपहर 01:47 से दोपहर बाद 03:23 तक
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय- सुबह 05:23 बजे
- सूर्यास्त- शाम 07:20 बजे
गुरु पुष्य योग और पुष्य नक्षत्र का महत्व
इस गुरुवार को पुष्य योग का निर्माण हो रहा है। यह योग अलग-अलग वार को पड़ने के अनुसार अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जब पुष्य नक्षत्र गुरुवार के दिन आता है, तब गुरु-पुष्य योग बनता है। मान्यता है कि इस योग में घर के लिए नई चीजें लाना बेहद शुभ रहता है। इस अवसर पर सोना, चांदी, बर्तन, वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि खरीदना उत्तम माना जाता है। गुरुवार को दोपहर से पहले 11 बजकर 33 मिनट तक पुष्य नक्षत्र रहेगा। आकाशमंडल के 27 नक्षत्रों में पुष्य आठवें स्थान पर आता है। इसे ऊर्जा और शक्ति देने वाला नक्षत्र माना गया है, साथ ही यह शुभता, सुंदरता तथा सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला कहा जाता है। इस नक्षत्र में किए गए कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है और सोना-चांदी जैसी नई वस्तुओं की खरीदारी के लिए भी पुष्य नक्षत्र को अत्यंत शुभ माना जाता है।
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