जितिया व्रत 2026: पारण का सही समय, पूजा की विधि और व्रत खोलने के जरूरी नियम धर्म 2 घंटे पहले 5
जितिया व्रत संतान की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए रखा जाता है। जानिए इस साल व्रत खोलने का सही मुहूर्त और पूजा से जुड़ी संपूर्ण जानकारी।

जितिया व्रत का महत्व और मान्यता

हिंदू धर्म में जितिया व्रत का विशेष स्थान है, जिसे माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, बेहतर स्वास्थ्य और सुखद भविष्य की कामना के साथ पूरी निष्ठा से रखती हैं। यह कठिन निर्जला व्रत मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड समेत देश के विभिन्न हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 3 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान जीमूतवाहन की विशेष पूजा की जाती है। यह त्योहार मातृशक्ति के प्रेम, त्याग और अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो माताएं पूरे विधि-विधान से यह व्रत संपन्न करती हैं, उनकी संतान को जीवन में सुख-समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। व्रत के बाद सही समय पर पारण करना भी अत्यंत अनिवार्य माना गया है।

जितिया व्रत 2026 पारण का शुभ समय

जितिया व्रत का पारण नवमी तिथि के दौरान किया जाता है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में जितिया का पारण 4 अक्टूबर 2026, दिन रविवार को होगा। व्रत खोलने के लिए शुभ समय सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद का बताया गया है। व्रती महिलाओं को इसी निर्धारित समय के बाद ही जल और अन्न ग्रहण करना चाहिए, क्योंकि नवमी तिथि में ही पारण करना सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है।

व्रत खोलने की विधि

व्रत का समापन करने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना होता है:

  • पारण के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • तांबे के पात्र में जल, अक्षत और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।
  • अपने पूजा स्थल पर दीप जलाएं और भगवान जीमूतवाहन के साथ-साथ चील और सियारिन का स्मरण करते हुए जल और प्रसाद अर्पित करें।
  • सर्वप्रथम भगवान को चढ़ाए गए प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों के बीच वितरित करें।
  • प्रसाद ग्रहण करने के उपरांत ही स्वयं जल और अन्न लेकर अपना व्रत खोलें।
  • व्रत तोड़ने के बाद सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। विशेष रूप से इस दिन नोनी का साग और झिंगनी (तोरी) की सब्जी का सेवन करना शुभ माना जाता है।

पारण के दौरान ध्यान रखने योग्य नियम

व्रत को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए इन नियमों का पालन करना जरूरी है:

  • पारण के दिन भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए, जिसमें लहसुन और प्याज का बिल्कुल भी प्रयोग न हो।
  • भोजन ग्रहण करने से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अनाज, धन या भोजन का दान अवश्य करें। आप चाहें तो दान के लिए अन्न अलग से निकाल कर रख सकते हैं।
  • ध्यान रखें कि जितिया व्रत का पारण भूलकर भी अष्टमी तिथि में न करें।
  • व्रत खोलने का समय 4 अक्टूबर 2026 को सुबह 07:28 बजे के बाद ही निर्धारित है। इसी समय सीमा के भीतर व्रत का समापन करें।
मीरा शर्मा पाबना की धर्म एवं संस्कृति लेखिका हैं, जो त्योहार, धर्म, ज्योतिष और परंपराओं पर लिखती हैं। व्रत-त्योहारों के महत्व, पूजा विधि और आस्था से जुड़े विषयों को वे श्रद्धा और जानकारी के साथ पेश करती हैं। वाराणसी से उनका जुड़ाव उनके लेखन में झलकता है।

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