मानसून से पहले खेत यूं तैयार करें किसान, ट्राली भर निकलेगी सब्जियां और दोगुना होगा मुनाफा भारत एक महीने पहले 26
मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक से ठीक पहले सब्जी की खेती करने वाले किसानों को अभी से खेत तैयार कर लेने की सलाह दी गई है। उद्यानिकी विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी सुधार और बेड तैयार करने से उर्वरक क्षमता बढ़ती है और उत्पादन भी अधिक मिलता है।

मध्य प्रदेश में कुछ ही दिनों में मानसून की जोरदार आमद होने वाली है। इसके साथ ही खरीफ सीजन में अनाज से लेकर सब्जी और कमर्शियल फसलों तक की बुवाई का सिलसिला शुरू हो जाएगा। जो किसान सब्जी की खेती से अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं, उन्हें अभी से अपने खेतों को तैयार करने में जुट जाना चाहिए।

पिछले तीन-चार साल में सागर जिले में ड्रिप मल्चिंग के जरिए टमाटर, मिर्च, शिमला मिर्च और बैंगन जैसी सब्जियों की खेती का चलन तेजी से बढ़ा है। ऐसे में जो किसान ड्रिप पद्धति से सब्जियां लगाने जा रहे हैं, उन्हें अभी से मिट्टी सुधार से लेकर बेड बनाने तक का काम पूरा कर लेना चाहिए। इससे जहां जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ती है, वहीं पौधों की बढ़वार भी बेहतर होती है और उत्पादन अधिक मिलता है। सागर जिले में लगभग 80000 हेक्टेयर भूमि पर सब्जियों की खेती की जाती है।

खेत की तैयारी कैसे शुरू करें

सागर जिले के रहली में पदस्थ वरिष्ठ उद्यानिकी अधिकारी विदेश प्रजापति बताते हैं कि सब्जी की खेती करने वाले किसानों को सबसे पहले खेत की तैयारी से शुरुआत करनी चाहिए। इसके लिए पहले प्लाउ करना जरूरी है। जिन किसानों ने अब तक प्लाउ नहीं किया है, उनके पास अभी कुछ दिन का समय बचा हुआ है।

प्लाउ के बाद पंजा या कल्टीवेटर से दोबारा बखरनी करनी चाहिए। इसके बाद रोटावेटर चलाकर मिट्टी को ढीला यानी लूज कर लेना चाहिए। यदि खेत में मिट्टी के बड़े-बड़े ढेले हों, तो स्प्रिंकलर से पहले सिंचाई भी की जा सकती है, जिससे मिट्टी और अधिक भुरभुरी हो जाती है।

बेड तैयार करने की प्रक्रिया

विशेषज्ञ के अनुसार रोटावेटर चलाने के बाद खेत को कम से कम 2 दिन के लिए खाली छोड़ देना चाहिए और फिर बेड तैयार करने का काम शुरू करना चाहिए। आजकल बेड बनाने के लिए मशीनें भी आने लगी हैं, जिन्हें ट्रैक्टर की मदद से चलाया जाता है। बेड बन जाने के बाद उन पर ड्रिप बिछाकर मल्चिंग लगाई जाती है। बारिश होने के बाद इन्हीं बेड पर पौधों की रोपाई की जाती है। रोपाई यानी प्लांटेशन के लिए लगभग 10 जुलाई तक का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।

बेड बनाने का फायदा

बेड बनाने का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि जब मिट्टी भुरभुरी रहती है तो पौधे की जड़ें अच्छी तरह विकसित होती हैं। जड़ों के पूरी तरह विकसित होने पर पौधा जमीन से खाद भी बेहतर ढंग से ग्रहण करता है। इससे पौधा स्वस्थ रहता है, उसकी बढ़वार अच्छी होती है और हर काम समय पर होता है।

विदेश प्रजापति बताते हैं कि सामान्य खेती करने वाले किसान चाहें तो बिना बेड के भी खेती कर सकते हैं, लेकिन ड्रिप पद्धति से खेती करने पर बेड बनाना अनिवार्य है। ड्रिप के बिना बेड वाली खेती संभव नहीं है, क्योंकि ड्रिप के माध्यम से ही फर्टिलाइजर सॉल्यूशन के रूप में सीधे पौधों तक पहुंचाया जाता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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