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15 घंटे पहले
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विचारों
किसानों को 300 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा 3000 रुपये वाला यूरिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर मची उठापटक और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में उर्वरकों की कीमतों में भारी उछाल आया है, लेकिन सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि किसानों को खाद सस्ती दरों पर ही मिलती रहे। प्रधानमंत्री के अनुसार, वैश्विक बाजार में एक बोरी यूरिया की कीमत 3,000 रुपये तक पहुंच चुकी है, लेकिन भारतीय किसानों को इसे मात्र 300 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार इस पूरे मूल्य अंतर का आर्थिक बोझ स्वयं उठा रही है ताकि खेती-किसानी पर संकट न आए।
DAP खाद पर भी दी जा रही बड़ी राहत
यूरिया के साथ ही डीएपी (DAP) की कीमतों को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीएपी की एक बोरी की लागत अब 5,000 रुपये हो गई है। हालांकि, देश के किसानों पर महंगाई का सीधा असर न पड़े, इसके लिए सरकार इसे केवल 1,350 रुपये प्रति बोरी के रियायती मूल्य पर मुहैया करा रही है। यह निर्णय चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बीच किसानों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
नागरिक देवो भव के मंत्र पर अडिग सरकार
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों और पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में उत्पन्न संकट के बावजूद सरकार ने हमेशा नागरिक देवो भव के मंत्र को सर्वोपरि रखा है। कठिन दौर में भी सरकार ने पेट्रोल, गैस और यूरिया जैसे आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति को देश में बनाए रखने का सफल प्रयास किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक कीमतों में भारी तेजी आने के बावजूद, भारत सरकार ने इन महत्वपूर्ण कृषि इनपुट्स की उपलब्धता को सुनिश्चित किया है। इसके साथ ही, उन्होंने वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि देश आयात पर निर्भरता को कम करे और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए।
अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर सरकार का जोर
प्रधानमंत्री के भाषण में देश की आर्थिक स्थिति पर विशेष ध्यान केंद्रित रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता में केवल एक क्षेत्र नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था का सर्वांगीण विकास शामिल है। उन्होंने अपने संबोधन में निम्नलिखित प्रमुख विषयों का जिक्र किया:
- मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को नई गति देना।
- फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के माध्यम से व्यापार को बढ़ावा।
- कृषि क्षेत्र को अधिक आधुनिक और लाभदायक बनाना।
- गति शक्ति के जरिए बुनियादी ढांचे का विकास।
- ग्लोबलाइजेशन, ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी के जरिए भविष्य की राह तय करना।
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