हरियाणा
4 दिन पहले
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यह सिर्फ दीवारों पर चिपकाया गया एक कागज भर नहीं है, बल्कि उन परिवारों की रातों की नींद उड़ाने वाला फरमान बन गया है, जिन्होंने वर्षों की मेहनत-मजदूरी और पाई-पाई जोड़कर अपना घर खड़ा किया था। अब आशंका है कि पल भर में यह आशियाना मलबे में बदल जाएगा और उन पर बुलडोजर चल सकता है। फरीदाबाद के जीवन नगर पार्ट-2 में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत प्रशासन के नोटिस पहुंचने के बाद इलाके में डर और बेचैनी का माहौल है। कई परिवारों को अब अपने घरों के भविष्य की चिंता खाए जा रही है।
दस से ज्यादा कॉलोनियों पर चस्पा हुए नोटिस
फरीदाबाद में अवैध तरीके से बस रही कॉलोनियों के खिलाफ डीटीपी इंफोर्समेंट ने सख्ती तेज कर दी है। विभाग ने 10 से अधिक अवैध कॉलोनियों में नोटिस चिपकाए हैं, जिनमें जीवन नगर पार्ट-2 भी शामिल है। नोटिस लगते ही प्रभावित परिवारों में दहशत फैल गई है। लोगों का कहना है कि उन्होंने मजदूरी और कड़ी मेहनत की कमाई से घर बनाए हैं, और अब कार्रवाई की आशंका उन्हें परेशान कर रही है।
'मजदूरी कर एक-एक पैसा जोड़कर बनाया घर'
स्थानीय निवासी बिपिन प्रसाद बताते हैं कि वे मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं और जीवन नगर पार्ट-2 में रहते हुए उन्हें तीन साल हो चुके हैं। उनके मुताबिक, मकान बनाने में करीब 15 लाख रुपये खर्च हुए और तीन दिन पहले उस पर नोटिस चिपका दिया गया।
मैं मजदूरी करता हूं और एक-एक पैसा जोड़कर यह घर बनाया है। अभी बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, ऐसे में समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या होगा।
बिपिन प्रसाद आगे बताते हैं कि उन्होंने जमीन एक डीलर से खरीदी थी, जिसने कभी यह नहीं बताया कि कॉलोनी अवैध है। डीलर ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि मकान बनाकर आराम से रहें। उन्होंने 55 गज में मकान बनाया है। उनका कहना है कि यहां आज भी रास्ते कच्चे हैं और कॉलोनी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है।
कच्ची गलियां और बुनियादी सुविधाओं का अभाव
जीवन नगर पार्ट-2 की बदहाल स्थिति भी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। जिस इलाके में नोटिस लगाए गए हैं, वहां अधिकांश गलियां कच्ची हैं, सड़कें उबड़-खाबड़ हैं और बरसात के दिनों में आना-जाना तक मुश्किल हो जाता है। बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद लोगों ने यहां घर बसाए, लेकिन अब नोटिस मिलने के बाद उनके भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है।
'हमें तो पता ही नहीं था कि जमीन सरकारी है'
स्थानीय निवासी भैरव प्रसाद कहते हैं कि उनके मकान पर नोटिस नहीं लगा है, फिर भी यह कार्रवाई पूरी तरह गलत है। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के रहने वाले भैरव प्रसाद के अनुसार, लोगों ने एक-एक पैसा जोड़कर घर बनाए हैं और उन्हें यह तक नहीं पता था कि जमीन सरकारी है या कॉलोनी अवैध है। मेहनत की कमाई लगाकर ही लोग यहां बसे हैं।
वहीं रामनिवास प्रजापति बताते हैं कि उनके मकान पर नोटिस नहीं लगा, लेकिन कई मकानों पर नोटिस चिपके हैं और कई पर नहीं। उनके मुताबिक यह कॉलोनी अब तक पास नहीं हुई है और डीलर कम कीमत का लालच देकर लोगों को प्लॉट बेच देते हैं। उन्होंने बताया कि यहां प्लॉट का रेट 20 से 22 हजार रुपये प्रति गज तक चल रहा है और लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार पैसे चुकाकर जमीन खरीदी है।
'अपने हाथों से बनाया और तुरंत लग गया नोटिस'
डबुआ कॉलोनी में रहने वाले और मिस्त्री का काम करने वाले विक्रमा भगत बताते हैं कि जिस मकान पर नोटिस चिपकाया गया है, उसे उन्होंने अपने हाथों से करीब 15 लाख रुपये में बनाकर तैयार किया है। उनके मुताबिक मकान बनकर तैयार होते ही उस पर नोटिस लग गया।
अब जीवन नगर पार्ट-2 में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन परिवारों ने वर्षों की मेहनत और जमा-पूंजी लगाकर अपने घर बनाए हैं, उनका आगे क्या होगा। नोटिस के बाद ये लोग असमंजस और डर के माहौल में जी रहे हैं।
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