फरीदाबाद के शिव नगर में बुलडोजर का खौफ, 26 जुलाई तक घर खाली करने के आदेश से सैकड़ों परिवार परेशान हरियाणा एक महीने पहले 46
फरीदाबाद के सेक्टर-22 स्थित शिव नगर में प्रशासन ने घरों को खाली करने का नोटिस जारी किया है, जिससे यहां दशकों से रह रहे लोग भारी संकट और चिंता में हैं।

घरों पर मंडरा रहा बेदखली का खतरा

फरीदाबाद के सेक्टर-22 में बसा शिव नगर इलाका इन दिनों दहशत में है। प्रशासन की ओर से जारी एक सख्त निर्देश के बाद यहां रहने वाले सैकड़ों परिवारों के सिर से छत छिनने का डर सता रहा है। इन निवासियों को 26 जुलाई तक अपने मकान खाली करने का फरमान सुनाया गया है, जिसके बाद से स्थानीय लोग गहरे सदमे में हैं।

बरसात के मौसम में कहां जाएं परिवार?

इस इलाके में कई परिवार ऐसे हैं जो पिछले 40 साल से यहां रह रहे हैं। अब अचानक मिली इस नोटिस से लोग खुद को बेसहारा महसूस कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें ऐसे वक्त पर घर छोड़ने को कहा है जब भारी बारिश का दौर चल रहा है। प्रभावित लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे आखिर इस बरसात में अपने बच्चों और सामान के साथ कहां जाएंगे।

नरक जैसी स्थितियों में रहने को मजबूर

स्थानीय निवासी शीला, जो करीब 20 साल से शिव नगर में रह रही हैं, ने बताया कि यहां की स्थिति बदतर है। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से गंदगी, भीषण बदबू और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन बिताने को मजबूर हैं। शीला के अनुसार, यह इलाका किसी नरक से कम नहीं है, जहां उनके बच्चे अक्सर बीमार पड़ते रहते हैं और मच्छरों के कारण पूरी रात सो पाना भी मुश्किल हो जाता है। उनका आरोप है कि सुविधाओं के नाम पर उन्हें कुछ नहीं मिला, और अब सरकार उनके इस छोटे से आशियाने को भी छीनना चाहती है।

प्रशासन से पुनर्वास की गुहार

एक अन्य स्थानीय निवासी ममता का कहना है कि इतने दशकों से यहां रहने के बाद अब उनके पास रहने के लिए कोई और ठिकाना नहीं है। निवासियों का कहना है कि अगर प्रशासन उन्हें यहां से हटाना ही चाहता है, तो कम से कम उन्हें रहने के लिए कोई वैकल्पिक जगह मुहैया कराई जानी चाहिए। सरकार की ओर से अभी तक किसी भी पुनर्वास योजना का जिक्र न होने से स्थानीय लोगों में आक्रोश और निराशा का माहौल है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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