दिल्ली में फर्जी सरकारी दस्तावेजों का बड़ा खेल बेनकाब, पुलिस ने एक स्टिंग ऑपरेशन में दबोचा शातिर गिरोह क्राइम एक महीने पहले 66
दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ यूनिट ने एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो वेबसाइट के जरिए फर्जी आधार, पैन और वोटर आईडी कार्ड बनाकर बेच रहा था। एक पुलिस अधिकारी द्वारा नकली आधार बनवाने के बाद इस रैकेट की पोल खुली और पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई

राजधानी दिल्ली में चल रहे एक बड़े साइबर रैकेट का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। यह गिरोह फर्जी तरीके से सरकारी दस्तावेज तैयार कर उन्हें ऑनलाइन बेच रहा था। पुलिस की स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस यानी आईएफएसओ यूनिट ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, और जाति प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को चुटकियों में बनाने का झांसा देकर लोगों से पैसे ऐंठ रहे थे। शुरुआती छानबीन में पता चला है कि यह एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह था जो बहुत ही चालाकी से साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था। इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल बैंकिंग फ्रॉड, पहचान की चोरी, और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जा सकता था।

सोशल मीडिया मॉनिटरिंग से हुआ खुलासा

पुलिस को इस गिरोह के बारे में सुराग तब मिला जब साइबर पेट्रोलिंग और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग की जा रही थी। इस दौरान पुलिस की नजर bkprint.in नाम की एक वेबसाइट पर पड़ी। यह वेबसाइट सार्वजनिक रूप से यह दावा कर रही थी कि यहाँ से कोई भी व्यक्ति चंद मिनटों में सरकारी दस्तावेज प्राप्त कर सकता है। वेबसाइट पर उन सभी जरूरी दस्तावेजों की लिस्ट दी गई थी जो किसी भी नागरिक के लिए अपनी पहचान साबित करने के लिए अनिवार्य होते हैं। इस संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलते ही पुलिस ने इस मामले की गहन जांच शुरू कर दी।

पुलिस का स्टिंग ऑपरेशन

वेबसाइट की सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस के अधिकारियों ने एक बेहद सटीक रणनीति अपनाई। पुलिस ने खुद एक डमी यूजर अकाउंट तैयार किया और यह देखने की कोशिश की कि क्या वास्तव में यह वेबसाइट फर्जी दस्तावेज बनाती है। इसके लिए सबसे पहले वेबसाइट पर मौजूद यूपीआई विकल्प का इस्तेमाल करते हुए 100 रुपये का भुगतान किया गया। वॉलेट रिचार्ज होने के बाद, पुलिस ने अपनी तरफ से एक फर्जी नाम और पता दर्ज किया और एक फोटो अपलोड की। कुछ ही समय के भीतर वेबसाइट ने एक आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड तैयार करके दे दिया। जब पुलिस ने इन दस्तावेजों की तकनीकी जांच की, तो पता चला कि इन पर मौजूद क्यूआर कोड किसी भी सरकारी डेटाबेस से नहीं जुड़े थे। वे केवल वही जानकारी प्रदर्शित कर रहे थे जो ग्राहक ने वेबसाइट पर भरी थी। इस प्रक्रिया ने यह साबित कर दिया कि यह वेबसाइट पूरी तरह से फर्जी दस्तावेज बनाने का एक जरिया है।

फर्जी दस्तावेजों का खतरा

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी इतने माहिर थे कि वे जो दस्तावेज बनाते थे, वे पहली नजर में बिल्कुल असली दिखाई देते थे। आम आदमी के लिए इनमें फर्क कर पाना लगभग नामुमकिन था। पुलिस का मानना है कि ऐसे दस्तावेजों का उपयोग कई खतरनाक कार्यों के लिए किया जा सकता है, जैसे कि पहचान की चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी, अवैध सिम कार्ड प्राप्त करना, और विभिन्न सरकारी योजनाओं का गलत लाभ उठाना। इसके अलावा, इनका उपयोग अन्य महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज हासिल करने के लिए आधार के रूप में भी किया जा सकता था।

ऐसे पकड़े गए आरोपी

तकनीकी जांच और डिजिटल पदचिह्नों का पीछा करते हुए पुलिस ने उस वेबसाइट के भुगतान गेटवे की जांच की। जांच के दौरान यह पाया गया कि भुगतान प्राप्त करने वाला यूपीआई खाता बिदेशी साव नाम के व्यक्ति का है, जो दमन और दीव में रह रहा था। दिल्ली पुलिस की एक टीम तुरंत हरकत में आई और दमन पहुंचकर बिदेशी साव को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान उसने कबूल किया कि इस पूरी वेबसाइट का तकनीकी संचालन और बैकएंड का काम बिहार के पटना में रहने वाला संतोष कुमार देख रहा था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने पटना में दबिश दी और संतोष कुमार को भी धर दबोचा।

डिजिटल सबूतों का जखीरा

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों के पास से कई डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। इनमें लैपटॉप और मोबाइल फोन शामिल हैं। शुरुआती फोरेंसिक जांच में पुलिस को वेबसाइट का सोर्स कोड, होस्टिंग से संबंधित दस्तावेज, ग्राहकों का डेटा, और पेमेंट ट्रांजैक्शन की पूरी जानकारी मिली है। इसके अलावा, दोनों आरोपियों के बीच हुई बातचीत के डिजिटल सबूत भी हाथ लगे हैं, जो यह दर्शाते हैं कि वे एक बहुत ही व्यवस्थित तरीके से इस रैकेट को चला रहे थे।

जनता के लिए पुलिस की अपील

इस पूरे मामले के बाद दिल्ली पुलिस ने आम जनता को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के सरकारी दस्तावेज बनवाने के लिए हमेशा अधिकृत सरकारी पोर्टल्स या संबंधित विभाग के कार्यालयों का ही उपयोग करें। अगर कोई व्यक्ति या वेबसाइट बहुत कम समय में पैसे लेकर सरकारी दस्तावेज बनाने का दावा करती है, तो उसकी तुरंत सूचना साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने को दें। पुलिस अभी भी इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है और मामले की जांच जारी है।

सान्वी राणा पाबना के क्राइम एवं राज्य रिपोर्टर हैं, जो अपराध और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें कवर करते हैं। कानून-व्यवस्था, जांच और बड़ी आपराधिक घटनाओं की वे जिम्मेदार रिपोर्टिंग करते हैं। तथ्यों की पुष्टि और संवेदनशीलता उनके काम की पहचान हैं।

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