छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच आकार ले रहा 707 किलोमीटर का रायपुर-धनबाद एक्सप्रेसवे, 16 की जगह महज 8 घंटे में पूरा होगा सफर व्यापार एक घंटा पहले 5
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर से धनबाद के बीच 707 किलोमीटर लंबा आधुनिक एक्सप्रेसवे तैयार कर रहा है। इसके शुरू होने से छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच यात्रा का समय 16 घंटे से घटकर केवल 8 घंटे रह जाएगा।

रायपुर से धनबाद के बीच नया एक्सप्रेसवे: सफर का समय होगा आधा

देशभर में तेजी से मजबूत हो रहे एक्सप्रेसवे नेटवर्क के तहत अब छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच एक और शानदार कॉरिडोर आकार ले रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) भारतमाला परियोजना के तहत 707 किलोमीटर लंबे रायपुर-धनबाद एक्सप्रेसवे का निर्माण कर रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरी तरह से तैयार हो जाने के बाद दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच सड़क मार्ग से आवाजाही करने में लगने वाला समय घटकर आधा रह जाएगा। खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों, घने जंगलों, हरे-भरे पहाड़ों और सुंदर झरनों के बीच से गुजरने वाला यह एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा के समय को बचाएगा, बल्कि सफर करने वाले यात्रियों को एक रोमांचक अनुभव भी प्रदान करेगा।

फिलहाल इस एक्सप्रेसवे को 4 लेन के रूप में विकसित किया जा रहा है। हालांकि, भविष्य में बढ़ते यातायात के दबाव को देखते हुए इसे आसानी से 6 लेन या फिर 8 लेन तक विस्तारित करने की योजना भी शामिल की गई है। इस नए मार्ग के चालू हो जाने से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से झारखंड की राजधानी रांची और प्रमुख औद्योगिक शहर धनबाद तक पहुंचना बेहद आसान, सुरक्षित और तेज हो जाएगा।

120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार और 707 किलोमीटर का नया सफर

वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच पुरानी सड़कों के जरिए सफर करने में यात्रियों को 16 घंटे से भी ज्यादा समय लग जाता है। मौजूदा दौर में दोनों राज्यों के बीच सड़क मार्ग की कुल लंबाई लगभग 772 किलोमीटर है। नया एक्सप्रेसवे बनने से यह दूरी कम होकर केवल 707 किलोमीटर रह जाएगी। यानी दूरी में सीधी कटौती के साथ-साथ सड़क की बनावट में भी बहुत बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

एनएचएआई द्वारा बनाए जा रहे इस आधुनिक एक्सप्रेसवे पर वाहनों को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की अनुमति दी जाएगी। तेज गति से बिना किसी रुकावट के वाहन चलने के कारण 707 किलोमीटर लंबे इस पूरे सफर को महज 8 घंटे में तय किया जा सकेगा। इससे समय की 50% समय बचत होगी और यात्रियों के ईंधन व पैसे की भी बड़ी बचत संभव हो सकेगी।

औद्योगिक गलियारे और खनिज समृद्ध क्षेत्रों को मिलेगा बड़ा फायदा

रायपुर-धनबाद एक्सप्रेसवे सिर्फ आम जनता के लिए आवागमन का साधन भर नहीं रहेगा, बल्कि यह दोनों राज्यों के आर्थिक और औद्योगिक परिदृश्य को बदलने में भी बेहद अहम भूमिका निभाएगा। छत्तीसगढ़ और झारखंड दोनों ही राज्य खनिज संसाधनों के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में गिने जाते हैं। ऐसे में यह एक्सप्रेसवे कोयला उद्योग, खनन क्षेत्रों और विभिन्न भारी उद्योगों के लिए माल की तेज और सुरक्षित आवाजाही को गति देगा।

यह कॉरिडोर दोनों राज्यों के कई बड़े और प्रमुख औद्योगिक केंद्रों को एक साथ जोड़ेगा। इस रास्ते में रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, जसपुर, रांची, बोकारो और धनबाद जैसे महत्वपूर्ण शहर शामिल हैं। इन तमाम औद्योगिक शहरों के आपस में सीधे कनेक्ट होने से व्यापारिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी और माल ढुलाई की लागत में भी काफी कमी आएगी।

ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड मॉडल: 4 से 6 लेन तक का विस्तार

एनएचएआई इस पूरे कॉरिडोर का निर्माण ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों प्रकार की तकनीकों को मिलाकर कर रहा है। योजना के अनुसार, केवल रायपुर से बिलासपुर के बीच का 125 किलोमीटर लंबा हिस्सा 6 लेन ब्राउनफील्ड तर्ज पर चौड़ा और बेहतर बनाया जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि पुरानी सड़क को ही उन्नत करके चौड़ा किया जा रहा है।

दूसरी तरफ, रायपुर-बिलासपुर खंड को छोड़कर एक्सप्रेसवे का बाकी पूरा हिस्सा पूरी तरह से ग्रीनफील्ड तर्ज पर तैयार हो रहा है। यानी बाकी का पूरा रास्ता बिल्कुल नए सिरे से खाली जमीनों और तय रूट से बनाया जा रहा है। यही मुख्य वजह है कि पूरे मार्ग में केवल रायपुर से बिलासपुर का हिस्सा ही 6 लेन का रहेगा, जबकि बाकी का पूरा एक्सप्रेसवे 4 लेन का बनाया जाएगा।

7 पैकेज में बंटा प्रोजेक्ट: जानिए कहां कितना काम हुआ

इस विशाल परियोजना के निर्माण को गति देने के लिए एनएचएआई ने पूरे 707 किलोमीटर लंबे रूट को कुल 7 पैकेज में विभाजित किया है। निर्माण कार्य के अलग-अलग चरणों का विवरण इस प्रकार है:

  • गुमला से रांची सेक्शन: यह इस पूरे एक्सप्रेसवे का सबसे लंबा हिस्सा है, जिसकी लंबाई 140 किलोमीटर है।
  • बोकारो से धनबाद सेक्शन: यह इस प्रोजेक्ट का सबसे छोटा हिस्सा है, जिसकी कुल लंबाई 68 किलोमीटर निर्धारित की गई है।
  • रायपुर से बिलासपुर सेक्शन: लगभग 125 किलोमीटर लंबी इस सड़क को 6 लेन ब्राउनफील्ड एक्सप्रेसवे के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसके निर्माण के लिए एनएचएआई द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) जारी की जा चुकी है। इस खंड के निर्माण पर लगभग 3,500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
  • बिलासपुर से उर्गा सेक्शन: लगभग 70 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड लेन पर निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और यहां लगभग 94 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
  • उर्गा से पाठलगांव सेक्शन: यह 120 किलोमीटर लंबा खंड एक्सप्रेसवे की तीसरी सबसे लंबी सड़क है। इस हिस्से में 87 किलोमीटर लंबी सड़क पर पेविंग का काम तेजी से चल रहा है।
  • पथलगांव से कुंकरी सेक्शन: लगभग 104 किलोमीटर लंबे इस हिस्से पर निर्माण कार्य इसी वर्ष अप्रैल महीने में ही शुरू किया जा चुका है।
  • पथलगांव से गुमला सेक्शन: लगभग 137 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के लिए वर्तमान में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है।

18 हजार करोड़ की लागत और ढांचागत विशेषताएं

एनएचएआई के शुरुआती अनुमानों के अनुसार, 707 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के निर्माण पर कुल लागत लगभग 18 हजार करोड़ रुपये आने की उम्मीद है। इस भारी भरकम बजट में से सबसे बड़ा हिस्सा यानी करीब 3,500 करोड़ रुपये अकेले रायपुर से बिलासपुर वाले सेक्शन पर खर्च किए जाएंगे। एनएचएआई ने इस पूरे प्रोजेक्ट को जनवरी, 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है, जिसके तहत अगले डेढ़ साल के भीतर काम पूरा करने की तैयारी है।

एक्सप्रेसवे पर निर्बाध और सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। इस पूरे रास्ते में विभिन्न प्रकार के पुलों और ओवरपास का निर्माण किया जाएगा, जिसकी मुख्य सूची नीचे दी गई है:

  • पूरे एक्सप्रेसवे रूट पर 7 बड़े पुल बनाए जाएंगे।
  • नदियों और नालों को पार करने के लिए 30 छोटे पुल तैयार किए जा रहे हैं।
  • व्यस्त चौराहों पर 6 फ्लाईओवर का निर्माण प्रस्तावित है।
  • ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए 1 एलिवेटेड रोड बनाई जाएगी।
  • जंगलों और वन्यजीव क्षेत्रों से गुजरने वाली सड़क पर जानवरों और गाड़ियों की सुरक्षा के लिए 10 वेहिकुलर अंडरपास बनाए जाएंगे।
  • स्थानीय आवाजाही और पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए 44 और अंडरपास बनाने की भी योजना है।

इन सभी आधुनिक ढांचागत सुविधाओं के बन जाने से रायपुर-धनबाद एक्सप्रेसवे देश के सबसे प्रमुख और खूबसूरत सड़क संपर्कों में शामिल हो जाएगा, जिससे दोनों राज्यों के निवासियों को तेज, सुगम और सुरक्षित सफर का अनुभव मिलेगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप