दिवाली पर छाया बस्तर का देसी टोरा तेल, सरसों और तिल से है सस्ता, दीया जलाने के लिए पहली पसंद छत्तीसगढ़ 14 घंटे पहले 15
दिवाली के मौके पर बस्तर में महुआ के फल से बना टोरा तेल बाजार में छा गया है। यह तेल सरसों और तिल के मुकाबले काफी सस्ता है और इसकी खासियत है कि इसमें दीया लंबे समय तक जलता है।

बाजार में पारंपरिक तेल की धूम

दीपावली का त्यौहार आते ही हर तरफ रोशनी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बस्तर के बाजारों में इस बार एक खास पारंपरिक उत्पाद ने रौनक बढ़ा दी है, जिसे टोरा तेल के नाम से जाना जाता है। महुआ के फल से तैयार होने वाला यह देसी तेल इन दिनों लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। जगदलपुर के स्थानीय बाजारों में इसकी जबरदस्त मांग देखी जा रही है, जहां ग्रामीण अंचलों के साथ-साथ ओडिशा से आए व्यापारी भी इसे बेचने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

सस्ता और टिकाऊ विकल्प

सामान्य तौर पर दीये जलाने के लिए लोग सरसों या तिल के तेल का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनकी बढ़ती कीमतों के बीच टोरा तेल एक किफायती और बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है। बाजार में इस समय टोरा तेल की कीमत 140 से 150 रुपये प्रति लीटर के बीच बनी हुई है। तुलनात्मक रूप से देखें तो सरसों का तेल करीब 250 रुपये और तिल का तेल 300 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है। ऐसे में आधे से भी कम दाम में उपलब्ध टोरा तेल ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

महुआ के फल से होता है तैयार

ओडिशा से तेल बेचने आईं विक्रेता जेमा कश्यप ने बताया कि टोरा तेल पूरी तरह से प्राकृतिक प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। महुआ के पेड़ से मिलने वाले फल से पहले रस निकाला जाता है और उसी से शुद्ध तेल का निर्माण होता है। यह तेल अन्य व्यावसायिक तेलों की तुलना में काफी गाढ़ा होता है, जो इसकी शुद्धता और गुणवत्ता का प्रमाण है।

लंबे समय तक जलता है दीया

व्यापारियों और स्थानीय लोगों का दावा है कि टोरा तेल की सबसे बड़ी खूबी इसकी जलने की अवधि है। अन्य तेलों की तुलना में, इस तेल से जलाए गए दीये काफी देर तक बुझते नहीं हैं। दिवाली की पूरी रात घर को रोशन रखने के लिए लोग इसे बेहद कारगर मानते हैं। अपनी कम कीमत और लंबे समय तक दीया जलाने की क्षमता के कारण, इस वर्ष जगदलपुर के बाजार में टोरा तेल की बिक्री में भारी उछाल दर्ज किया गया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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