एक्सप्लेनर: अमेरिका-ईरान शांति समझौते के दुनिया पर असर क्या? भारत के लिए यह क्यों है बड़ी राहत और हालात कब तक होंगे सामान्य? भारत एक महीने पहले 45
लंबे तनाव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हुआ शांति समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था और कारोबार के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे बाजारों में स्थिरता लौटेगी और ऊर्जा आपूर्ति की चिंताएं घटेंगी।

अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से चली आ रही खींचतान आखिरकार थम गई है। दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर को दुनिया की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कारोबार के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस समझौते से वैश्विक बाजारों में स्थिरता लौटने और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी आशंकाएं कम होने की उम्मीद बढ़ गई है।

तनाव का अंत, अनिश्चितता पर विराम

बीते 100 दिनों से अधिक समय तक अमेरिका-ईरान तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, शेयर बाजारों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को अनिश्चितता के घेरे में रखा था। अब दोनों ताकतवर देशों के बीच हुए इस अप्रत्याशित समझौते ने न सिर्फ मध्य-पूर्व पर मंडरा रहे युद्ध के खतरनाक संकट को टाल दिया है, बल्कि मंदी की दहलीज पर खड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा दी है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता

तेजी से आगे बढ़ती भारत जैसी अर्थव्यवस्था के लिए यह ऐतिहासिक समझौता किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है। समझौते की खबर आते ही वैश्विक बाजारों में चारों ओर उत्साह का माहौल बन गया है, जिसके भारत के लिए राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तर पर अहम मायने हैं।

आगे क्या?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस शांति समझौते के वैश्विक असर क्या होंगे, भारत को इससे कितना फायदा मिलेगा और दुनिया को पूरी तरह सामान्य स्थिति में लौटने में आखिर कितना समय लगेगा। इन्हीं पहलुओं को विस्तार से समझना जरूरी है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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