दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों का दम: तीन साल में छह गुना उछली EV की बिक्री ऑटो 2 महीने पहले 95
राजधानी दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते पिछले तीन वर्षों में इनकी बिक्री में छह गुना से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है।

बदल रही है दिल्ली की तस्वीर

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों यानी EV का चलन जबरदस्त रफ्तार पकड़ चुका है। बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन द्वारा अपनाई गई सख्त नीतियों और पुराने पेट्रोल व डीजल वाहनों के खिलाफ की गई कार्रवाई का असर अब सड़कों पर नजर आने लगा है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी और जागरूकता के कारण पिछले तीन वर्षों में दिल्ली में इनकी बिक्री में छह गुना से ज्यादा का उछाल आया है। यह बदलाव दर्शाता है कि दिल्ली के निवासी अब पारंपरिक ईंधन वाली गाड़ियों के बजाय इलेक्ट्रिक विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

तीन साल में बिक्री में छह गुना वृद्धि

उपलब्ध आंकड़ों पर गौर करें तो यह साफ होता है कि दिल्ली की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की राह कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है। वर्ष 2024 में दिल्ली के भीतर हर महीने औसतन 1,038 इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण किया जा रहा था। हालांकि, वर्ष 2026 तक आते आते यह मासिक आंकड़ा बढ़कर करीब 7,000 तक पहुंच गया है। आंकड़ों में यह भारी बढ़ोतरी महज तीन साल की अवधि में दर्ज की गई है, जो इलेक्ट्रिक सेगमेंट की सफलता की गवाही देती है।

प्रशासनिक सख्ती का मिला परिणाम

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने पहले से ही 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लगा रखा है। बीते वर्ष प्रशासन ने इन पुराने वाहनों के खिलाफ और कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें जब्त करने की व्यापक मुहिम चलाई। इसके अलावा, जब भी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP के तहत सख्त पाबंदियां लागू की जाती हैं, तो डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी जाती है। इस प्रकार के सख्त नियमों ने आम जनता को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट होने के लिए प्रेरित किया है।

बाजार में विकल्पों की भरमार

एक समय था जब बाजार में इलेक्ट्रिक कारों के सीमित विकल्प ही मौजूद थे, लेकिन आज परिदृश्य बदल चुका है। वर्तमान में लगभग सभी नामी ऑटोमोबाइल कंपनियों ने अपने अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक मॉडल बाजार में उतार दिए हैं। यहाँ तक कि लक्जरी वाहन निर्माता भी अब EV सेगमेंट में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं। इन विकल्पों के बढ़ने से ग्राहकों को अपने बजट और सुविधा के अनुसार सही चुनाव करने में आसानी हुई है।

पर्यावरण और आर्थिक बचत

इलेक्ट्रिक वाहन केवल पर्यावरण को स्वच्छ रखने में ही सहायक नहीं हैं, बल्कि ये पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से होने वाले भारी खर्च से भी राहत देते हैं। शहरों में बेहतर होते चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं की वजह से आने वाले समय में दिल्ली में EV की मांग और तेज होने की पूरी संभावना है। राजधानी दिल्ली अब पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रही है।

सुमित बंसल पाबना के ऑटो एवं बिजनेस रिपोर्टर हैं, जो कार, बाइक और ऑटो उद्योग की खबरें कवर करते हैं। नई गाड़ियों के लॉन्च, फीचर्स, कीमत और ईवी जैसे बदलते रुझानों पर वे विस्तार से लिखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स खरीदारों को सही फैसला लेने में मदद करती हैं।

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