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एक घंटा पहले
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मध्य प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में इन दिनों एक आईएएस-आईपीएस अधिकारी दंपति की जमकर चर्चा हो रही है। यह जोड़ी कोई साधारण जोड़ी नहीं है, बल्कि देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को पास करके देश की सेवा में जुटी है। इस दंपति में पति जिला कलेक्टर के रूप में प्रशासनिक कमान संभाल रहे हैं, तो वहीं पत्नी पुलिस अधीक्षक यानी SP के तौर पर कानून-व्यवस्था की सुरक्षा कर रही हैं। यह कहानी है मध्य प्रदेश कैडर के 2017 बैच के आईएएस दिव्यांक सिंह और इसी बैच की आईपीएस अधिकारी हितिका वसाल की। इन दोनों अधिकारियों के करियर की शुरुआत जितनी शानदार रही है, उनकी व्यक्तिगत जिंदगी और उनके प्यार की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है। प्रशिक्षण के दौरान शुरू हुई इनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदली और फिर दोनों ने शादी करने का फैसला किया। आज यह दंपति मध्य प्रदेश के दो अलग-अलग महत्वपूर्ण जिलों में शीर्ष पदों पर तैनात होकर राज्य सरकार की नीतियों और योजनाओं को जमीनी स्तर पर अमलीजामा पहना रहा है।
यूपीएससी के प्रशिक्षण से शुरू हुई प्रेम कहानी और विवाह
दिव्यांक सिंह और हितिका वसाल के सिविल सेवा के सफर की शुरुआत लगभग एक ही समय पर हुई थी। दोनों ने वर्ष 2016 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की थी और इसके बाद दोनों 2017 बैच के अधिकारी बने। जब दोनों अपने-अपने संवर्ग के प्रशिक्षण के लिए गए, तो वहां उनकी पहली मुलाकात हुई। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत और दोस्ती हुई। सिविल सेवा के कड़े प्रशिक्षण और देश सेवा के समान संकल्प ने दोनों को एक-दूसरे के और करीब ला दिया। समय के साथ यह दोस्ती गहरी होती गई और अंततः प्यार में बदल गई। इसके बाद दोनों ने जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने का फैसला किया और वर्ष 2020 में दोनों परिणय सूत्र में बंध गए। विवाह के बाद उनके प्रशासनिक करियर में भी एक बड़ा बदलाव आया। दरअसल, हितिका वसाल को परीक्षा पास करने के बाद राजस्थान कैडर आवंटित किया गया था, जबकि दिव्यांक सिंह को मध्य प्रदेश कैडर मिला था। शादी के बाद हितिका ने नियमानुसार विवाह के आधार पर अपना कैडर बदलवाने का अनुरोध किया। उनके इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया गया और वे राजस्थान से स्थानांतरित होकर मध्य प्रदेश कैडर में आ गईं। इस तरह दोनों अधिकारी एक ही राज्य में अपनी सेवाएं देने लगे।
आईएएस दिव्यांक सिंह का सफर: आईआईटी गांधीनगर से सिविल सेवा तक
आईएएस दिव्यांक सिंह मध्य प्रदेश कैडर के वर्ष 2017 बैच के बेहद प्रतिभावान और होनहार अधिकारी हैं। उनका जन्म 24 मई 1991 को हुआ था। दिव्यांक बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में काफी कुशाग्र थे। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी गांधीनगर से पूरी की, जहां से उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग में BTech की डिग्री प्राप्त की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध और इंटर्नशिप करने का मौका मिला। उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थान यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी शिकागो और केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी ओहायो में शोध कार्य और इंटर्नशिप की। इस अंतरराष्ट्रीय अनुभव ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में मदद की। हालांकि, विदेशों में काम करने के बेहतरीन अवसरों के बावजूद दिव्यांक ने देश में रहकर जनसेवा करने का विकल्प चुना और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।
पहले प्रयास में बने आईपीएस, फिर लक्ष्य हासिल कर बने आईएएस
दिव्यांक सिंह का यूपीएससी का सफर बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की कठिन परीक्षा को पास कर लिया। इस प्रयास में उन्हें अखिल भारतीय स्तर पर 771वीं रैंक हासिल हुई, जिसके आधार पर उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS के लिए हुआ। उन्होंने हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में आईपीएस का प्रशिक्षण भी शुरू कर दिया। हालांकि, दिव्यांक का असली सपना भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS में जाने का था। अपने इस लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने हार नहीं मानी और प्रशिक्षण के साथ-साथ दोबारा परीक्षा की तैयारी जारी रखी। उनके इस दृढ़ संकल्प का फल उन्हें अगले ही प्रयास में मिला, जब उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2016 में शानदार प्रदर्शन करते हुए अखिल भारतीय स्तर पर 347वीं रैंक हासिल की। इस शानदार रैंक के साथ उनका आईएएस बनने का सपना पूरा हो गया और वे वर्ष 2017 बैच के आईएएस अधिकारी के रूप में मध्य प्रदेश कैडर में शामिल हुए।
आईएएस के रूप में दिव्यांक सिंह का प्रशासनिक कार्यकाल
आईएएस अधिकारी के रूप में अपनी सेवा शुरू करने के बाद दिव्यांक सिंह ने मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। उनके प्रशासनिक करियर का ग्राफ लगातार आगे बढ़ता रहा है, जिसे हम निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझ सकते हैं:
- सबसे पहले उन्होंने गुना जिले में सहायक कलेक्टर के रूप में अपने प्रशासनिक जीवन की शुरुआत की।
- इसके बाद वे सतना जिले में अनुविभागीय अधिकारी यानी SDM के पद पर तैनात रहे, जहां उन्होंने स्थानीय प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य किए।
- दिव्यांक सिंह को इसके बाद खरगोन जिले में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी यानी CEO की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई, जहां उन्होंने ग्रामीण विकास की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया।
- उन्होंने केंद्र सरकार के स्तर पर भी काम किया, जहां वे नीति आयोग में सहायक सचिव के पद पर रहे। इस दौरान उन्होंने देश की नीति-निर्माण प्रक्रियाओं को करीब से समझा।
- वापस मध्य प्रदेश आने पर उन्हें भोपाल नगर निगम के अपर आयुक्त और वाणिज्यिक कर विभाग के अपर आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी दी गई।
- इसके बाद वे इंदौर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी यानी CEO बने, जहां उनके काम की राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भारी सराहना हुई।
- मंदसौर के कलेक्टर बनने से पहले वे मध्य प्रदेश सरकार के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में अपर आयुक्त के पद पर कार्यरत थे।
इंदौर स्मार्ट सिटी में नवाचार और देश का पहला म्युनिसिपल ग्रीन बॉन्ड
दिव्यांक सिंह को प्रशासनिक हलकों में एक ऐसे अधिकारी के रूप में जाना जाता है जो लीक से हटकर सोचने और परिणाम देने में विश्वास रखते हैं। जब वे इंदौर स्मार्ट सिटी के CEO थे, तब उन्होंने शहर के बुनियादी ढांचे और पर्यावरण के अनुकूल विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि इंदौर स्मार्ट सिटी द्वारा देश का पहला म्युनिसिपल ग्रीन बॉन्ड जारी करना रही। इंदौर पहले से ही पूरे देश में अपनी स्वच्छता के लिए अग्रणी रहा है, और इस ग्रीन बॉन्ड के माध्यम से शहर में सौर ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के लिए फंड जुटाया गया। दिव्यांक के नेतृत्व में हुए इन नवाचारों ने इंदौर को सतत विकास के वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान दी।
मंदसौर के जिला कलेक्टर के रूप में मिली नई जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश सरकार ने जुलाई 2026 में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा फेरबदल किया, जिसके तहत दिव्यांक सिंह को मंदसौर जिले का नया जिला कलेक्टर नियुक्त किया गया। उनसे पहले मंदसौर की कमान महिला आईएएस अधिकारी अदिति गर्ग के हाथों में थी। तबादला आदेश के तहत अदिति गर्ग को भोपाल में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का डायरेक्टर नियुक्त किया गया, जबकि दिव्यांक सिंह को मंदसौर की कमान सौंपी गई। अब मंदसौर के कलेक्टर के रूप में दिव्यांक सिंह के कंधों पर जिले के सर्वांगीण विकास, शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन और कानून-व्यवस्था के साथ-साथ प्रशासनिक तंत्र को चुस्त-दुरुस्त रखने की बड़ी जिम्मेदारी है।
आईपीएस हितिका वसाल: पंजाब की बेटी जिसने हासिल की 121वीं रैंक
आईएएस दिव्यांक सिंह की पत्नी हितिका वसाल भी भारतीय पुलिस सेवा की एक बेहद काबिल और सख्त अधिकारी हैं। मूल रूप से पंजाब की रहने वाली हितिका ने भी यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2016 में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। उन्होंने इस अत्यंत कठिन परीक्षा में देश भर में 121वीं रैंक हासिल की थी। इस बेहतरीन प्रदर्शन के आधार पर उन्हें भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS के लिए चुना गया और शुरुआती तौर पर राजस्थान कैडर आवंटित किया गया था। राजस्थान में उन्होंने पुलिसिंग के गुर सीखे और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने में अपनी क्षमता साबित की, जिसके बाद शादी के आधार पर उनका तबादला मध्य प्रदेश कैडर में हुआ।
गुना जिले की पुलिस कप्तान के रूप में बड़ी भूमिका
वर्ष 2020 में दिव्यांक सिंह से विवाह के बाद हितिका वसाल ने अपना कैडर बदलकर मध्य प्रदेश करा लिया। मध्य प्रदेश आने के बाद भी उन्होंने पुलिस विभाग में अपनी कर्तव्यनिष्ठा और कार्यकुशलता से एक अलग पहचान बनाई है। मध्य प्रदेश सरकार ने 22 मार्च 2026 को एक बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें गुना जिले का पुलिस अधीक्षक यानी SP नियुक्त किया। गुना जैसे संवेदनशील जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराधों पर नियंत्रण पाना और आम जनता के बीच पुलिस की छवि को सुधारना हितिका वसाल की प्राथमिकताओं में शामिल है। अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जानी जाने वाली हितिका वर्तमान में गुना पुलिस बल का नेतृत्व बेहद कुशलता से कर रही हैं और उनकी कार्यप्रणाली की काफी चर्चा भी होती है।
मध्य प्रदेश का चर्चित प्रशासनिक कपल: एक जिले में कलेक्टर, दूसरे में SP
मध्य प्रदेश के हालिया प्रशासनिक फेरबदल के बाद यह आईएएस-आईपीएस जोड़ी एक बार फिर पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। इसका कारण यह है कि जहां एक तरफ पति दिव्यांक सिंह मंदसौर जिले के जिला कलेक्टर के रूप में जिले की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को संभाल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पत्नी हितिका वसाल गुना जिले की पुलिस कप्तान यानी SP के रूप में वहां की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। एक ही राज्य के दो अलग-अलग महत्वपूर्ण जिलों में इस दंपति का इतने बड़े पदों पर होना और अपनी सेवाएं देना प्रशासनिक हलकों में बेहद सम्मान की दृष्टि से देखा जा रहा है। यूपीएससी की तैयारी से लेकर ट्रेनिंग के दिनों की दोस्ती, फिर प्यार, शादी और अब मध्य प्रदेश के दो बड़े जिलों की कमान संभालना, दिव्यांक सिंह और हितिका वसाल की यह कहानी देश के लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनकर उभरी है।
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