करियर
एक घंटा पहले
2
विचारों
बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने एक नया इतिहास लिख दिया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की इस चुनावी मैदान में हुई शानदार जीत ने जहां उनके राजनीतिक कद को नई ऊंचाई दी है, वहीं उनके परिवार को लेकर भी लोगों की उत्सुकता काफी बढ़ा दी है। इस समय राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच प्रशांत किशोर की पत्नी डॉ. जाह्नवी दास सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई हैं। चुनावी गहमागहमी और जन सुराज के बड़े अभियानों के दौरान डॉ. जाह्नवी दास ने भले ही खुद को मुख्यधारा के राजनीतिक प्रचार और मीडिया से पूरी तरह दूर रखा हो, लेकिन प्रशांत किशोर के संघर्षों के पीछे वह हमेशा सबसे मजबूत स्तंभ की तरह खड़ी रही हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि डॉ. जाह्नवी दास कौन हैं, उनकी शिक्षा-दीक्षा कहां हुई और प्रशांत किशोर के इस मुकाम तक पहुंचने में उनका क्या योगदान रहा है।
गुवाहाटी की रहने वाली हैं डॉ. जाह्नवी दास, दिल्ली से भी रहा है नाता
डॉ. जाह्नवी दास मूल रूप से असम के गुवाहाटी की रहने वाली हैं। उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र को अपने करियर के रूप में चुना और मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर बनीं। चिकित्सा जगत में उनका करियर काफी शानदार और सफल माना जाता रहा है। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्वास्थ्य कार्यक्रमों में अपनी सेवाएं दी हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में उनके योगदान को काफी सराहनीय माना जाता रहा है। हाल के वर्षों में उनके बारे में यह जानकारी भी सामने आई कि वह देश की राजधानी दिल्ली के एक बड़े निजी अस्पताल से भी जुड़ी रही हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में इतनी बड़ी पहचान होने के बावजूद उन्होंने हमेशा खुद को और अपने निजी जीवन को मीडिया की चकाचौंध से दूर रखना ही पसंद किया है।
संयुक्त राष्ट्र के स्वास्थ्य कार्यक्रम में हुई थी पहली मुलाकात
प्रशांत किशोर और डॉ. जाह्नवी दास की पहली मुलाकात किसी राजनीतिक मंच या पारिवारिक आयोजन में नहीं हुई थी, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि बेहद पेशेवर और सामाजिक सरोकार से जुड़ी थी। दोनों की पहली मुलाकात संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक स्वास्थ्य कार्यक्रम के दौरान हुई थी। उस समय प्रशांत किशोर राजनीति की दुनिया से पूरी तरह दूर थे और सार्वजनिक स्वास्थ्य (पब्लिक हेल्थ) से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे थे। प्रशांत किशोर भी सक्रिय राजनीति में कदम रखने से पहले लगभग 8 साल तक संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके थे।
उसी दौरान डॉ. जाह्नवी दास भी उसी जन स्वास्थ्य परियोजना का हिस्सा थीं। काम के सिलसिले में दोनों की मुलाकातें होने लगीं और धीरे-धीरे उनके बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। यह पेशेवर संबंध समय के साथ गहरी दोस्ती में बदल गया। दोनों के विचार और जीवन के प्रति दृष्टिकोण काफी मिलते-जुलते थे, जिसके कारण यह दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई और कई वर्षों तक एक-दूसरे को समझने के बाद दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया।
परिवार के लिए डॉक्टरी के पेशे से दूरी बनाने का बड़ा फैसला
शादी के बाद डॉ. जाह्नवी दास ने अपने जीवन में एक बड़ा बदलाव लाने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने परिवार और गृहस्थी को प्राथमिकता देने के लिए अपनी सक्रिय मेडिकल प्रैक्टिस से दूरी बना ली ताकि वह परिवार की जिम्मेदारियां बेहतर ढंग से संभाल सकें। प्रशांत किशोर और डॉ. जाह्नवी दास का एक बेटा है, जो वर्तमान में आठवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है।
डॉ. जाह्नवी के इस फैसले और उनके इस बड़े सहयोग की सराहना खुद प्रशांत किशोर कई बार सार्वजनिक मंचों पर कर चुके हैं। प्रशांत किशोर ने खुले दिल से स्वीकार किया है कि अगर उनकी पत्नी ने परिवार की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर नहीं ली होती, तो उनके लिए बिहार के गांवों में लगातार पदयात्रा करना और इतना बड़ा राजनीतिक अभियान चलाना नामुमकिन होता। एक कार्यक्रम के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा था कि उनकी पत्नी एक डॉक्टर हैं, लेकिन उन्होंने स्वेच्छा से घर-परिवार को संभाला ताकि वह बिना किसी चिंता के बिहार के लोगों के बीच रहकर अपना काम कर सकें।
साल 2024 में पहली बार आईं सार्वजनिक मंच पर नजर
लंबे समय तक खुद को राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से दूर रखने के बाद डॉ. जाह्नवी दास को पहली बार साल 2024 में लोगों ने करीब से देखा। अगस्त 2024 में बिहार की राजधानी पटना में आयोजित ‘जन सुराज महिला संवाद’ कार्यक्रम के दौरान प्रशांत किशोर ने पहली बार अपनी पत्नी को जनता के सामने पेश किया और मंच पर उनका परिचय कराया।
उस ऐतिहासिक क्षण के दौरान प्रशांत किशोर ने मंच से कहा था कि आज वह समाज के लिए जो कुछ भी कर पा रहे हैं, उसमें उनकी पत्नी का सबसे बड़ा योगदान है। यह पहला मौका था जब बिहार की जनता ने प्रशांत किशोर की इस सबसे बड़ी ताकत को किसी सार्वजनिक और राजनीतिक मंच पर देखा था। हाल ही में हुए चुनावी खुलासे की बात करें तो प्रशांत किशोर द्वारा दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे में यह जानकारी भी सामने आई है कि उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास के पास 111 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है।
जन सुराज में कोई राजनीतिक भूमिका नहीं
भले ही प्रशांत किशोर जन सुराज के माध्यम से बिहार की राजनीति में एक बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं, लेकिन उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सक्रिय राजनीति में आने की कोई योजना नहीं है। बांकीपुर उपचुनाव में मिली बड़ी सफलता के बाद जब मीडिया ने उनसे बातचीत की, तो उन्होंने बहुत ही शालीनता से अपनी बात रखी। डॉ. जाह्नवी दास ने कहा कि वह राजनीति में कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाना चाहतीं। उनका मानना है कि राजनीतिक कार्यों और संगठन को संभालने के लिए प्रशांत किशोर के पास एक बहुत ही कुशल और समर्पित टीम है और वह केवल उनके निजी जीवन में उनकी सहयोगी के रूप में रहना पसंद करती हैं तथा जहां तक संभव हो सके, उन्हें अपना समर्थन देती हैं।
बांकीपुर की जीत पर क्या बोलीं डॉ. जाह्नवी?
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद डॉ. जाह्नवी दास ने बिहार और विशेष रूप से बांकीपुर की जनता का दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें शुरुआत से ही इस बात का पूरा भरोसा था कि बांकीपुर के लोग इस बार बदलाव के पक्ष में वोट करेंगे। जीत को लेकर अपनी खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने निम्नलिखित बातें कहीं:
- बांकीपुर के लोगों ने यह साबित कर दिया है कि वे नया विकल्प और बदलाव चाहते हैं, जिसके कारण वह इस जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थीं।
- प्रशांत किशोर ने पिछले कई वर्षों से लगातार जमीन पर रहकर कड़ा संघर्ष और अथक परिश्रम किया है।
- बिहार की जनता ने अब उनके इस समर्पण, मेहनत और ईमानदारी को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया है।
प्रशांत किशोर की सबसे बड़ी ताकत बनीं डॉ. जाह्नवी
प्रशांत किशोर के करीबियों और जन सुराज के कार्यकर्ताओं का मानना है कि डॉ. जाह्नवी दास ही प्रशांत किशोर की असली ताकत हैं। चाहे वह पदयात्रा के मुश्किल दिन रहे हों या चुनावी रणनीतियों की आपाधापी, उन्होंने हमेशा परदे के पीछे रहकर प्रशांत किशोर को मानसिक और पारिवारिक संबल दिया है। डॉ. जाह्नवी की इसी सादगी, समर्पण और सूझबूझ के कारण अब बिहार की जनता के बीच भी उन्हें लेकर गहरा सम्मान और उत्सुकता देखी जा रही है। भले ही वह खुद को राजनीति से दूर रखती हैं, लेकिन प्रशांत किशोर के हर बड़े कदम के पीछे उनकी मूक सहमति और मजबूत समर्थन हमेशा मौजूद रहता है।
Comments
0 comment