NEET टॉपर आर्यन गुप्ता की सफलता की कहानी: दादी के कैंसर ने बदला जीवन, 17 घंटे की पढ़ाई कर हासिल की AIR-1 करियर एक महीने पहले 79
पंजाब के लुधियाना के रहने वाले आर्यन गुप्ता ने NEET UG 2026 में 720 में से 715 अंक लाकर ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है। बचपन में दादी को कैंसर से खोने के बाद डॉक्टर बनने का संकल्प लेने वाले आर्यन का सफर कड़ी मेहनत और संघर्षों से भरा रहा है।

दादी के निधन ने दी डॉक्टर बनने की प्रेरणा

नीट यूजी 2026 परीक्षा में देशभर में शीर्ष स्थान यानी ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त करने वाले पंजाब के आर्यन गुप्ता की कामयाबी महज आंकड़ों का खेल नहीं है। यह उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते। आर्यन की इस गौरवमयी उपलब्धि के पीछे एक गहरा भावनात्मक कारण है। जब वह महज तीसरी कक्षा में पढ़ रहे थे, उस दौरान उन्होंने अपनी दादी को कैंसर जैसी घातक बीमारी के कारण खो दिया था। उस कम उम्र में हालांकि उन्हें चिकित्सा विज्ञान की जटिलताएं समझ नहीं आई होंगी, लेकिन परिवार के सदस्य को खोने का दर्द उनके मन में घर कर गया।

दादी की आंखों के सामने तड़प और इलाज के दौरान परिवार द्वारा झेली गई मुश्किलों को आर्यन ने बहुत करीब से महसूस किया था। उसी समय उन्होंने अपने नन्हे मन में यह ठान लिया था कि बड़े होकर वह एक ऐसे डॉक्टर बनेंगे जो कैंसर के मरीजों का इलाज कर पाएंगे। आज वर्षों की अथक मेहनत के बाद, उन्होंने न केवल डॉक्टर बनने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठा लिया है, बल्कि देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली प्रवेश परीक्षा में शीर्ष स्थान भी प्राप्त कर लिया है। उनका अगला लक्ष्य ऑन्कोलॉजिस्ट यानी कैंसर विशेषज्ञ बनकर समाज की सेवा करना है।

715 अंकों के साथ देशभर में लहराया परचम

लुधियाना के रहने वाले आर्यन गुप्ता ने नीट यूजी 2026 की परीक्षा में 720 में से 715 अंक हासिल कर इतिहास रच दिया है। इस सफलता के साथ ही वह पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए हैं। आर्यन के साथ हरियाणा के पंकज बंसल ने भी संयुक्त रूप से पहली रैंक साझा की है। परिणाम आने के बाद उनके लुधियाना स्थित आवास पर खुशी का माहौल छा गया। रिश्तेदार, पड़ोसी और मित्र उन्हें लगातार बधाई देने पहुंच रहे हैं। आर्यन का कहना है कि ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त करना किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्हें अभी भी यह विश्वास नहीं हो रहा कि उन्होंने पूरे भारत में पहला स्थान प्राप्त किया है, और यह सब उन्हें अब भी किसी हसीन ख्वाब जैसा प्रतीत होता है।

16 से 17 घंटे की पढ़ाई और अनुशासन का मंत्र

नीट जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षा में टॉप करना कोई आसान कार्य नहीं है। इसके लिए आर्यन ने अपनी दिनचर्या में अनुशासन को प्राथमिकता दी थी। तैयारी के दौरान वह रोजाना औसतन 16 से 17 घंटे पढ़ाई में बिताते थे। कई बार पढ़ाई का बोझ और अच्छे अंक लाने का दबाव इतना अधिक होता था कि उन्हें रातों में नींद आना भी मुश्किल हो जाता था। हालांकि, उन्होंने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाए रखा। उनका मानना है कि लगातार पढ़ाई करना ही सफलता की एकमात्र चाबी नहीं है, बल्कि शरीर और मस्तिष्क का चुस्त होना भी उतना ही आवश्यक है। वह रात में करीब 7 घंटे की नींद लेते थे और दिन के समय भी एक घंटे का विश्राम करते थे ताकि पढ़ाई के दौरान उनका दिमाग पूरी तरह से तरोताजा रहे।

डॉक्टरों का परिवार और मार्गदर्शन

आर्यन एक ऐसे परिवेश में पले-बढ़े हैं जहां चिकित्सा विज्ञान उनके डीएनए में है। उनके पिता डॉ. विश्वविद्ध सिन्हा और मां गायत्री देवी दोनों ही चिकित्सक हैं। इसके अतिरिक्त उनके परिवार में नाना-नानी, चाचा-चाची और बुआ-फूफा भी चिकित्सा के क्षेत्र में ही कार्यरत हैं। ऐसे डॉक्टर प्रधान परिवार में पले-बढ़े होने के कारण उन्हें बचपन से ही डॉक्टर बनने की प्रेरणा मिलती रही। आर्यन की सफलता में उनके बड़े भाई का भी अतुलनीय योगदान रहा है, जिन्होंने खुद नीट यूजी 2025 में 54वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की थी। आर्यन स्वीकार करते हैं कि उनके भाई ने रणनीति बनाने, कमजोरी सुधारने और कठिन समय में उनका मार्गदर्शन करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पेपर लीक की चुनौतियों से जूझकर की वापसी

आर्यन की राह इतनी आसान नहीं थी। नीट यूजी 2026 की पहली परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक के विवाद के बाद इसे रद्द कर दिया गया। जब उन्हें यह खबर मिली, तो वह अंदर से टूट गए थे। आर्यन ने बताया कि उस समय वह लगातार दो दिनों तक रोते रहे क्योंकि उन्हें लगा कि उनकी महीनों की कड़ी मेहनत बेकार हो गई है। लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने स्वयं को संभाला और यह समझा कि यह समस्या केवल उनके साथ नहीं बल्कि देश के लाखों परीक्षार्थियों के साथ है। इसके बाद उन्होंने नई ऊर्जा के साथ दोबारा तैयारी शुरू की। आर्यन ने यह भी खुलासा किया कि पहली परीक्षा में उनके 5 सवाल गलत हो गए थे। यदि वह परीक्षा रद्द नहीं होती, तो शायद वह टॉप नहीं कर पाते। दूसरी बार मिले मौके को उन्होंने भुनाया और 715 अंकों के साथ शीर्ष स्थान सुनिश्चित किया।

तैयारी की नींव

यद्यपि आर्यन स्कूल के दिनों से ही मेधावी रहे और उन्होंने कई ओलंपियाड प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपना कौशल निखारा था, लेकिन नीट की गंभीर तैयारी उन्होंने 11वीं कक्षा से शुरू कर दी थी। उन्होंने अपने मूलभूत सिद्धांतों यानी बेसिक कॉन्सेप्ट्स को मजबूत करने पर पूरा ध्यान दिया। लगातार अभ्यास करना और नियमित अंतराल पर मॉक टेस्ट देना उनकी सफलता का मूल मंत्र रहा है। इसी अनुशासनबद्ध जीवनशैली ने उन्हें आज देश का सबसे होनहार छात्र बना दिया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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