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2 घंटे पहले
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समस्तीपुर के डॉ. अभिषेक की प्रेरणादायक यात्रा
बिहार के समस्तीपुर जिले के पटोरी स्थित फॉर्म टोला के रहने वाले डॉ. अभिषेक ने नीट पीजी में ऑल इंडिया 67वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम गौरवान्वित किया है। उनकी यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे वर्षों का संघर्ष, अटूट धैर्य और एक मां का अदम्य साहस छिपा है। उनके सफर का सबसे हृदयविदारक पड़ाव वह था, जब बोर्ड परीक्षा के दौरान ही उनके पिता का देहांत हो गया था। उस विकट परिस्थिति में उनकी मां संगीता रानी ने अपने भीतर के पहाड़ जैसे दुख को दबाकर बेटे को परीक्षा में बैठने के लिए प्रेरित किया, ताकि उसका भविष्य सुरक्षित रहे।
पिता का निधन और मां का कठोर फैसला
डॉ. अभिषेक के लिए वर्ष 2018 उनके जीवन का सबसे कठिन और दुखद साल रहा। उनके पिता स्वर्गीय राजाराम राय उस समय अस्वस्थ चल रहे थे और दिल्ली में उपचाराधीन थे। दुर्भाग्यवश, जिस दिन अभिषेक की बोर्ड परीक्षा थी, उसी दिन उनके पिता का निधन हो गया। घर में कोहराम मचा था और एक पत्नी के लिए अपने पति को खोने का दर्द असहनीय था, लेकिन मां संगीता रानी ने उस वक्त एक बेहद कड़ा निर्णय लिया। उन्होंने इस दुखद खबर को अभिषेक से छिपाए रखने का फैसला किया। उनका मानना था कि यदि अभिषेक को पिता की मृत्यु की जानकारी हो गई, तो वह टूट जाएगा और उसकी पढ़ाई व भविष्य प्रभावित होगा।
परीक्षा के दौरान छिपाए रखा सच
मां संगीता रानी ने इस कठिन घड़ी में न केवल धैर्य बनाए रखा, बल्कि अभिषेक की पढ़ाई और परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसके शिक्षकों से भी संवाद किया। शिक्षक ने भी मां के इस कठिन निर्णय में उनका साथ दिया। अभिषेक उस समय पूरी तरह अनजान थे कि उनके सिर से पिता का साया उठ चुका है और घर में क्या कुछ बीत रहा है। उन्होंने पूरी एकाग्रता के साथ अपनी बोर्ड परीक्षा दी। जब बाद में उन्हें सच्चाई का पता चला, तो वह स्थिति किसी के लिए भी संभालने योग्य नहीं थी, लेकिन उस दिन की उनकी मेहनत और मां का अटूट विश्वास ही था, जिसके दम पर उन्होंने उस परीक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए।
सफलता का संकल्प और NEET PG में बड़ी उपलब्धि
बचपन से ही डॉ. अभिषेक का सपना डॉक्टर बनने का था। उनकी मां ने हमेशा उन्हें इस लक्ष्य के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2020 में उन्होंने NEET UG की परीक्षा उत्तीर्ण की और रांची स्थित रिम्स (RIMS) में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक ने इंटर्नशिप के साथ-साथ नीट पीजी (NEET PG) की तैयारी भी जारी रखी। यह उनका पहला प्रयास था और इस पहले ही प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया 67वीं रैंक हासिल करके एक मिसाल कायम की है। अभिषेक का मानना है कि पिता की मृत्यु के बाद उपजी परिस्थितियों ने उन्हें जीवन में और अधिक मजबूती प्रदान की है। उन्होंने संकल्प लिया है कि वह एक कुशल डॉक्टर बनकर पूरी ईमानदारी के साथ लोगों की सेवा करेंगे।
मां का सपना और परिजनों का गर्व
बेटे की इस कामयाबी को देखकर मां संगीता रानी की आंखें नम हो गईं। उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से ही अपने बेटे की क्षमताओं पर पूर्ण भरोसा था। उनका सपना था कि उनका बड़ा बेटा डॉक्टर बने और छोटा बेटा इंजीनियर बने। आज अभिषेक ने डॉक्टर बनकर उनका यह सपना साकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि उस दिन पिता की मृत्यु की खबर छिपाकर बेटे को परीक्षा देने भेजने का निर्णय आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने दुख को दरकिनार कर बेटे के करियर को प्राथमिकता दी।
क्षेत्र में खुशी की लहर
अभिषेक की इस शानदार उपलब्धि पर उनके मामा डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि उन्होंने अपने भांजे को पिता की मृत्यु के बाद बेहद विपरीत परिस्थितियों में पढ़ाई जारी रखते हुए देखा है। आज यह रैंक पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। उनकी बड़ी बहन अनामिका कुमारी ने भी भाई की सफलता पर अपार खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि रिजल्ट आने के बाद पूरे परिवार का माहौल खुशियों से भर गया है। इसके अलावा, पर्यावरण सेवी सुजीत कुमार भगत ने भी उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि इतनी छोटी उम्र में पिता का साया खोना और फिर ऐसी विषम परिस्थितियों से गुजरकर सफलता प्राप्त करना, अभिषेक के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। यह सफलता उन सभी छात्रों के लिए एक प्रेरणा है जो जीवन में संघर्षों से जूझ रहे हैं।
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