BIT मेसरा में सिविल इंजीनियरिंग के टॉपर बने जम्मू के विपुल, परिवार के पहले इंजीनियर बनकर रचा इतिहास करियर 2 घंटे पहले 5
जम्मू से रांची आकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले विपुल परासर ने बीआईटी मेसरा के दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल हासिल कर अपने माता-पिता का सपना पूरा किया है।

संघर्ष और सफलता की नई दास्तां

रांची स्थित प्रतिष्ठित संस्थान बीआईटी मेसरा के हालिया दीक्षांत समारोह में विपुल परासर ने अपनी मेहनत का लोहा मनवाया है। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग विषय में गोल्ड मेडल प्राप्त कर न केवल अपने संस्थान का मान बढ़ाया है, बल्कि अपने पूरे परिवार के लिए एक मिसाल कायम की है। विपुल अपने पूरे खानदान के पहले इंजीनियर हैं। जम्मू से रांची तक का उनका यह सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है, जिसमें आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

माता-पिता के अधूरे सपनों को दी नई उड़ान

विपुल ने बताया कि उनके पिता ने 11वीं कक्षा तक पढ़ाई की है, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं और घर संभालती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन माता-पिता ने हमेशा अपने बेटे को उच्च शिक्षा दिलाने का सपना देखा। विपुल के अनुसार, जम्मू से रांची आकर पढ़ाई करना उनके लिए एक बड़ा निर्णय था। उन्होंने अपने मित्रों को भी इस संस्थान में पढ़ते देखा था, जिसके बाद उन्होंने भी बीआईटी मेसरा में दाखिला लिया। आज गोल्ड मेडल पाकर उनके माता-पिता अत्यंत प्रसन्न हैं, और उनकी खुशी को देखकर विपुल को अपनी मेहनत सफल होती महसूस हो रही है।

बीमारी और चुनौतियों से भरा सफर

विपुल का शैक्षणिक सफर केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने निजी जीवन में कई उतार-चढ़ाव भी देखे। उन्होंने साझा किया कि जब प्लेसमेंट की प्रक्रिया चल रही थी, उस दौरान एक बिल्ली के काटने के कारण उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस दुर्घटना के कारण उन्हें करीब 1 साल तक अस्वस्थ रहना पड़ा। हालांकि उन्होंने समय पर वैक्सीन ली, लेकिन बीमारी का लंबा दौर उनके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने बताया कि अपनी निरंतरता और पुरानी मेहनत के दम पर ही वे इस कठिन दौर से उबरने में सफल रहे।

युवाओं के लिए सफलता का मंत्र

नई पीढ़ी के छात्रों को सलाह देते हुए विपुल कहते हैं कि जीवन में संतुलन बनाना सबसे महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि केवल पढ़ाई में ही डूबे रहने के बजाय, छात्रों को अपने दोस्तों के साथ समय बिताना चाहिए, खेल-कूद में हिस्सा लेना चाहिए और बाहर घूमना चाहिए। विपुल के अनुसार, जब आप अपनी पढ़ाई के लिए बैठें, तो पूरी एकाग्रता के साथ 2 से 3 घंटे का समय दें। साल भर निरंतर पढ़ाई और मस्ती का संतुलन बनाए रखने से न केवल पढ़ाई में मन लगा रहता है, बल्कि जीवन का आनंद भी बना रहता है और छात्र कभी बोरियत महसूस नहीं करते।

भविष्य की राह और लक्ष्य

अपनी उपलब्धि के बारे में बात करते हुए विपुल ने स्पष्ट किया कि यद्यपि उन्हें कैंपस प्लेसमेंट मिल गया था, लेकिन उनका मन उस नौकरी में नहीं लगा, इसलिए उन्होंने उसे छोड़ दिया। अब उनका अगला लक्ष्य सिविल सर्विसेज की परीक्षा में शामिल होना है। उन्होंने कहा कि उनका सपना एक सरकारी नौकरी करना है, जिसके लिए वे पूरी तरह से तैयारी में जुट गए हैं। बीआईटी मेसरा के इस मेधावी छात्र का संकल्प उनके भविष्य के लिए एक नई उम्मीद की किरण जगा रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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