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10 घंटे पहले
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विचारों
बिहार में उच्च शिक्षा का बड़ा विस्तार
बिहार के शिक्षा जगत में उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है, जो लंबे समय से असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे हैं। राज्य के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में खाली पड़े पदों की संख्या को देखते हुए प्रशासन जल्द ही 10 हजार पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इस बार की भर्ती प्रक्रिया न केवल पदों की संख्या के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसमें होने वाले बदलावों को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है। नए डिग्री कॉलेजों के खुलने और पुराने खाली पदों को भरने की कवायद के साथ ही सरकार भर्ती के तौर तरीकों में भी बड़े सुधार करने पर विचार कर रही है।
कमेटी तय करेगी भर्ती का नया प्रारूप
इस आगामी बहाली की बारीकी पर नजर रखने वाले पटना विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर और मेंटर डॉ. अखिलेश कुमार ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं, जैसे उम्र सीमा, परीक्षा के पैटर्न और एपीआई स्कोर की गणना को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से काफी समय से मांगें उठाई जा रही थीं। इन मांगों को संज्ञान में लेते हुए सरकार ने एक विशेष कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र के बड़े विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। यह कमेटी अपनी पूरी कार्ययोजना और रिपोर्ट तैयार करने के लिए 90 दिन का समय ले रही है। नवंबर के बाद जब यह समय सीमा समाप्त हो जाएगी, तब सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर भर्ती का नया नियम और आधिकारिक ड्राफ्ट तैयार करेगी। माना जा रहा है कि एक बार नियमावली स्पष्ट हो जाने के बाद, भर्ती की राह पूरी तरह से आसान हो जाएगी।
बीईटी परीक्षा से मिलेगी बड़ी राहत
इस भर्ती प्रक्रिया की सबसे खास बात बिहार पात्रता परीक्षा यानी BET के आयोजन की संभावना को लेकर है। पहले यह माना जा रहा था कि इस परीक्षा का आयोजन शायद न हो, लेकिन अब इसके आयोजित होने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। यदि राज्य स्तर पर इस परीक्षा को आयोजित किया जाता है, तो उन लाखों छात्रों को बड़ा फायदा होगा जिनके पास फिलहाल NET या PhD की डिग्री नहीं है। यदि कोई अभ्यर्थी बीईटी परीक्षा क्वालीफाई कर लेता है, तो उसे असिस्टेंट प्रोफेसर के स्थायी पदों पर आवेदन करने का मौका मिलने की प्रबल संभावना है। हालांकि, अंतिम निर्णय पूरी तरह से नई नियमावली पर ही निर्भर करेगा, लेकिन यह उन मेधावी छात्रों के लिए एक संजीवनी की तरह हो सकता है जो किसी कारणवश राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा पास नहीं कर पाए थे।
एपीआई स्कोर पर अभी भी विवाद
भर्ती की प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में कुछ चिंताएं भी बरकरार हैं, विशेषकर API यानी एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडिकेटर को लेकर। बड़ी संख्या में छात्र इस बात का विरोध कर रहे हैं कि भर्ती में एपीआई को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इसको लेकर समय समय पर प्रदर्शन और असंतोष की आवाजें भी सुनने को मिलती रही हैं। अभ्यर्थी इस व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि कमेटी की रिपोर्ट में एपीआई को लेकर क्या प्रावधान किए जाते हैं और सरकार इसे लेकर क्या अंतिम निर्णय लेती है। जो भी व्यवस्था होगी, वह गठित कमेटी की सिफारिशों पर ही आधारित होगी।
अभ्यर्थियों को दी गई समय पर तैयारी की सलाह
डॉ. अखिलेश कुमार ने छात्रों को सुझाव दिया है कि वे केवल विज्ञापन निकलने का इंतजार न करें, बल्कि अभी से ही अपनी तैयारी में जुट जाएं। उनका मानना है कि भर्ती की आधिकारिक घोषणा होने के बाद का समय रिवीजन के लिए होना चाहिए, न कि नया कोर्स शुरू करने के लिए। अभ्यर्थियों को अपने विषय के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम और UGC-NET के सिलेबस को मुख्य आधार मानकर पढ़ाई शुरू करनी चाहिए। इसके साथ ही, रेफरेंस बुक्स और मानक किताबों का सहारा लेना भी बेहद फायदेमंद साबित होगा। यदि अभ्यर्थी किसी अनुभवी प्रोफेसर या विषय विशेषज्ञ से रणनीति बनाने में मदद लेते हैं, तो सफलता की संभावना और अधिक बढ़ जाती है। अंत में, यह याद रखना जरूरी है कि परीक्षा, परिणाम और इंटरव्यू की लंबी प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं। इसलिए, अभी का समय आपके लिए एक सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है। आज से ही अपनी तैयारी की मजबूती को परखें ताकि जब वैकेंसी आए, तब आप पूरी तरह से तैयार रहें।
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