दिल्ली
3 घंटे पहले
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ED की बड़ी कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेशों में अवैध रूप से पैसा भेजने और मंगाने के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में शुरुआती जांच के दौरान 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के FEMA नियमों के उल्लंघन का पता चला है।
छापेमारी और कंपनियां
ED के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने 17 जून 2026 को बेंगलुरु में छह अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। इस जांच के दायरे में आने वाली प्रमुख कंपनियां इस प्रकार हैं:
- Transak Technology India Private Limited
- CarretX Technologies Private Limited
- Mokshagna Technologies Private Limited
- Buyhatke Internet Private Limited
- Abhibha Technologies Private Limited
नियमों को ताक पर रखकर कारोबार
जांच एजेंसी का आरोप है कि ये कंपनियां RBI की किसी भी तरह की मंजूरी के बिना इंटरनेशनल मनी ट्रांसफर की सुविधा दे रही थीं। ये कंपनियां इंटरनेट पर विदेशी पैसे के लेनदेन के लिए एक आसान विकल्प के तौर पर प्रचार कर रही थीं। ED के मुताबिक, ग्राहक चंद क्लिक में पैसा भेज और प्राप्त तो कर सकते थे, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया नियामक निगरानी के बाहर थी।
पैसा ट्रांसफर करने का तरीका
जांच में खुलासा हुआ है कि पूरा नेटवर्क कुछ इस तरह काम कर रहा था:
- ग्राहक सबसे पहले प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन करके अपने बैंक खाते से पैसा जमा करता था।
- उस रकम से USDT जैसे स्टेबलकॉइन खरीदे जाते थे।
- इन क्रिप्टो एसेट्स को विभिन्न एक्सचेंजों और OTC डील्स के माध्यम से बेचकर पैसा विदेशों में लाभार्थियों तक पहुंचाया जाता था।
अमेरिका से जुड़ा नेटवर्क
ED के अनुसार, Mokshagna Technologies अमेरिका में ग्राहकों से धन जुटाकर उसे क्रिप्टो में बदलती थी और बाद में बड़े पैमाने पर OTC ट्रेडिंग के जरिए उसे नकदी में बदलकर भारत भेजती थी। एजेंसी का दावा है कि इसका मुख्य संचालक अमेरिका से बैठकर भारत में अपने परिवार के सदस्यों की मदद से पूरा नेटवर्क चला रहा था। छापेमारी के दौरान 6 करोड़ रुपये की जमा राशि वाले बैंक खातों पर रोक लगा दी गई है।
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