भारत से लेकर अफगानिस्तान तक हिली धरती, एक ही दिन में कई झटकों से मचा हड़कंप राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
शनिवार को एशिया के कई हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसमें हिमाचल प्रदेश, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं। हालांकि अलग-अलग तीव्रता के इन झटकों से अब तक किसी बड़े जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है।

आज के दिन कई देशों में भूकंप का सिलसिला

आज यानी शनिवार का दिन भूकंपीय हलचलों के नाम रहा है। भारत के पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश से लेकर म्यांमार और अफगानिस्तान तक धरती के कांपने की घटनाएं सामने आई हैं। इन इलाकों में एक ही दिन के भीतर कई बार कंपन महसूस किए जाने से आम जनमानस में डर का माहौल व्याप्त है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इन भूकंपों की तीव्रता बहुत अधिक नहीं रही, जिसके चलते अभी तक किसी बड़े नुकसान या त्रासदी की कोई खबर नहीं मिली है।

हिमाचल प्रदेश के चंबा में दो बार महसूस हुए झटके

भारत के हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में आज धरती ने दो बार करवट ली। चंबा में पहला झटका आधी रात को महसूस किया गया। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 2.8 मापी गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह भूकंप जमीन के 15 किलोमीटर नीचे आया था। इसके कुछ घंटों बाद सुबह के समय चंबा में एक बार फिर कंपन हुआ। सुबह करीब 6 बजकर 20 मिनट पर आए इस दूसरे भूकंप की तीव्रता 2.5 दर्ज की गई। बार-बार धरती के हिलने से स्थानीय लोग काफी घबराए हुए हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से फिलहाल किसी तरह की क्षति की पुष्टि नहीं की गई है।

म्यांमार में दो बार भूकंप की गूंज

भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही रही। यहां भी आज दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। म्यांमार में पहला भूकंप आधी रात को 12 बजकर 53 मिनट पर दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता 3.3 थी। इसके बाद सुबह 9 बजकर 4 मिनट पर म्यांमार एक बार फिर कांप उठा। इस दूसरे भूकंप की तीव्रता 3.7 मापी गई। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र धरती की सतह से 134 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। लगातार झटकों के कारण म्यांमार के निवासियों में दहशत देखी गई, मगर किसी बड़े नुकसान का अंदेशा फिलहाल नहीं है।

अफगानिस्तान में सबसे तेज रहे झटके

अफगानिस्तान में आज दर्ज किए गए झटके म्यांमार और भारत के मुकाबले अधिक शक्तिशाली रहे। अफगानिस्तान में सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर 4.2 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 157 किलोमीटर थी। इसके ठीक बाद सुबह 4 बजकर 43 मिनट पर 4.3 तीव्रता का एक और भूकंप दर्ज किया गया। अफगानिस्तान पहले से ही दुनिया के उन देशों में गिना जाता है जो भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। यहां का बड़ा भौगोलिक हिस्सा सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों के नजदीक आता है, जिसके कारण यहां अक्सर तेज भूकंप आते रहते हैं और पहले भी यह देश बड़ी आपदाओं का सामना कर चुका है।

भूकंप क्यों आते हैं और इसके पीछे का विज्ञान क्या है?

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो भूकंप आने के पीछे मुख्य कारण पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल होती है। पृथ्वी की बाहरी परत कई छोटी और बड़ी प्लेटों से मिलकर बनी है। ये प्लेटें हमेशा स्थिर नहीं रहतीं, बल्कि धीरे-धीरे एक-दूसरे के करीब आती हैं, दूर जाती हैं या एक-दूसरे के नीचे धंसने लगती हैं।

  • जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं या रगड़ खाती हैं, तो उनके किनारों पर भारी तनाव पैदा हो जाता है।
  • लंबे समय तक खिंचाव के बाद जब चट्टानें इस तनाव को सह नहीं पातीं, तो अचानक ऊर्जा का उत्सर्जन होता है।
  • यही ऊर्जा तरंगों के रूप में बाहर निकलती है, जिसे हम सतह पर कंपन या भूकंप के रूप में महसूस करते हैं।

हर भूकंप का प्रभाव अलग होता है। भूकंप कितना विनाशकारी होगा, यह उसकी तीव्रता, केंद्र की गहराई, भूकंप के केंद्र से दूरी और वहां की भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करता है। आज के इन भूकंपों में तीव्रता का स्तर कम होने के कारण कोई बड़ा संकट फिलहाल टला हुआ नजर आ रहा है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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