इंडोनेशिया में फिर डोली धरती, 5.9 तीव्रता के भूकंप से सहमे लोग विश्व एक घंटा पहले 4
इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है। इससे पहले आए भीषण भूकंप में अब तक 73 लोगों की जान जा चुकी है।

फ्लोरेस में फिर आया भूकंप का झटका

इंडोनेशिया में कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। यूरोपीय भूमध्यसागरीय भूकंपीय केंद्र यानी EMSC के अनुसार, गुरुवार को इंडोनेशिया के फ्लोरेस इलाके में भूकंप की एक और लहर महसूस की गई है। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 5.9 मापी गई है। राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों ने बताया कि इस भूकंप का केंद्र धरती की सतह से महज 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था, जिससे झटकों की तीव्रता अधिक महसूस की गई। हाल ही में इस क्षेत्र ने 7.7 की तीव्रता वाले एक बेहद विनाशकारी भूकंप का सामना किया है, जिसने पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई है। 15 अगस्त को आए उस बड़े भूकंप का केंद्र पूर्वी नुसा तेंगारा के एंडे से करीब 68 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में था, जिसके कारण व्यापक पैमाने पर भूस्खलन और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा था।

73 लोगों की मौत और भारी तबाही

फ्लोरेस द्वीप पर आए उस बड़े भूकंप के बाद स्थिति अब भी बेहद गंभीर बनी हुई है। बचाव अधिकारी फथुर रहमान ने मीडिया को दी जानकारी में पुष्टि की है कि आपदा में अब तक कम से कम 73 लोगों की मौत हो चुकी है। यह द्वीप पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है और वहां के चार अलग-अलग कस्बों में यह जानलेवा असर देखने को मिला है। राहत कार्यों के दौरान फथुर रहमान ने बताया कि 6 लोग गंभीर रूप से घायल हैं और 2 लोग अभी भी मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है, जिन्हें निकालने की कोशिशें जारी हैं। भूकंप की वजह से कई स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी दफ्तरों को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही, समुद्र में 1.61 मीटर तक ऊंची सुनामी की लहरें भी देखी गई थीं, हालांकि बाद में चेतावनी वापस ले ली गई थी।

राहत कार्य में आ रही हैं मुश्किलें

इंडोनेशियाई अधिकारियों के आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में 73 लोगों की जान जाने के अलावा 900 से अधिक लोग घायल हुए हैं और लगभग 60,000 लोग अपना घर खो चुके हैं। राहत कर्मियों के लिए चुनौती इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि मुख्य भूकंप के बाद से अब तक 3,000 से ज्यादा बार झटके यानी आफ्टरशॉक्स महसूस किए जा चुके हैं। कई स्थानों पर सड़कों के क्षतिग्रस्त होने और भूस्खलन के कारण राहत दल का पहुंचना कठिन हो गया है, जिससे लोग अब भी मलबे में अपनों की तलाश करने को मजबूर हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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