प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उपहारों की ई-नीलामी से मिली बड़ी रकम, सामने आए ताजा आंकड़े भारत 2 घंटे पहले 3
केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले स्मृति चिह्नों की ई-नीलामी से अब तक कितनी कमाई हुई है।

लोकसभा में साझा किए गए उपहारों की नीलामी के आंकड़े

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके आधिकारिक दौरों और कार्यक्रमों के दौरान जो उपहार और स्मृति चिह्न मिलते हैं, उनकी ई-नीलामी की प्रक्रिया चर्चा में रहती है। हाल ही में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। लोकसभा में एक लिखित जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में हुई ई-नीलामी से सरकार के खाते में 1.89 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है। यह नीलामी प्रधानमंत्री को देश और विदेश के विभिन्न कार्यक्रमों में मिले उपहारों के प्रति पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आयोजित की जाती है।

सदन में पूछे गए सवालों का दिया जवाब

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोमवार को लोकसभा के पटल पर इन आंकड़ों को रखा। सदन में उनसे पिछले 5 वर्षों के दौरान हुई ई-नीलामी से प्राप्त कुल धनराशि और उन तारीखों के बारे में विस्तार से जानकारी मांगी गई थी, जब ये नीलामियां संचालित की गई थीं। मंत्री ने अपने आधिकारिक उत्तर में इन सभी बिंदुओं पर प्रकाश डाला है।

हालिया वर्षों के कमाई के आंकड़े

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2025 में आयोजित ई-नीलामी का यह सातवां संस्करण था। इसके पूर्व वर्ष 2024 में आयोजित नीलामी के छठे संस्करण में सरकार को कुल 2.24 करोड़ रुपये की आय हुई थी। उस दौरान 600 से अधिक उपहारों और स्मृति चिह्नों को ई-नीलामी के लिए रखा गया था।

वर्ष 2019 से शुरू हुई नीलामी की प्रक्रिया

प्रधानमंत्री को मिले उपहारों की ई-नीलामी की यह व्यवस्थित श्रृंखला वर्ष 2019 में शुरू की गई थी। इस पहल को लेकर केंद्रीय मंत्री का मानना है कि ये संग्रह न केवल व्यक्तिगत उपहार हैं, बल्कि ये भारत की समृद्ध संस्कृति, आध्यात्मिकता, राजनीति और गौरवशाली इतिहास को दर्शाते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो शुरुआती 5 चरणों में ही सरकार ने इन नीलामियों के माध्यम से 50 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जुटाई थी।

क्या 2014 से पहले नीलामी की व्यवस्था थी?

सदन में एक प्रश्न के दौरान यह भी जानने का प्रयास किया गया कि क्या वर्ष 2014 से पहले भी इस तरह की नीलामी की कोई परंपरा थी। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि वर्ष 2019 से पहले राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय द्वारा उपहारों या स्मृति चिह्नों की नीलामी का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। यानी, यह ई-नीलामी प्रणाली वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ही शुरू की गई और इसे आगे बढ़ाया गया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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