डोनाल्ड ट्रंप की खुली धमकियां: फीफा से लेकर नाटो और ब्रिक्स तक, जानिए दुनिया को डराने का पूरा खेल विश्व एक महीने पहले 80
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्यशैली कूटनीतिक मर्यादाओं को दरकिनार कर धमकियों पर टिकी है। फीफा वर्ल्ड कप से लेकर अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों और व्यापारिक समझौतों तक, ट्रंप की मनमानी ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है।

फीफा वर्ल्ड कप में ट्रंप का सीधा दखल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी हनक और मनमानी के लिए पूरी दुनिया में चर्चित हैं। हाल ही में उन्होंने खेल जगत में अपनी धमक दिखाते हुए फीफा वर्ल्ड कप के एक बड़े फैसले को बदलवा दिया। विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका के स्टार खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन को बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ खेले गए राउंड ऑफ-32 मैच में रेड कार्ड दिखा दिया गया। नियम के अनुसार, रेड कार्ड मिलने पर खिलाड़ी को अगले मैच से बाहर बैठना पड़ता है। लेकिन, ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद फीफा की अनुशासन समिति ने नियमों को दरकिनार कर रेड कार्ड वापस ले लिया। इसका परिणाम यह हुआ कि बालोगुन अब बेल्जियम के खिलाफ महत्वपूर्ण मैच में खेल सकेंगे। खबरें हैं कि ट्रंप ने खुद फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से बात की, जिसके बाद यह पूरा घटनाक्रम बदल गया। यूरोप की फुटबॉल संस्था यूईएफए ने इस हस्तक्षेप की तीखी आलोचना की है।

ईरान पर तल्ख तेवर और विनाश की चेतावनी

ईरान के साथ जारी तनाव के बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। अयातुल्लाह खामेनेई के जनाजे में उमड़ी भीड़ को देखकर ट्रंप ने न केवल हैरानी जताई, बल्कि उन पर 'नकली आंसू' बहाने का आरोप भी मढ़ा। उन्होंने कहा कि वे चाहें तो एक झटके में सबको खत्म कर सकते हैं, लेकिन वार्ता के लिए किसी का बचना भी जरूरी है। इतना ही नहीं, ट्रंप ने ईरान के पूरे बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की धमकी देते हुए कहा, 'आज रात एक सभ्यता की मौत होने जा रही है।' उन्होंने ईरान को सीजफायर के लिए सख्त समय सीमा भी दी थी, साथ ही यह भी कहा कि अगर ईरान ने बात नहीं मानी तो उसका विनाश निश्चित है।

नाटो को खुली चुनौती

ट्रंप ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानी नाटो के सहयोगी देशों को भी निशाने पर लिया है। उन्होंने ईरान संकट के दौरान स्पष्ट किया कि जरूरत के समय नाटो अमेरिका के किसी काम नहीं आया और भविष्य में भी स्थिति ऐसी ही रहेगी। इसके साथ ही, उन्होंने 'ग्रीनलैंड याद रखो' कहकर यूरोप को एक रहस्यमयी चेतावनी दी। ट्रंप ने बार-बार यह दोहराया है कि अगर नाटो सदस्य देश अपनी जीडीपी का कम से कम 2 प्रतिशत हिस्सा रक्षा पर खर्च नहीं करेंगे, तो अमेरिका उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं लेगा। उन्होंने यहां तक कह दिया कि वे रूस को इन देशों के साथ जो चाहे करने की खुली छूट दे सकते हैं।

क्यूबा पर दबाव और व्यापारिक प्रतिबंध

ट्रंप ने क्यूबा को भी चेतावनी देते हुए कहा है कि अब उन्हें वेनेजुएला से कोई तेल या वित्तीय मदद नहीं मिलने वाली है। उन्होंने ट्रूथ सोशल पर अपने पोस्ट के जरिए क्यूबा के नेताओं को साफ संदेश दिया कि अगर वे देर होने से पहले समझौता कर लेते हैं, तो यह उनके लिए बेहतर होगा। ट्रंप का मानना है कि क्यूबा की अर्थव्यवस्था पूरी तरह दूसरों पर निर्भर है, जिसे उन्होंने अब पूरी तरह बंद करने की ठान ली है।

ब्रिक्स और भारत के लिए टैरिफ बम

दूसरी बार कार्यभार संभालते ही ट्रंप ने व्यापार के मोर्चे पर बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने ब्रिक्स देशों को चेतावनी दी है कि यदि वे अमेरिका विरोधी नीतियां अपनाते हैं, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप ने भारत और चीन समेत 11 देशों पर भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। उन्होंने भारत के बारे में कहा कि यह देश दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाला देश है और वहां व्यापार करना बहुत चुनौतीपूर्ण है। इसके अलावा, कनाडा और मेक्सिको को भी उन्होंने टैरिफ के दायरे में लिया है।

पुराने विवाद और किम जोंग उन

अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2017 में ट्रंप और उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन के बीच हुई तल्खी किसी से छिपी नहीं है। ट्रंप ने उत्तर कोरिया को 'फायर एंड फ्यूरी' यानी आग और गुस्से से तबाह करने की चेतावनी दी थी। उन्होंने दुनिया के सामने किम जोंग उन को 'लिटिल रॉकेट मैन' कहकर संबोधित किया था, जो उस समय काफी चर्चा में रहा था।

घरेलू मोर्चे पर अदालत से झटका

ट्रंप ने अमेरिका के अंदर भी कई मनमाने फैसले लिए, लेकिन उन्हें अदालत से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। एच-1बी वीजा आवेदनों पर एक लाख डॉलर यानी लगभग 85 लाख रुपये का शुल्क लगाने के फैसले को फेडरल कोर्ट ने 'अवैध टैक्स' और असंवैधानिक करार दिया। इसके अलावा, जन्मजात नागरिकता यानी बर्थ राइट सिटिजनशिप खत्म करने के उनके कार्यकारी आदेश को भी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी धरती पर पैदा होने वाला हर व्यक्ति नागरिक है।

तीसरी दुनिया के देशों के लिए सख्त नियम

नवंबर 2025 में व्हाइट हाउस के पास नेशनल गार्ड के दो सैनिकों पर हुए जानलेवा एक अफगान नागरिक द्वारा किए गए हमले के बाद ट्रंप का रुख और सख्त हो गया है। उन्होंने घोषणा की कि वे तीसरी दुनिया के देशों से आने वाले लोगों के लिए अमेरिका के दरवाजे बंद कर देंगे। यह घटना उनके कड़े आव्रजन (इमिग्रेशन) फैसलों का आधार बन गई है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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