NATO समिट से पहले डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा हमला, बोले- ईरान संकट के बहाने ले रहा था यूरोपीय देशों का 'लॉयल्टी टेस्ट', कई नेता हुए फेल विश्व एक महीने पहले 68
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगियों की वफादारी पर गंभीर सवाल उठाते हुए खुलासा किया है कि ईरान संकट के दौरान उन्होंने सदस्य देशों की एकजुटता की परीक्षा ली थी, जिसमें कई देश नाकाम रहे।

ईरान संकट के बहाने ट्रंप ने परखी NATO सहयोगियों की वफादारी, खुलेआम जाहिर की नाराजगी

ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानी NATO के सदस्य देशों के खिलाफ बेहद तीखे तेवर अपनाए हैं। ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर इस बात का खुलासा किया है कि ईरान संकट के दौरान उन्होंने जानबूझकर सहयोगी देशों की एकजुटता और उनके भरोसे की परीक्षा ली थी। तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित NATO नेताओं के शिखर सम्मेलन से ठीक पहले ट्रंप और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक से पहले संवाददाताओं से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि सैन्य सहयोग के मुद्दे पर सदस्य देशों के ढुलमुल रवैये ने उनके पुराने संदेह को सच साबित कर दिया है और अब यूरोपीय देशों को लेकर उनका अविश्वास और गहरा हो गया है।

पुरानी शंका अब खुली नाराजगी में बदली

दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप काफी समय से इस बात पर सवाल खड़े करते रहे हैं कि क्या अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगी देश सचमुच इस लायक हैं कि उन्हें सुरक्षा की वह गारंटी दी जाए, जिसके भरोसे वे दूसरे विश्व युद्ध के बाद से निर्भर रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि इन देशों में न तो उतनी क्षमता है और न ही वे अमेरिका के प्रति वफादार हैं। हाल ही में जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की योजना बनाई, तब कुछ प्रमुख NATO सहयोगियों ने अमेरिकी हमलों के लिए अपने सैन्य हवाई ठिकाने (एयरबेस) देने से साफ मना कर दिया। इतना ही नहीं, जब समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की सुरक्षा के लिए सैन्य संसाधन और युद्धपोत भेजने की बात आई, तो कई यूरोपीय देश पीछे हट गए। सहयोगियों के इसी कदम ने ट्रंप के भीतर सुलग रहे शक को एक खुली नाराजगी में बदल दिया।

'मैं तो बस सभी का टेस्ट ले रहा था' - ट्रंप का बड़ा बयान

अपने कड़े रुख को दोहराते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने संवाददाताओं से कहा, "मैं NATO के इस रवैये से बेहद निराश और दुखी हुआ हूं। सच कहूं तो हमें उनकी किसी भी तरह की सैन्य मदद की जरूरत नहीं थी। मैं तो बस एक तरह से सभी सदस्य देशों का टेस्ट ले रहा था। मैं देखना चाहता था कि जब सचमुच मुसीबत का वक्त आएगा और हमें जरूरत होगी, तो क्या ये NATO देश हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे या नहीं? मैं लंबे समय से यह बात कहता आ रहा हूं कि अमेरिका हमेशा इन देशों की मदद करता है, लेकिन मुझे पूरा भरोसा नहीं है कि मुसीबत पड़ने पर वे हमारे लिए आगे आएंगे।"

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ मतभेद उजागर

इस बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ उपजे मतभेदों और आपसी कड़वाहट को भी खुलकर स्वीकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हॉर्मुज और ईरान को लेकर बनाई गई अमेरिकी रणनीति का समर्थन न करने की वजह से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर बुरा असर पड़ा है।

मेलोनी ने हॉर्मुज और ईरान के मुद्दे पर हमारा सपोर्ट नहीं किया। इससे हमारे रिश्तों में थोड़ी कड़वाहट आई है। हालांकि वह अच्छी इंसान हैं, लेकिन मुझे लगता है कि उन्होंने गलती की। - डोनाल्ड ट्रंप

अंकारा समिट में NATO की साख दांव पर

ऐसे समय में जब NATO देशों के राष्ट्राध्यक्ष और बड़े नेता तुर्की की राजधानी अंकारा में एक मंच पर इकट्ठा हुए हैं, ट्रंप के इन बयानों ने बैठक की सरगर्मियां बढ़ा दी हैं। इस शिखर सम्मेलन में मध्य-पूर्व के संघर्ष से उत्पन्न होने वाले वैश्विक भू-राजनीतिक प्रभावों पर तो चर्चा होगी ही, साथ ही NATO की अपनी साख, विश्वसनीयता और भविष्य की एकजुटता पर भी गंभीर मंथन होने की उम्मीद है। सम्मेलन के एजेंडे में सबसे बड़ा मुद्दा यही रहने वाला है कि क्या सदस्य देश अपनी रक्षा जिम्मेदारियों और वित्तीय खर्चों को ईमानदारी से साझा करने के लिए तैयार हैं या फिर अमेरिका को ही अकेले सारा बोझ उठाना पड़ेगा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप