अमेरिकी चुनावी सिस्टम को हैक कर सकते हैं 4 देश, डोनाल्ड ट्रंप ने खुफिया दस्तावेजों से किया सनसनीखेज खुलासा विश्व एक महीने पहले 60
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सरकारी खुफिया दस्तावेजों के आधार पर बड़ा दावा किया है कि रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया समेत कई समूह अमेरिकी चुनावी ढांचे को प्रभावित करने में सक्षम हैं।

खुफिया दस्तावेजों से हुआ बड़ा खुलासा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने सार्वजनिक किए गए नए खुफिया दस्तावेजों के हवाले से कहा कि रूस, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया और कुछ गैर-सरकारी संगठन अमेरिका की चुनावी व्यवस्था में साइबर सेंधमारी करने की क्षमता रखते हैं। 'इलेक्शन इंटीग्रिटी' यानी चुनावी अखंडता के विषय पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने बताया कि उनकी सरकार द्वारा जारी किए गए खुफिया दस्तावेजों के तीसरे सेट से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिकी प्रशासन को पिछले कई वर्षों से देश के चुनावी बुनियादी ढांचे में मौजूद खामियों की पूरी जानकारी थी।

चीन की दखलंदाजी और चुनावी धांधली का आरोप

ट्रंप ने अपने संबोधन में तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि चीन के हस्तक्षेप को अब तक छिपाकर रखा गया था, लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत है। उन्होंने कहा कि आज जो दस्तावेज सामने रखे गए हैं, वे इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि लंबे अरसे तक अमेरिकी नागरिकों से चुनावी सुरक्षा से जुड़े तथ्यों को छुपाया गया। राष्ट्रपति ने विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और मतगणना प्रणालियों की सुरक्षा पर सवाल उठाए और कहा कि इनमें गंभीर कमजोरियां हैं, जिनका फायदा उठाया जा सकता है। इसके साथ ही, उन्होंने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में चीन की दखलअंदाजी को छिपाने वाले अधिकारियों के खिलाफ जांच के निर्देश भी दिए हैं। ट्रंप ने 'यूएस इंटेलिजेंस कम्युनिटी' की एक रिपोर्ट को उद्धृत करते हुए कहा, 'हमारा आकलन है कि अमेरिका के विरोधी देशों में कम से कम रूस, चीन, ईरान और नॉर्थ कोरिया, साथ ही कुछ गैर-सरकारी समूहों के पास अमेरिकी चुनावी ढांचे से छेड़छाड़ करने की क्षमता मौजूद है।'

जनवरी 2020 से जून 2026 तक की रिपोर्ट

राष्ट्रपति ट्रंप ने खुफिया रिपोर्ट के विस्तृत अंश साझा करते हुए चेतावनी दी कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े केंद्रीकृत डेटा भंडार, जैसे मतदाता पंजीकरण डेटाबेस, पोलबुक और आधिकारिक चुनावी वेबसाइटें सबसे ज्यादा खतरे की जद में हैं। उन्होंने साफ किया कि यदि विरोधी इन डिजिटल प्रणालियों तक पहुंच बनाने में सफल हो जाते हैं, तो वे पूरी चुनावी प्रक्रिया को बाधित कर सकते हैं। ट्रंप ने इसे अमेरिकी लोकतंत्र के केंद्र पर हुआ एक बड़ा साइबर हमला करार दिया। यह भी बताया गया कि उनकी सरकार ने जनवरी 2020 से जून 2026 तक की अवधि को कवर करने वाली खुफिया रिपोर्टों को सार्वजनिक किया है।

वेनेजुएला पर डिजिटल हेरफेर की साजिश का आरोप

ट्रंप ने दस्तावेजों के आधार पर वेनेजुएला की सरकार पर भी गंभीर आरोप मढ़े हैं। उन्होंने बताया कि सीआईए की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि वेनेजुएला की सरकार ने वर्ष 2020 के अमेरिकी चुनावों में डिजिटल तरीके से नतीजों में हेरफेर करने की गहरी साजिश रची थी। ट्रंप ने कहा, 'आज हम जो दस्तावेज जारी कर रहे हैं, उनसे पता चलता है कि सीआईए को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के शासन की एक विशेष साजिश की जानकारी मिली थी।' खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, साजिश में ऐसे डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल किया जाना था जिनसे वोटों की गिनती को इस चालाकी से बदला जा सके कि ऑडिट के दौरान भी पकड़ में न आए।

भविष्य के लिए चेतावनी और सुधार की जरूरत

अपनी बात को समाप्त करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि अमेरिका अपनी चुनावी प्रणाली को अभेद्य बनाने के लिए तत्काल कदम उठाए, ताकि भविष्य में कोई भी बाहरी ताकत या समूह इसे प्रभावित न कर सके। व्हाइट हाउस ने एक बयान में स्पष्ट किया कि इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का मुख्य उद्देश्य जनता को यह दिखाना है कि प्रशासन को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों, मतगणना प्रणालियों और डेटाबेस की कमजोरियों के बारे में लंबे समय से पता था। ये सभी सार्वजनिक किए गए दस्तावेज जनवरी 2020 से लेकर जून 2026 तक के कालखंड का विश्लेषण करते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि चुनावी सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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