जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस में बढ़ी सियासी हलचल, असंतुष्ट विधायक फारूक अब्दुल्ला से करेंगे मुलाकात जम्मू-कश्मीर 2 घंटे पहले 4
जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस में कैबिनेट विस्तार के बाद बगावत के सुर तेज हो गए हैं। कई नाराज विधायक अपनी बात रखने के लिए पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला से मिलने की तैयारी कर रहे हैं।

पार्टी के भीतर मची है खींचतान

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इस समय नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर चल रही उठापटक चर्चा का विषय बनी हुई है। पार्टी के कई विधायक मौजूदा कामकाज और निर्णयों से खासे नाराज चल रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कैबिनेट में हाल ही में हुए बदलावों के बाद पैदा हुए असंतोष को शांत करने के लिए पार्टी के बागी विधायक अब पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला से मिलने वाले हैं। यह महत्वपूर्ण बैठक आगामी शुक्रवार, यानी 6 नवंबर को होने की प्रबल संभावना है। इस बैठक में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के भी मौजूद रहने की उम्मीद जताई जा रही है।

कैबिनेट विस्तार ने बढ़ाया तनाव

पार्टी में यह असंतोष अचानक पैदा नहीं हुआ है। इसकी जड़ें 27 अक्टूबर को हुए कैबिनेट विस्तार में देखी जा सकती हैं। इस विस्तार के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के बीच नाराजगी का माहौल है, जिनमें 6 बार के विधायक मुबारक गुल का नाम प्रमुखता से शामिल है। इस विस्तार के जरिए सरकार ने 4 नए मंत्रियों को कैबिनेट में जगह दी है, जिसके बाद मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की कुल संख्या 9 तक पहुंच गई है। यह संख्या वैधानिक रूप से स्वीकार्य अधिकतम सीमा है। नए चेहरों को शामिल किए जाने के बाद से ही वरिष्ठ विधायक और कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

विरोध प्रदर्शनों का दौर

पार्टी सूत्रों का कहना है कि असंतुष्ट विधायकों ने पहले ही नेतृत्व के सामने प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर अपनी चिंताएं जाहिर कर दी थीं। उन्होंने अपनी मांगों को मजबूती से रखने के लिए शीर्ष नेतृत्व से औपचारिक मुलाकात का समय भी मांगा था। कैबिनेट विस्तार के बाद हालात तब और बिगड़ गए जब ईदगाह के विधायक मुबारक गुल को मंत्री पद नहीं मिलने पर उनके समर्थकों ने खुलकर विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी के भीतर हुई एक गुप्त बैठक में भी विधायकों ने रणनीति पर चर्चा की, हालांकि उस बैठक के मुख्य बिंदुओं को सार्वजनिक नहीं किया गया। चर्चा तो यहां तक थी कि मुबारक गुल का खेमा बुधवार को मीडिया के सामने अपनी बात रखेगा, लेकिन बाद में शुक्रवार को फारूक अब्दुल्ला के साथ होने वाली बैठक की खबर के चलते इसे रद्द कर दिया गया।

नेतृत्व ने दावों को किया खारिज

दूसरी तरफ, सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इन सभी खबरों को सिरे से नकार दिया है। पार्टी का आधिकारिक रुख यही है कि पार्टी में किसी तरह का कोई आंतरिक विद्रोह नहीं है और न ही सरकार को कोई बाहरी राजनीतिक खतरा है। पार्टी के नेताओं ने इस प्रस्तावित मुलाकात को केवल एक सामान्य सामाजिक संवाद का हिस्सा बताया है। हजरतबल के विधायक सलमान सागर ने तो बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असंतोष की तमाम खबरों को बेबुनियाद करार दिया। उन्होंने कहा कि यह सब कुछ उन लोगों द्वारा फैलाई जा रही अफवाहें हैं जो अपने स्वार्थ के लिए पार्टी की छवि खराब करना चाहते हैं। अब सभी की निगाहें शुक्रवार की बैठक पर टिकी हैं कि क्या नेतृत्व बागियों को मना पाएगा या यह असंतोष और गहराएगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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