क्या मीनाक्षी नटराजन ने छिपाया आपराधिक मामला? राज्यसभा नामांकन रद्द होने का खतरा, BJP ने उठाए सवाल मध्य प्रदेश 7 घंटे पहले 7
कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन पर आरोप है कि उन्होंने राज्यसभा नामांकन फॉर्म में हैदराबाद की अदालत में लंबित आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी। अदालती दस्तावेजों की टाइमलाइन सामने आने के बाद उनके नामांकन पर खतरा मंडरा रहा है।

भोपाल: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की एकमात्र दावेदार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन एक बड़े कानूनी विवाद में उलझ गया है। आरोप है कि नटराजन ने अपने नामांकन फॉर्म में हैदराबाद की एक अदालत में चल रहे आपराधिक मामले की जानकारी कथित रूप से छिपा ली। अदालत से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर सामने आई घटनाओं की टाइमलाइन ने कांग्रेस खेमे में हलचल मचा दी है।

कब क्या हुआ: पूरे घटनाक्रम का ब्योरा

11 मई 2025 (अपराध की तारीख): शिकायतकर्ता ए. श्रीलता की शिकायत के आधार पर यह मामला सामने आया।

20 अगस्त 2025 (शिकायत दर्ज): ए. श्रीलता ने हैदराबाद की 'फोर्थ एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट' की अदालत में मीनाक्षी नटराजन (अभियुक्त नंबर 4) और अन्य के विरुद्ध मुख्य याचिका (Complaint No. of 2025) दाखिल की। इसमें नटराजन पर BNS Act की धारा 356, 61, 45, 46, 351(2), 3(5) और 79 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

17 सितम्बर 2025 (न्यायिक समन जारी): मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने मीनाक्षी नटराजन को 'नोटिस टू रेस्पोंडेंट' जारी किया। इस समन में उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने और अपना जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया गया था।

24 अक्टूबर 2025 (नटराजन का जवाब): मीनाक्षी नटराजन की ओर से उनके वकील ने अदालत में एक जवाबी हलफनामा (Counter) प्रस्तुत किया। इसमें उन्होंने स्वयं को निर्दोष बताते हुए पूरी शिकायत को "राजनीतिक विद्वेष" से प्रेरित करार दिया और इसे खारिज करने की मांग की।

17 नवम्बर 2025 (सुनवाई की तारीख): अदालत ने मामले को खारिज नहीं किया, बल्कि सुनवाई की प्रक्रिया आरंभ कर दी, जो अब तक जारी है।

नामांकन पर क्यों मंडरा रहा है संकट

मध्य प्रदेश में कांग्रेस इस एकमात्र सीट को किसी भी कीमत पर जीतना चाहती है, लेकिन निर्वाचन कानून के अनुसार हर उम्मीदवार को अपने खिलाफ लंबित प्रत्येक आपराधिक मामले की जानकारी नामांकन हलफनामे में देना अनिवार्य है। चूंकि यह मामला 2025 से चल रहा है और नटराजन इसमें 'अभियुक्त' के रूप में अदालत में अपना जवाब भी दाखिल कर चुकी हैं, इसलिए इसे 'अनजाने में हुई चूक' मानना मुश्किल है।

यदि निर्वाचन अधिकारी इस जानकारी को छिपाने के मामले में उन्हें दोषी पाते हैं, तो तकनीकी आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना तय माना जा रहा है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के पास मध्य प्रदेश में राज्यसभा की दौड़ से बाहर हो जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। फिलहाल पूरा मामला नामांकन पत्रों की जांच पर टिका हुआ है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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