बारह तालाबों की नगरी धार में मानसून की मायूसी, दस इंच कम बारिश से गहराया जल संकट मध्य प्रदेश 2 घंटे पहले 5
मध्य प्रदेश के धार जिले में इस बार मानसून की बेरुखी ने आम लोगों और किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सामान्य से कम बारिश के कारण भविष्य में जल संकट और सूखे के हालात बनने की आशंका जताई जा रही है।

मानसून की बेरुखी से डरे शहरवासी

मध्य प्रदेश का धार शहर, जिसे विशेष रूप से साढ़े बारह तालाबों की नगरी के तौर पर पहचाना जाता है, इस बार भीषण जल संकट की आहट से जूझ रहा है। मानसून के इस सीजन में हुई कम बारिश ने न केवल प्रशासन बल्कि आम नागरिकों की नींद उड़ा दी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक सामान्य से लगभग दस इंच कम बारिश दर्ज की गई है, जो क्षेत्र के जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है।

खाली पड़े हैं ऐतिहासिक तालाब

शहर के जल स्रोतों की स्थिति इस समय काफी दयनीय बनी हुई है। आलम यह है कि धार के अधिकांश तालाब अभी भी आधे से अधिक खाली पड़े हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार की बारिश के आंकड़े चिंताजनक हैं। पिछले साल जहां 35 इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई थी, वहीं इस बार अब तक पिछले साल की तुलना में लगभग आधी ही बारिश हुई है। जल स्तर में आई इस भारी गिरावट से स्थानीय लोगों को आने वाले दिनों में भीषण पेयजल किल्लत की आशंका सताने लगी है।

जिले के अलग-अलग क्षेत्रों का हाल

पूरे धार जिले की वर्षा रिपोर्ट पर गौर करें तो स्थिति असमान है। जिले के पीथमपुर क्षेत्र में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई है, जबकि निसरपुर में अब तक सबसे कम बारिश होने की जानकारी सामने आई है। यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं होती है, तो पूरे जिले में सूखे जैसे हालात पैदा हो सकते हैं, जिसका सीधा असर कृषि और जनजीवन पर पड़ेगा।

कृषि और पलायन का संकट

पर्याप्त बारिश न होने के कारण फसलों के प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही ग्रामीण अंचलों में रोजगार का संकट भी गहराने लगा है। मनरेगा का काम बंद होने और जीरामजी योजना के तहत नई परियोजनाओं का काम शुरू न होने की वजह से अब ग्रामीणों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। स्थानीय लोगों को डर है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो उन्हें रोजगार की तलाश में पलायन करने पर मजबूर होना पड़ेगा। स्थानीय नागरिक अब शासन-प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि धार को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित किया जाए और जल संकट से निपटने के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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