छत्तीसगढ़: उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शाहीन फॉल्कन का हैरतअंगेज शिकार कैमरे में कैद छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 2
छत्तीसगढ़ के धमतरी में दुनिया के सबसे तेज शिकारी पक्षी शाहीन फॉल्कन ने हवा में हॉर्नबिल का शिकार किया है, जो इकोसिस्टम की मजबूती का प्रमाण है।

आसमान के सबसे तेज शिकारी की दुर्लभ झलक

छत्तीसगढ़ का उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व इन दिनों वन्यजीवों की दुर्लभ और रोमांचित कर देने वाली गतिविधियों के कारण चर्चा का केंद्र बना हुआ है। धमतरी जिले में स्थित इस संरक्षित वन क्षेत्र से प्रकृति के एक ऐसे दृश्य को कैमरे में कैद किया गया है, जिसने पक्षी प्रेमियों और वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दुनिया के सबसे तेज रफ्तार शिकारी माने जाने वाले शाहीन फॉल्कन को यहां शिकार करते हुए देखा गया है। यह शिकारी पक्षी आसमान में उड़ रहे एक विशालकाय हॉर्नबिल को निशाना बनाकर उसे अपनी गिरफ्त में लेने में सफल रहा, जिसके बाद वह उसे एक पेड़ की डाल पर बैठकर खाता हुआ भी नजर आया।

शाहीन फॉल्कन की रफ्तार और हमला करने की तकनीक

वैज्ञानिक शोध और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के आंकड़ों के अनुसार, शाहीन फॉल्कन, जिसे पेरेग्रीन फॉल्कन की एक विशिष्ट उपप्रजाति के तौर पर जाना जाता है, धरती पर मौजूद सभी जीवित प्राणियों में सबसे तेज गति से चलने या उड़ने वाला जीव है। जब यह शिकारी आसमान की काफी ऊंचाई से अपने शिकार पर झपट्टा मारता है, तो इसकी गति 320 किलोमीटर प्रति घंटे से शुरू होकर 389 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। यह रफ्तार किसी भी आधुनिक सुपरफास्ट रेसिंग कार से कहीं अधिक है।

सीतानदी के घने जंगलों में, इस सुपरसोनिक शिकारी ने आसमान में विचरण कर रहे मालाबार पाइड हॉर्नबिल को महज एक पल में दबोच लिया। हॉर्नबिल एक बेहद मजबूत और बड़ी चोंच वाला पक्षी होता है, जिसका शिकार करना किसी भी सामान्य शिकारी के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य है। हालांकि, शाहीन फॉल्कन ने अपने बेहद नुकीले और शक्तिशाली पंजों का इस्तेमाल करते हुए एक ही सटीक प्रहार से हॉर्नबिल को हवा में ही ढेर कर दिया।

शिकार के बाद का दृश्य

हॉर्नबिल को मौत के घाट उतारने के बाद, यह शिकारी पक्षी उदंती-सीतानदी रिजर्व के एक ऊंचे पेड़ की सूखी टहनी पर जाकर बैठ गया। वहां मौजूद वन्यजीव फोटोग्राफर्स के कैमरों ने इस दुर्लभ पल को बखूबी कैद किया, जिसमें शाहीन फॉल्कन बेहद इत्मीनान से अपने शिकार के पंखों को हटाकर उसका मांस खाता हुआ दिखाई दिया। प्रकृति का यह क्रूर लेकिन स्वाभाविक दृश्य जंगल के जीवन चक्र को करीब से समझने का एक बड़ा अवसर है।

इकोसिस्टम की मजबूती का संकेत

यह घटना पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के नजरिए से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ वन विभाग इस रिजर्व में 'हॉर्नबिल सफारी' शुरू करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। पिछले 4 सालों के दौरान वन विभाग के अथक प्रयासों और स्थानीय आदिवासी समुदायों द्वारा किए गए कड़े संरक्षण कार्यों के चलते इस क्षेत्र में हॉर्नबिल की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यही कारण है कि यह स्थान अब बर्डवॉचर्स और नेचर टूरिज्म के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 1,842 वर्ग किलोमीटर में फैले इस विशाल जैव-विविधता वाले क्षेत्र में शाहीन फॉल्कन और हॉर्नबिल का एक साथ मौजूदगी के साथ-साथ उनके बीच खाद्य श्रृंखला का स्पष्ट दिखना यह साबित करता है कि यहां का पूरा वातावरण पूरी तरह से सुरक्षित और आदर्श स्थिति में है। सामान्यतः शाहीन फॉल्कन ऊंचे पहाड़ों या पथरीले इलाकों में अपने घोंसले बनाना पसंद करते हैं, लेकिन सीतानदी के ऊंचे पेड़ अब उनके लिए एक सुरक्षित शिकारगाह के रूप में विकसित हो चुके हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने इस दृश्य को बिलासपुर और धमतरी संभाग के जंगलों के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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