भारत
3 घंटे पहले
4
विचारों
साइबर सुरक्षा पर दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी
दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने एक सराहनीय कदम उठाते हुए पांच अलग-अलग राज्यों में साइबर जालसाजों द्वारा की जा रही 1 करोड़ 53 लाख रुपये की संभावित ठगी को रोक दिया है। पुलिस की विशेष टीम, जिसे प्रोएक्टिव विक्टिम आइडेंटिफिकेशन एंड प्रोटेक्शन टीम कहा जाता है, ने बैंक खातों की गतिविधियों की बारीकी से जांच की और संदिग्ध लेनदेन पकड़ते ही पीड़ितों से तुरंत संपर्क साधा। इस ऑपरेशन में कुल पांच मामले सामने आए, जिनमें से चार मामले डिजिटल अरेस्ट के जरिए बुजुर्गों को धमकाकर पैसे ऐंठने के थे, जबकि एक मामला निवेश के नाम पर हो रही ठगी से जुड़ा हुआ था। प्रभावित राज्य दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात हैं, जहां के लोगों को पुलिस ने समय रहते ठगों के चंगुल से बाहर निकाला।
डिजिटल अरेस्ट का 14 दिन लंबा आतंक
नजफगढ़, दिल्ली निवासी एक 77 वर्षीय रिटायर्ड कर्मचारी को ठगों ने 17 सितंबर से अपने डिजिटल शिकंजे में कस रखा था। जालसाजों ने फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल की और बुजुर्ग को लगातार मानसिक दबाव में रखा। ठग अब तक उनसे 25 लाख रुपये ऐंठ चुके थे और 3 लाख रुपये की और मांग कर रहे थे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि ठग उन पर अपनी संपत्ति, जैसे सोना-चांदी, गिरवी रखने का भी दबाव बना रहे थे। दिल्ली पुलिस की टीम ने तत्परता दिखाते हुए उनसे बात की, जिसके बाद बुजुर्ग ने और पैसे देने से मना कर दिया और उनका 3.48 लाख रुपये का अतिरिक्त नुकसान होने से बच गया।
राजस्थान में बुजुर्ग दंपति को बचाया
राजस्थान में एक 80 वर्षीय कपड़ा कारोबारी और उनकी पत्नी को भी साइबर ठगों ने आधार कार्ड के गलत इस्तेमाल का डर दिखाकर निशाना बनाया था। उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखकर 18 लाख रुपये ठग लिए गए थे। ठगों की भूख इतनी थी कि वे अब 10 लाख रुपये और ऐंठने के लिए मकान गिरवी रखने का दबाव डाल रहे थे। दिल्ली पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर दंपति को साइबर हेल्पलाइन के माध्यम से आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया, जिससे 10 लाख रुपये की और बड़ी ठगी रुक गई।
उत्तर प्रदेश में बड़ी राशि सुरक्षित
उत्तर प्रदेश के एक रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी और उनकी पत्नी, जो पेशे से रिटायर्ड नर्स हैं, को जम्मू-कश्मीर में विस्फोट के मामले में फंसाने की धमकी दी गई थी। ठग उनसे 52 लाख रुपये पहले ही वसूल चुके थे। जालसाज अब 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी तुड़वाकर पैसे ट्रांसफर कराने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस टीम ने सही समय पर दंपति से संपर्क साधा, जिसके कारण उन्होंने कोई भी पैसा ट्रांसफर नहीं किया और उनका 10 लाख रुपये का नुकसान टल गया।
महाराष्ट्र में 55 लाख की बचत
महाराष्ट्र में एक 65 वर्षीय अस्पताल कर्मचारी को मनी लॉन्ड्रिंग और बम विस्फोट के मामलों में फंसाने का डर दिखाया गया। उनसे अब तक 85 लाख रुपये लिए जा चुके थे। ठगों की योजना उनकी बेटी के नाम की 30 लाख रुपये और दामाद के नाम की 25 लाख रुपये की एफडी हड़पने की थी। दिल्ली पुलिस की काउंसलिंग और हस्तक्षेप के चलते परिवार को यह नुकसान उठाने से बचा लिया गया और कुल 55 लाख रुपये सुरक्षित रहे।
गुजरात में निवेश का झांसा
गुजरात के एक 50 वर्षीय कारोबारी ने निवेश के लालच में 25 लाख रुपये गंवा दिए थे। पुलिस ने इस मामले में लगातार फॉलोअप किया और कारोबारी को ठगी के बारे में समझाया। यह कारोबारी आगे चलकर 1 करोड़ रुपये तक निवेश करने की तैयारी में था। पुलिस की सतर्कता से कारोबारी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने आगे पैसे भेजना बंद कर दिया, जिससे उनके 75 लाख रुपये का संभावित नुकसान बच गया।
कानून में डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं
दिल्ली पुलिस ने देशवासियों को आगाह करते हुए साफ कहा है कि भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है। पुलिस, एनआईए, सीबीआई, ट्राई या आरबीआई का कोई भी प्रतिनिधि न तो वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी करता है और न ही जांच के नाम पर किसी से रकम मांगता है। राजस्थान पुलिस ने भी इस दिशा में कड़ा रुख अपनाते हुए 10 हजार से अधिक संदिग्धों को नोटिस जारी किए हैं।
Comments
0 comment