दिल्ली की जलभराव समस्या: प्रशासन ने उन 8 प्रमुख नालों की पहचान की जो बने हैं मुसीबत की जड़ दिल्ली 2 घंटे पहले 5
दिल्ली में हर साल मानसून के दौरान जलभराव से निपटने के लिए सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने पहली बार ऐसे 8 नालों की सूची तैयार की है, जिनकी सफाई और रखरखाव सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

दिल्ली में जलभराव की समस्या का बड़ा कारण

दिल्ली की सड़कों पर मानसून के दौरान पानी जमा होना एक पुरानी समस्या रही है, लेकिन अब प्रशासन ने इस पर ठोस कदम उठाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। दिल्ली सरकार के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (I&FC) ने हाल ही में जारी अपनी सर्विस प्लान रिपोर्ट में उन 8 मुख्य नालों को चिन्हित किया है, जो जल निकासी में सबसे बड़ी बाधा पैदा कर रहे हैं। इन नालों की सफाई न हो पाना न केवल शहर की जलनिकासी प्रणाली पर भारी पड़ता है, बल्कि ये नाले आम लोगों के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं। हाल ही में स्वीकृत दिल्ली मास्टर प्लान-2047 के अंतर्गत इन समस्याओं के समाधान और नालों के कायाकल्प के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

क्यों चुनौतीपूर्ण हैं ये 8 नाले

इन नालों की दयनीय स्थिति के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। मुख्य रूप से इनमें अवैध अतिक्रमण, नगर निगम का कूड़ा सीधे डाला जाना, मवेशियों का गोबर बहकर आना और सीवर लाइनों का अवैध जुड़ाव शामिल है। इसके अलावा, कई स्थानों पर मशीनों के पहुँचने का रास्ता न होने के कारण इनकी समय पर सफाई करना नामुमकिन हो जाता है। अलग-अलग एजेंसियों जैसे दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के बीच तालमेल की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

संकट का कारण बने नाले और उनके समाधान

रिपोर्ट के आधार पर इन नालों की स्थिति और प्रस्तावित सुधारों का विवरण नीचे दिया गया है:

  • एस्केप ड्रेन नंबर-1: इस नाले के भीतर मौजूद दो प्रमुख पानी की पाइपलाइनें जलप्रवाह में अवरोध पैदा कर रही हैं। साथ ही, गाद की अधिकता और मशीनों के लिए जगह न होने से यह नाला बार-बार जाम हो जाता है। समाधान के तौर पर पाइपलाइनों को दूसरी जगह शिफ्ट करना और गाद निकालने की प्रक्रिया (डिसिल्टिंग) को प्राथमिकता दी गई है।
  • बिहारीपुर ड्रेन: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में स्थित इस नाले के दोनों किनारों पर अवैध निर्माण और घनी आबादी है। यहां कूड़ा और गोबर डालना आम बात है। सफाई के लिए नाले के समानांतर सड़क बनाने और अतिक्रमण हटाने का कड़ा प्रस्ताव दिया गया है।
  • बुंद ड्रेन: यहां भी अतिक्रमण ने सफाई के रास्ते बंद कर दिए हैं। पहले से ही बाईपास ड्रेन और बार स्क्रीन की सुविधा होने के बावजूद कचरे की वजह से यह काम नहीं कर पाते। नई योजना में अवैध कब्जों को हटाने और मशीनों के सुगम आवागमन के लिए सड़क बनाने का सुझाव दिया गया है।
  • किराड़ी सुलेमान नगर ड्रेन: यह नाला सबसे जटिल स्थिति में है क्योंकि इसमें 106 अवैध कॉलोनियों का सीवर और कचरा गिरता है। समाधान के लिए DDA को गंदे पानी को मुख्य रोड ड्रेन की तरफ मोड़ने और मौजूदा तीन कलवर्ट्स की जगह ह्यूम पाइप लगाने को कहा गया है।
  • पंखा रोड ड्रेन: कचरा और अतिक्रमण के साथ-साथ हाईटेंशन बिजली की तारें भी यहाँ बड़ी चुनौती हैं। इसे सुधारने के लिए कंक्रीट की मजबूत दीवारें बनाई जाएंगी और DJB तथा बिजली वितरण कंपनियों को मिलकर काम करना होगा।
  • रिलीफ ड्रेन: यहां रेहड़ी-पटरी वालों द्वारा कचरा फेंकने से नाला चोक रहता है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इसे फिर से तैयार करने और पानी की उचित निकासी के लिए सही आउटफॉल बनाने की जिम्मेदारी उठाई है।
  • नसीरपुर ड्रेन: पश्चिमी दिल्ली में कूड़ा संग्रह केंद्रों की कमी इसका मुख्य कारण है। योजना के अनुसार, MCD को यहां उचित ढलाव बनाने होंगे और नाले पर स्टील की जाली लगानी होगी ताकि ठोस कचरा सीधे अंदर न जाए।
  • असोला ड्रेन: दक्षिणी दिल्ली के इस नाले में भी कचरा संग्रहण केंद्रों का अभाव है। यहाँ भी स्टील की जाली लगाने और कचरा प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर करने का मास्टर प्लान में सुझाव दिया गया है।

बारिश से पहले तैयारी का संकल्प

मास्टर प्लान-2047 के तहत इन सभी सुधारों का मुख्य लक्ष्य नालों की वहन क्षमता को बहाल करना है। अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि यदि ये 8 नाले साफ और सुव्यवस्थित हो जाते हैं, तो दिल्ली में जलभराव की स्थिति में भारी कमी आएगी। अतीत में हुई दुर्घटनाओं, जैसे एक नाले में गिरकर बच्चों की जान जाने की दुखद घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने इस बार समय रहते सफाई पर जोर दिया है। मानसून की शुरुआत से पहले इन बाधाओं को दूर करना अब प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है, ताकि भविष्य में जल निकासी की समस्या से शहर को मुक्ति मिल सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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