ट्रेनिंग के बाद भी BLO नहीं भर पा रहे SIR फॉर्म, नाम जुड़ने के बजाय कटने के डर से सहमे मतदाता उत्तराखंड एक घंटा पहले 2
उत्तराखंड में 8 जून 2026 से चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में अब तक करीब साढ़े चार लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं, जबकि ट्रेनिंग के बावजूद कई BLO फॉर्म भरना नहीं सीख पाए हैं, जिससे वोटर चिंतित हैं।

उत्तराखंड में 8 जून 2026 से शुरू हुए 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अभियान ने राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल मचा दी है। अनुपस्थित, दूसरी जगह जा चुके और मृत मतदाताओं के सत्यापन के बाद अब तक करीब साढ़े चार लाख नाम मतदाता सूची से बाहर किए जा चुके हैं। इसके चलते राज्य में मतदाताओं की संख्या 84.29 लाख से घटकर 80 लाख रह गई है। प्री-एसआईआर मैपिंग के दौरान 8.81 लाख से अधिक वोटरों का पता ही नहीं चल पाया, जिसके चलते अंतिम सूची में कुल संख्या के 72 लाख तक पहुंच जाने की आशंका जताई जा रही है।

प्रशिक्षण के बाद भी फॉर्म भरने में दिक्कत

बीते 8 जून से प्रदेश में एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है। राज्यभर में बीएलओ अब तक 88 प्रतिशत फॉर्म बांट चुके हैं। इस पूरे काम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर हेल्परों तक की तैनाती की गई है। सरकारी स्कूलों के शिक्षक गर्मियों की छुट्टियों के दौरान भी ड्यूटी पर लगे हैं और इन सबकी निगरानी के लिए सुपरवाइजर भी मौजूद हैं।

हालांकि, मैदान में उतरे कई बीएलओ को ट्रेनिंग लेने के बावजूद एसआईआर फॉर्म भरना नहीं आ रहा है। इससे मतदाताओं में यह डर बैठ गया है कि कहीं उनका नाम जुड़ने के बजाय सूची से कट न जाए। कई लोगों ने खुलकर अपनी चिंता जाहिर की है।

12 लाख मतदाताओं पर मंडरा रहा संकट

सहसपुर विधानसभा क्षेत्र में सुपरवाइजर के तौर पर तैनात मक्खन लाल शाह ने जमीनी हकीकत साझा की। उनका कहना है कि आम जनता ही नहीं, बल्कि कई कर्मचारी भी अब तक एसआईआर की गंभीरता को ठीक से नहीं समझ पाए हैं, जबकि अभियान से जुड़े आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं।

  • शुरुआती स्थिति: जनवरी 2025 तक उत्तराखंड में कुल मतदाताओं की संख्या 84 लाख 29 हजार से अधिक दर्ज थी।
  • अब तक की कार्रवाई: अनुपस्थित, शिफ्टेड और मृतक श्रेणी के सत्यापन के बाद करीब साढ़े चार लाख (4.5 लाख) नाम सूची से हटाए जा चुके हैं।
  • मौजूदा आंकड़ा: इसके बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या घटकर करीब 80 लाख रह गई है।
  • बड़ा संकट: प्री-एसआईआर मैपिंग के दौरान 8 लाख 81 हजार से अधिक मतदाताओं का उनकी लोकेशन पर पता ही नहीं चल पाया।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस ने भी इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। सीडब्ल्यूसी सदस्य करन माहरा का कहना है कि इसका असर चुनावों में साफ नजर आएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी इसमें अपना फायदा देख रही है।

इन जिलों में सबसे ज्यादा वोटर नहीं हुए ट्रेस

देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में सबसे अधिक मतदाताओं का पता नहीं लगाया जा सका। इसकी बड़ी वजह उत्तर प्रदेश से लगी सीमा बताई जा रही है। दावा है कि इन जिलों में बड़ी संख्या में प्रवासी और फ्लोटिंग आबादी रहती है। राजनीतिक दृष्टि से भी इन जिलों की खास अहमियत है। आशंका है कि करीब 18 लाख लोगों का नाम मतदाता सूची से कट सकता है।

कर्मचारियों को सख्त निर्देश

मुख्य निर्वाचन अधिकारी बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम और भारत निर्वाचन आयोग के उप निर्वाचन आयुक्त संजय कुमार ने संयुक्त रूप से सभी जिलों के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस की और एसआईआर अभियान में गणना फार्म वितरण व डिजिटाइजेशन को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा की। सभी जनपदों के लिए फार्म वितरण की समय-सीमा 18 जून तय की गई है। साथ ही निर्देश दिया गया कि जिन जनपदों में फार्म वितरण का काम लगभग पूरा हो चुका है, वे फार्म डिजिटाइजेशन पर ध्यान दें। जिलों के डीएम को बूथवार समीक्षा करने के भी निर्देश दिए गए।

घर-घर जाकर सत्यापन के आदेश

अधिकारियों ने आगे कहा कि जिन बूथों पर वितरण और डिजिटाइजेशन की रफ्तार धीमी है, वहां अतिरिक्त कर्मियों को सहयोगी के रूप में लगाने को कहा गया है। वहीं, घर पर अनुपस्थित मतदाताओं के घर बीएलए और बीएलओ साथ-साथ जाएं और अनिवार्य रूप से तीन बार विजिट करें। जहां अनुपस्थित, शिफ्टेड, मृत और डुप्लीकेट मतदाता हैं, वहां बीएलओ उनके गणना फार्म पर फील्ड रिपोर्ट दर्ज करें।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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