देहरादून में जर्जर मकानों का खौफ: मानसून की बारिश में क्यों मंडरा रहा है हादसों का साया? उत्तराखंड एक घंटा पहले 3
देहरादून में मानसून दस्तक देते ही पुराने और कमजोर भवनों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि कई दशकों पुरानी इमारतें किसी भी समय ढहने की कगार पर हैं। नगर निगम के दावों के बावजूद स्थानीय लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और किसी बड़े हादसे के होने से पहले सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

देहरादून में मानसून और पुराने भवनों का खतरा

राजधानी देहरादून में मानसून की बारिश ने जहां एक ओर गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी ओर शहर के पुराने और जर्जर हो चुके भवनों के गिरने का खतरा भी बढ़ा दिया है। शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थित दशकों पुराने मकान अब अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। इन इमारतों की दीवारों और छतों में आई सीलन ने स्थानीय निवासियों और वहां से गुजरने वाले राहगीरों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। बारिश के पानी के कारण इन कमजोर ढांचों का प्लास्टर अचानक गिरने या पूरी छत ढहने की आशंका बनी रहती है, जिससे किसी भी समय जान-माल का नुकसान हो सकता है।

प्रमुख बाजारों में बढ़ा डर

देहरादून के सबसे व्यस्त और भीड़भाड़ वाले इलाकों में शामिल पलटन बाजार, धामावाला, राजा रोड और झाझरा जैसे क्षेत्रों में स्थित कई इमारतें अत्यंत जर्जर स्थिति में पहुंच गई हैं। इन इलाकों से रोजाना हजारों लोग आवाजाही करते हैं। दुकानदारों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि मानसून के दौरान लगातार होती बारिश से इमारतों के अंदर पानी रिसने लगता है, जिससे उनकी नींव और दीवारें खोखली हो जाती हैं। लोगों में इस बात का डर हमेशा बना रहता है कि कहीं चलती हुई सड़क पर कोई जर्जर हिस्सा उनके सिर पर न गिर जाए।

स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों की राय

स्थानीय निवासी वी नैथानी का मानना है कि शहर के कई पुराने मकान मौत के मुहाने पर खड़े हैं। उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल कागजी कार्रवाई से कुछ हासिल नहीं होगा। उनका कहना है कि सरकार को किसी भी बड़ी अनहोनी का इंतजार करने के बजाय समय रहते ठोस कदम उठाने चाहिए। इसी तरह सामाजिक कार्यकर्ता यशपाल का कहना है कि सिर्फ सर्वे कर लेने या नोटिस थमा देने से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा। अगर समय रहते इन खतरनाक भवनों को मरम्मत के दायरे में नहीं लाया गया या सुरक्षित तरीके से नहीं गिराया गया, तो देहरादून के बाजारों में हादसों की संख्या बढ़ती रहेगी।

पिछले हादसों से प्रशासन ने नहीं सीखा सबक

देहरादून में जर्जर मकानों के कारण पहले भी कई गंभीर हादसे हो चुके हैं, जिन्होंने शहर को झकझोर कर रख दिया था। अगस्त 2018 में तहसील चौक के पास एक जर्जर भवन अचानक भरभरा कर गिर गया था। यह गनीमत रही कि घटना सुबह के समय हुई, जिससे बड़ी जनहानि टल गई। इसी क्षेत्र में एक बैंक के ऊपरी हिस्से के ढहने की घटना भी रिकॉर्ड में है। इसके अलावा करणपुर इलाके में एक दुखद घटना घटी थी, जिसमें दीवार गिरने के कारण एक युवती ने अपनी जान गंवा दी थी। ये पुराने मामले बताते हैं कि शहर के पुराने ढांचे कितने संवेदनशील हैं और इन्हें नजरअंदाज करना कितना घातक साबित हो सकता है।

नगर निगम की कार्रवाई और कानूनी अड़चनें

मामले को लेकर देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मानसून से पहले ही नगर निगम स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। इसमें नालियों की सफाई, फॉगिंग और जर्जर भवनों का सर्वे शामिल है। उन्होंने दावा किया कि निगम ने कई खतरनाक भवनों के मालिकों को नोटिस जारी किए हैं और कुछ स्थानों पर निर्माण हटाने की प्रक्रिया भी अपनाई गई है।

नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि निगम उन भवनों को गिराने की दिशा में काम कर रहा है जो सीधे तौर पर खतरनाक हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई मामलों में कार्रवाई इसलिए नहीं हो पा रही है क्योंकि संपत्तियां विवादित हैं या फिर उनके मामले अदालतों में लंबित हैं। दूसरी ओर, घोसी गली के निवासी कृष्ण कुमार वर्मा का कहना है कि प्रशासन केवल ऊपरी खानापूर्ति कर रहा है। उनकी शिकायत के बाद भी भवन की मूलभूत समस्या को हल नहीं किया गया, जिससे खतरा जस का तस बना हुआ है।

अस्वच्छता और जहरीले जीवों का भी आतंक

जर्जर और खाली पड़े भवनों के कारण केवल ढांचा गिरने का ही डर नहीं है, बल्कि मानसून में ये इमारतें जहरीले जीवों का घर भी बन जाती हैं। बारिश के पानी से सीलन बढ़ने के कारण ऐसे खाली मकानों में सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले कीड़े-मकोड़े पनपते हैं, जो आसपास के घरों के लोगों के लिए बड़ा खतरा पैदा करते हैं। पलटन बाजार के व्यापारियों की स्पष्ट मांग है कि जो भवन खतरे की श्रेणी में आ चुके हैं, उन्हें या तो तुरंत दुरुस्त किया जाए या फिर उन्हें पूरी तरह से हटाकर रास्ता साफ किया जाए, ताकि लोगों का जीवन सुरक्षित रह सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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