दादा की आखिरी इच्छा पूरी नहीं हो सकी, अजित पवार को याद कर भावुक हुईं सुप्रिया सुले महाराष्ट्र एक महीने पहले 56
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की नेता सुप्रिया सुले ने अपने भाई अजित पवार के निधन के बाद परिवार के दर्द और राजनीतिक स्थिति पर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि अजित पवार की इच्छा के बावजूद दोनों गुटों का एक होना संभव नहीं हो पाया।

दिल्ली में भावुक हुईं सुप्रिया सुले

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर मीडिया से बात करते हुए सुप्रिया सुले काफी भावुक नजर आईं। इस दौरान उन्होंने अपने भाई अजित पवार को याद करते हुए कई अहम खुलासे किए। सुप्रिया ने कहा कि उनके भाई अब उनके बीच नहीं हैं और उनके निधन को पांच महीने बीत चुके हैं। उनका परिवार धीरे-धीरे इस गहरे दुख से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। सुप्रिया ने जोर देकर कहा कि अजित पवार के नाम पर और उनसे जुड़ी तमाम राजनीतिक चर्चाओं पर अब पूर्ण विराम लग जाना चाहिए।

अजित पवार की आखिरी इच्छा और निराशा

सुप्रिया सुले ने खुलासा किया कि अजित पवार की अंतिम इच्छा थी कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों धड़े आपस में फिर से मिल जाएं और देश तथा राज्य के विकास के लिए एक साथ काम करें। सुप्रिया ने बताया कि वह और उनका संगठन अजित पवार की इस आखिरी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। उन्होंने कहा कि अजित पवार के जीवित रहते भी यही भावना थी कि पार्टी एक हो जाए, और उनके जाने के बाद भी वे इसी प्रयास में थे। हालांकि, दूसरी ओर से कोई भी सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण अब उन्होंने इस मामले को यहीं समाप्त करने का निर्णय लिया है।

स्वाभिमान से समझौता नहीं

सुप्रिया ने एक बेहद दुखद प्रसंग साझा करते हुए बताया कि जिस दिन अजित पवार का निधन हुआ, उसी समय उनके कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के एकीकरण का मुद्दा उठाया था। लेकिन इसके जवाब में दूसरे गुट की ओर से यह कह दिया गया कि ऐसी कोई बात या घटना हुई ही नहीं, जिससे उन्हें गहरा आघात पहुंचा। सुप्रिया के अनुसार, एक तरफ वे अपने भाई को खोने के गम में थे और दूसरी तरफ उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन इस तरह के बयानों ने उन्हें काफी पीड़ा पहुंचाई।

सुप्रिया सुले ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे लोग स्वाभिमानी हैं और अपने स्वाभिमान से किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने साफ कर दिया कि जब उन्होंने विरोधी पक्ष के नेताओं के बयान देखे, तो उन्हें यह समझने में देर नहीं लगी कि उनकी अजित पवार की आखिरी इच्छा को पूरा करने की कोई मंशा नहीं है। उसी दिन उन्होंने इस विषय को हमेशा के लिए बंद करने का फैसला ले लिया। अब उनका पूरा ध्यान केवल राज्य और देश की सेवा पर केंद्रित है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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