अलीगढ़ का नाम बदलकर हरिगढ़ करने की चर्चा पर सियासत गरम, विपक्षी पार्षदों ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 5
अलीगढ़ का नाम बदलने की चर्चाओं के बीच विपक्षी दलों के पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा और शहर का नाम नहीं बदलने की मांग रखी है।

नाम बदलने की चर्चाओं पर मचा घमासान

अलीगढ़ के नाम को बदलकर 'हरिगढ़' करने की खबरें सामने आने के बाद शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस संभावित बदलाव का विरोध करने के लिए समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के पार्षद एकजुट हो गए हैं। इन सभी पार्षदों ने मिलकर जिला मुख्यालय पर एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया और जिलाधिकारी के जरिए प्रदेश की राज्यपाल को अपना ज्ञापन प्रेषित किया। उनकी स्पष्ट मांग है कि शहर के ऐतिहासिक नाम के साथ कोई छेड़छाड़ न की जाए।

राज्यपाल को सौंपा विरोध पत्र

विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पार्षद कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। पार्षदों का तर्क है कि अलीगढ़ का नाम बदलना शहर की सदियों पुरानी पहचान और उसकी मूल संस्कृति को प्रभावित करने वाला कदम साबित होगा। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया है कि अलीगढ़ का नाम वर्तमान में जो है, उसे ही बरकरार रखा जाए।

पार्षदों ने इस बात पर जोर दिया कि अलीगढ़ अपनी ताला, तालीम और तहजीब के लिए पूरी दुनिया में एक विशिष्ट पहचान रखता है। यह शहर गंगा जमुनी तहजीब का प्रतीक है, जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय के लोग पीढ़ियों से सौहार्दपूर्ण वातावरण में साथ रहते आए हैं। प्रदर्शनकारियों का यह भी दावा है कि नगर निगम की किसी भी हालिया बैठक में नाम बदलने को लेकर कोई आधिकारिक प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022-23 के दौरान ऐसा एक सुझाव जरूर सामने आया था, जिसका उस समय भी जमकर विरोध किया गया था।

बुनियादी समस्याओं से ध्यान भटकाने का आरोप

विपक्षी पार्षदों ने सरकार पर तीखे हमले करते हुए कहा कि नगर निगम के पास जिले का नाम बदलने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, यह पूरी तरह से शासन का क्षेत्राधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के मुद्दे केवल जनता को गुमराह करने और वास्तविक विकास कार्यों से ध्यान भटकाने के लिए उछाले जाते हैं। सरकार को नाम बदलने की राजनीति छोड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, बदहाल सड़कों, बेरोजगारी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर बुनियादी मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

लोकतांत्रिक विरोध जारी रखने की चेतावनी

इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पार्षद मुशर्रफ ने स्पष्ट कहा कि जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में अलीगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को सुरक्षित रखने की पुरजोर मांग की गई है। पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि इस दिशा में कोई कदम उठाया गया, तो वे संवैधानिक और लोकतांत्रिक दायरे में रहकर अपना विरोध निरंतर जारी रखेंगे।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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