'सांसद बनकर फायदा नहीं, उल्टे घटी कमाई', कांग्रेस सांसद डॉ. शिवाजी कालगे का चौंकाने वाला बयान महाराष्ट्र 2 महीने पहले 48
लातूर के कांग्रेस सांसद डॉ. शिवाजी कालगे का कहना है कि लोकसभा पहुंचने के बाद उनकी आमदनी घट गई है, क्योंकि वह अपनी मेडिकल प्रैक्टिस को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं।

लातूर: महाराष्ट्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लातूर से सांसद डॉ. शिवाजी कालगे ने एक ऐसा बयान देकर सबको हैरान कर दिया है, जिसकी राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है। उनका कहना है कि लोकसभा का सदस्य बनने के बाद उन्हें आर्थिक रूप से घाटा उठाना पड़ा है। कालगे के मुताबिक, सांसदी की जिम्मेदारियों के चलते वह अपनी मेडिकल प्रैक्टिस को उतना समय नहीं दे पा रहे, जिसका सीधा असर उनकी आय पर पड़ा है। उन्होंने कहा, "अगर कोई मेरी आर्थिक स्थिति के बारे में पूछे, तो मैं यही कहूंगा कि सांसद बनने के बाद मुझे नुकसान हुआ है।"

डॉक्टरी के पेशे को नहीं दे पा रहे समय

सांसद डॉ. शिवाजी कालगे ने बताया कि वह अपने डॉक्टरी के पेशे को जरूरी समय नहीं दे पा रहे हैं और इसका सीधा प्रभाव उनके अस्पताल की कार्यप्रणाली पर पड़ा है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में उन्होंने करीब 36 लाख रुपये आयकर के रूप में जमा किए थे, जबकि 2024-25 में उनका टैक्स घटकर लगभग 8.75 लाख रुपये रह गया, क्योंकि उनकी आय में काफी गिरावट आई। कालगे ने कहा कि अब वह न तो अपने मरीजों को पूरा समय दे पा रहे हैं और न ही पूरे वक्त अपना अस्पताल चला पा रहे हैं।

विकास फंड के आवंटन पर जताई नाराजगी

कांग्रेस नेता कालगे ने पड़ोसी नांदेड़ जिले में विकास कार्यों के लिए मिलने वाले फंड के बंटवारे को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, "नांदेड़ के प्रभारी मंत्री (गार्जियन मिनिस्टर) के साथ मेरा अनुभव बिल्कुल अलग रहा है। पिछले साल विकास कार्यों के लिए एक भी रुपया मंजूर नहीं किया गया। बीजेपी के प्रभारी मंत्री की ऐसी राजनीति निंदनीय है।" सांसद ने बताया कि वह इस मसले को लेकर प्रभारी मंत्री से दो-तीन बार मुलाकात कर चुके हैं और यह मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने आगे कहा, "उन्होंने मुझे भरोसा दिलाया है कि इस साल ऐसी स्थिति नहीं रहेगी।"

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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