कांगो में इबोला का घातक हमला, मृतकों की संख्या 1,000 के करीब विश्व एक महीने पहले 47
कांगो में इबोला वायरस ने विकराल रूप ले लिया है और अब तक इससे मरने वालों की संख्या 999 तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह संक्रमण पहले के किसी भी इबोला प्रकोप की तुलना में कहीं अधिक तेजी से फैल रहा है।

इबोला का बढ़ता कहर

कांगो में इबोला वायरस एक बार फिर से जानलेवा साबित हो रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस वायरस से मरने वालों का आंकड़ा अब 999 तक पहुंच चुका है। देश में इबोला के कुल 2,473 मामले दर्ज किए गए हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि 737 मरीज अस्पतालों और विशेष पृथकवास केंद्रों में अपना इलाज करवा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह इबोला का अब तक का सबसे तीव्र प्रसार है।

उपचार और टीके का अभाव

कांगो में 15 मई को इस प्रकोप की घोषणा की गई थी। यह पिछली बार के प्रकोपों से इसलिए अधिक खतरनाक है क्योंकि इस बार जिम्मेदार वायरस के बुंडिबुग्यो स्वरूप के लिए न तो कोई प्रभावी टीका उपलब्ध है और न ही इसका कोई पक्का इलाज मौजूद है। यदि हम इतिहास के पन्नों को पलटें, तो वर्ष 2013 से 2016 के बीच का इबोला प्रकोप सबसे घातक माना जाता था, जिसमें 28,000 मामलों के साथ 11,000 से अधिक मौतें हुई थीं। वर्तमान प्रकोप में कम समय में हुई मौतों की संख्या उस भीषण महामारी को भी पीछे छोड़ती नजर आ रही है।

तेजी से बढ़ता संक्रमण का दायरा

इस वायरस की भयावहता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि मौत का आंकड़ा मात्र कुछ ही महीनों में 1,000 के करीब पहुंच गया है। तुलनात्मक रूप से, वर्ष 2013 के पश्चिम अफ्रीका के प्रकोप में इसी स्तर तक पहुंचने में लगभग आठ महीने का समय लगा था। स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नए दर्ज किए गए मामलों में से करीब 80 प्रतिशत संक्रमण के स्रोत का अभी तक पता नहीं चल पाया है। यह साफ संकेत देता है कि संक्रमण का प्रसार निगरानी और नियंत्रण प्रणाली की क्षमता से कहीं ज्यादा तेज है।

कैसे फैलता है यह वायरस

इबोला वायरस बेहद संक्रामक है। यह किसी संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी और अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से तेजी से फैलता है। यह बीमारी शरीर के लिए घातक होती है और अक्सर जानलेवा साबित होती है। इतुरी प्रांत के अलावा संक्रमण अब चार अन्य प्रांतों में भी अपने पैर पसार चुका है।

सुरक्षा और प्रबंधन की चुनौतियां

मौजूदा स्थिति को और कठिन बनाने का काम राहत टीमों पर हो रहे हमलों ने किया है। इन हमलों के कारण कई सहायता संगठनों और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रभावित इलाकों से पीछे हटना पड़ा है। इसके अलावा, वेतन भुगतान में देरी की शिकायतों को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल ने व्यवस्था को और अधिक जर्जर कर दिया है। अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के महानिदेशक डॉ. जीन कासेया ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रयास तेज करने की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह दुनिया का सबसे खतरनाक स्वास्थ्य संकट बन सकता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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