कॉफी पर कुरुक्षेत्र: क्षेत्रीय दलों की सियासी समझ पर राहुल गांधी की टिप्पणी क्या विपक्ष को महंगी पड़ेगी? पढ़ें पूरी बहस भारत एक घंटा पहले 2
INDI गठबंधन की हालिया बैठक में राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों के बाद विपक्षी खेमे में नेतृत्व, रणनीति और आपसी भरोसे को लेकर नई बहस छिड़ गई है। 'कॉफी पर कुरुक्षेत्र' में पैनलिस्टों ने इन बयानों के संभावित असर पर मंथन किया।

INDI गठबंधन के तालमेल पर खड़े हुए सवाल

कार्यक्रम में चर्चा हुई कि INDI गठबंधन की हालिया बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में नई बहस तेज हो गई है। बताया गया कि इस बैठक के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सहयोगी दलों के नेताओं को संबोधित करते हुए कुछ ऐसी बातें रखीं, जिनके चलते विपक्षी खेमे के भीतर नेतृत्व, रणनीति और आपसी समन्वय को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

क्षेत्रीय दलों को राहुल गांधी ने बताया “कन्फ्यूज”

चर्चा के अनुसार राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं से कहा कि वे मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर “कन्फ्यूज” हैं, जबकि कांग्रेस और वे खुद इन परिस्थितियों को ज्यादा बेहतर ढंग से समझते हैं। कथित तौर पर उन्होंने यह भी कहा कि देश में अब चुनावी मुकाबला बराबरी की जमीन पर नहीं हो रहा और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ चुका है। राहुल गांधी ने विपक्षी दलों से आपसी मतभेद किनारे रखकर एकजुट होने और सरकार के खिलाफ संघर्ष को धार देने की अपील भी की।

क्षेत्रीय दलों की राजनीतिक समझ पर निशाना

बहस में शामिल राजनीतिक विश्लेषकों और पैनलिस्टों ने राहुल गांधी के इस कथित बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी भाषा सहयोगी दलों को असहज कर सकती है। उनका कहना था कि समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, आरजेडी, डीएमके और दूसरे क्षेत्रीय दल अपने-अपने राज्यों में लंबे संघर्ष के बाद मजबूत हुए हैं, ऐसे में उन्हें राजनीतिक समझ का पाठ पढ़ाना विपक्षी एकता के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

अपने गिरेबान में नहीं झांक रही कांग्रेस

चर्चा में राहुल गांधी के उस कथित बयान पर भी सवाल उठे, जिसमें उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव को विपक्ष की “जीत” करार दिया था। आलोचकों का मानना था कि नतीजों की अपनी-अपनी व्याख्या करने के बजाय विपक्ष को अपनी राजनीतिक कमजोरियों की ओर ध्यान देना चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि कांग्रेस को सबसे पहले उन राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी, जहां वह दशकों से सत्ता से बाहर है।

गठबंधन में नजर आती भरोसे की कमी

कार्यक्रम में विपक्षी नेताओं और कांग्रेस के आपसी रिश्तों पर भी बात हुई। पैनलिस्टों का दावा था कि कई क्षेत्रीय दल कांग्रेस के साथ केवल राजनीतिक मजबूरी के चलते गठबंधन में बने हुए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर भरोसे और तालमेल की कमी अब भी बरकरार है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!