क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों से भारत को मिल रहा है फायदा? कॉफी पर कुरुक्षेत्र में छिड़ी बहस भारत 3 घंटे पहले 4
कॉफी पर कुरुक्षेत्र कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और दौरों की प्रभावशीलता पर गहन चर्चा की गई, साथ ही विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।

कॉफी पर कुरुक्षेत्र में विदेश नीति की समीक्षा

इंडिया टीवी के कार्यक्रम कॉफी पर कुरुक्षेत्र में हाल ही में एक अहम चर्चा की गई, जिसका मुख्य विषय था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं से भारत को वास्तव में क्या हासिल हो रहा है। इसके साथ ही चर्चा का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर भी केंद्रित था कि क्या विपक्ष के पास सरकार की वर्तमान विदेश नीति का कोई मजबूत और ठोस विकल्प मौजूद है। पैनल में मौजूद विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि केवल सरकार की आलोचना करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विपक्ष को यह भी बताना चाहिए कि यदि वे सत्ता में होते तो उनकी नीति क्या और कैसे अलग होती।

राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर केंद्रित सवाल

बहस की शुरुआत कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लंबी विदेश यात्राओं और वहां उनकी मौजूदगी को लेकर हुई। वक्ताओं ने सवाल उठाया कि एक प्रमुख विपक्षी दल के नेता के तौर पर उनकी सक्रियता देश के भीतर कम क्यों दिख रही है। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि जब देश में कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा के केंद्र में हों, तब विपक्ष की आवाज मुखर होनी चाहिए। पैनल ने तर्क दिया कि विपक्ष को अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए सरकार की नीतियों के खिलाफ न केवल आवाज उठानी चाहिए, बल्कि एक वैकल्पिक नीति का खाका भी पेश करना चाहिए, तभी उनकी आलोचना को जनता के बीच विश्वसनीयता मिल पाएगी।

ऑस्ट्रेलिया के साथ यूरेनियम समझौता और ऊर्जा सुरक्षा

चर्चा का रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों की उपलब्धियों की ओर मुड़ा। पैनल ने स्पष्ट किया कि इन यात्राओं के जरिए भारत ने कई रणनीतिक समझौते किए हैं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया के साथ हुआ यूरेनियम आपूर्ति समझौता मील का पत्थर माना जा रहा है। विशेषज्ञों ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए यूरेनियम बेहद जरूरी है। अपनी ऊर्जा जरूरतों को विविध बनाना और आपूर्ति सुनिश्चित करना भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक नीति का हिस्सा है और इसी दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

विदेश नीति का बढ़ता दायरा और नए साझेदार

पैनल ने इस बात को रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी विदेश नीति का दायरा काफी विस्तार दिया है। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इजराइल और पश्चिम एशिया के देशों के साथ भारत के रिश्ते आज पहले से कहीं अधिक प्रगाढ़ हुए हैं। पहले जिन क्षेत्रों को विदेश नीति में कम महत्व मिलता था, आज भारत वहां के देशों के साथ मजबूत भागीदारी कर रहा है। बदलते वैश्विक माहौल में भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए बहुपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर ले गया है।

रक्षा और तकनीकी क्षेत्र में भारत की बढ़त

कार्यक्रम के दौरान इस बात पर भी गौर किया गया कि भारत अब रक्षा, तकनीक, कृषि और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को तेजी से बढ़ा रहा है। इजराइल के साथ तकनीकी साझेदारी, पश्चिम एशिया के साथ बेहतर तालमेल और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती सक्रिय भूमिका इसी नई विदेश नीति की कामयाबी का प्रमाण है।

पाकिस्तान पर स्पष्ट और सख्त रुख

अंत में पाकिस्तान के साथ संबंधों पर भी राय रखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की वर्तमान विदेश नीति आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद सख्त और स्पष्ट है। भारत ने बातचीत और कूटनीति के मामले में भी राष्ट्रीय सुरक्षा को ही प्राथमिकता दी है। कुल मिलाकर चर्चा का सार यह रहा कि विदेश यात्राएं केवल औपचारिक नहीं हैं, बल्कि ये राष्ट्रीय प्रभाव को बढ़ाने, रणनीतिक साझीदारियां मजबूत करने और देश के हितों की रक्षा करने का एक प्रभावी माध्यम हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!