राष्ट्रीय राजनीति
8 घंटे पहले
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सरकार पर वादा खिलाफी का गंभीर आरोप
नीट परीक्षा विवाद को लेकर देशभर में छिड़ा छात्र आंदोलन भले ही कुछ समय के लिए थम गया था, लेकिन अब यह मामला फिर से गरमाता दिख रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। संगठन का आरोप है कि सरकार ने आंदोलन को शांत कराने के लिए जो वादे किए थे, अब उनसे पीछे हट रही है। सीजेपी ने चेतावनी दी है कि वे आने वाले समय में जंतर-मंतर की तर्ज पर दोबारा बड़े आंदोलन की तैयारी कर सकते हैं। अपनी आगामी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए संगठन ने 24 अगस्त को एक अहम बैठक बुलाई है।
युवाओं के भरोसे के साथ खिलवाड़
सीजेपी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को खत्म करने के लिए युवाओं के साथ जो भी प्रतिबद्धताएं जताई गई थीं, वे केवल आंदोलन को टालने का जरिया नहीं होनी चाहिए। संगठन ने जोर देकर कहा कि उन वादों को अक्षरशः और उसी भावना के साथ पूरा किया जाना चाहिए जिसके तहत वे किए गए थे। सीजेपी ने सरकार को सचेत किया कि यदि इन वादों से मुकरने की कोशिश की गई, तो इसे युवाओं के साथ खुला विश्वासघात माना जाएगा।
FIR वापस लेने में सरकार की टालमटोल
संगठन ने सबसे बड़ा सवाल प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर उठाया है। सीजेपी के दावों के अनुसार, अदालत द्वारा बार-बार जानकारी मांगे जाने के बावजूद सरकार ने अब तक उन छात्रों की सूची उपलब्ध नहीं कराई है जिन पर मुकदमे दर्ज हैं। संगठन का मानना है कि आंदोलन समाप्त करने के बाद सरकार की तरफ से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन मुकदमों को वापस लेने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। इस प्रक्रिया में हो रही देरी को संगठन युवाओं के भरोसे का अपमान करार दे रहा है।
आंदोलन वापसी की शर्तें और मौजूदा संकट
गौरतलब है कि 25 जुलाई को सीजेपी ने एक महीने से अधिक समय तक चले अपने विरोध प्रदर्शन को तीन प्रमुख शर्तों के आधार पर वापस लेने का निर्णय लिया था। सरकार के साथ बनी सहमति में निम्नलिखित बिंदु शामिल थे:
- नीट पेपर लीक से जुड़े मामलों में जिन छात्रों ने आत्महत्या की, उनके परिवारों को अधिकतम संभव आर्थिक सहायता प्रदान करना।
- केंद्र और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन शासित राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकियों यानी FIR को निरस्त करना।
- भविष्य में इस प्रदर्शन में शामिल रहे किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करना।
इन मांगों के अलावा, संगठन ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए अपने पांच सूत्रीय चार्टर का भी जिक्र किया। सीजेपी का कहना है कि सरकार ने भरोसा दिया था कि वे इस चार्टर पर विस्तृत चर्चा करेंगे और जरूरी बदलावों पर विचार करेंगे। लेकिन अब सरकार का रवैया देखते हुए संगठन दोबारा सड़कों पर उतरने की संभावना से इनकार नहीं कर रहा है।
भविष्य की रणनीति का इंतजार
अब सबकी निगाहें 24 अगस्त को होने वाली बैठक पर टिकी हैं। क्या सरकार अपनी पुरानी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी, या फिर कॉकरोच जनता पार्टी फिर से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपना मोर्चा जमाएगी, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा। सीजेपी का रुख फिलहाल बेहद कड़ा नजर आ रहा है और वे सरकार की व्याख्या या उनके द्वारा वादों को कमजोर करने के किसी भी प्रयास को स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।
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