राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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2027 के महासमर की नई बिसात
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राज्य का राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है। शनिवार को प्रयागराज में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में युवाओं की आवाज उठाने के बाद, रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिद्धार्थनगर में अपनी सरकार के विकास कार्यों का लेखा-जोखा पेश करते हुए कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। इन दो प्रमुख चेहरों के आमने-सामने आने से अब यूपी की राजनीति में एक नया समीकरण बनता दिख रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस उठापटक के बीच समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव की सक्रियता चर्चा के केंद्र से थोड़ी धुंधली होती नजर आ रही है। हालांकि, अखिलेश यादव ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस वे के निर्माण कार्य के दौरान सड़क सुखाने के लिए पंखे लगाने जैसी घटनाओं को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उठाते हुए सरकार को घेरा जरूर है, लेकिन फिलहाल चर्चाएं मुख्य रूप से राहुल गांधी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच की जुबानी जंग पर टिकी हुई हैं।
योगी आदित्यनाथ का विकास का रिपोर्ट कार्ड
सिद्धार्थनगर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस के दशकों पुराने शासन पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता के क्षेत्र में कांग्रेस ने देश की युवा पीढ़ी के साथ हमेशा धोखा किया है। उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस ने लगभग 55 से 60 साल तक शासन किया, लेकिन इस दौरान युवाओं के भविष्य के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई।
योगी आदित्यनाथ ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इस अवधि में देशभर में 17 करोड़ लोगों को रोजगार और नौकरियां मिली हैं। मुख्यमंत्री ने आंकड़ों के जरिए अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि 2014 से पहले देश में कौशल विकास का कोई व्यवस्थित तंत्र मौजूद नहीं था, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
- देशभर में 17,000 से अधिक कौशल विकास केंद्र और 15,000 से अधिक आईटीआई संस्थान संचालित हो रहे हैं।
- आईआईटी की संख्या 16 से बढ़कर 23 हो गई है।
- आईआईएम की संख्या 13 से बढ़कर 22 तक पहुंच गई है।
- देश में 431 मेडिकल कॉलेजों की संख्या अब बढ़कर 818 से अधिक हो गई है।
- एम्स की कुल संख्या 7 से बढ़कर 23 हो गई है।
- एमबीबीएस की सीटों में भारी उछाल आया है, जो 51,348 से बढ़कर 1,28,926 हो गई हैं।
राहुल गांधी का '3D' फॉर्मूला और छात्रों का दर्द
दूसरी तरफ, प्रयागराज के केपी ग्राउंड में राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं के दर्द को समझने का प्रयास किया। उन्होंने युवाओं के सामने अपनी बात रखने के लिए '3D' का सिद्धांत पेश किया, जिसमें उन्होंने दर्द, डेटा और दौलत को मुख्य बिंदु बताया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश के युवा आज सरकारी सिस्टम के चक्रव्यूह और पेपर लीक होने के नेटवर्क में बुरी तरह फंसे हुए हैं।
कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि पिछले एक दशक में 150 से ज्यादा पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे लगभग 7.5 करोड़ से अधिक छात्र प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फीस में बढ़ोतरी, सीटों में कटौती और पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं के अभाव के कारण युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है, जबकि देश की दौलत और संसाधन चंद बड़े उद्योगपतियों की झोली में जा रहे हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में व्याप्त समस्याओं का जिक्र करते हुए वहां 400 प्रतिशत फीस वृद्धि और हॉस्टल फीस में बढ़ोतरी का भी विरोध किया।
युवा वोट बैंक पर दोनों दलों की नजर
यह स्पष्ट है कि 2027 के चुनाव में अयोध्या में हुए चंदा चोरी के विवाद, बुलडोजर एक्शन या फिर कानून-व्यवस्था जैसे पुराने चुनावी मुद्दों की जगह अब शिक्षा और रोजगार ने ले ली है। भारतीय जनता पार्टी जहां अपने 12 वर्षों के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और पारदर्शी सरकारी नौकरियों के आंकड़ों को अपनी ढाल बना रही है, वहीं कांग्रेस और विपक्षी दल इसे बेरोजगारी और पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार की विफलता बताकर भुनाने में जुटे हैं।
उत्तर प्रदेश के मतदाता, विशेषकर युवा वर्ग, किसी भी सरकार के भाग्य का फैसला करने की ताकत रखते हैं। प्रयागराज जैसे छात्रों के गढ़ में राहुल गांधी का पहुंचना और सिद्धार्थनगर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में योगी आदित्यनाथ का तीखा हमला इस बात का संकेत है कि दोनों ही खेमे युवा मतदाताओं को रिझाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते।
निष्कर्ष: क्या बदलेगा चुनाव का एजेंडा?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिलहाल दो विचारधाराएं आमने-सामने खड़ी हैं। एक तरफ भाजपा सरकार अपने रिपोर्ट कार्ड के साथ मैदान में है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस छात्रों के आक्रोश को लामबंद कर रही है। जिस प्रकार से सिद्धार्थनगर में मुख्यमंत्री ने आक्रामक तेवर अपनाए और प्रयागराज में राहुल गांधी ने छात्रों से सीधा संवाद किया, उससे यह साफ हो गया है कि चुनावी शंखनाद हो चुका है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या युवा मतदाता भाजपा के विकास दावों पर भरोसा करते हैं या फिर विपक्ष द्वारा उठाए गए पेपर लीक और प्रशासनिक नाकामी के सवालों पर मुहर लगाते हैं। फिलहाल, यह तय है कि राज्य में 2027 का विधानसभा चुनाव केवल स्थानीय नहीं बल्कि शिक्षा, रोजगार और युवाओं के भविष्य के एजेंडे पर ही लड़ा जाएगा।
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