पंजाब
4 घंटे पहले
7
विचारों
नशा तस्करों के खिलाफ सख्त रुख
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को पंजाब की मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर गंभीर टिप्पणी की। अमृतसर के रामपुरा में पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले विधानसभा चुनाव के बाद यदि पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सत्ता आती है, तो राज्य से नशा तस्करों का सफाया किया जाएगा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि नशा माफियाओं को पंजाब की धरती से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा और राज्य में पूरी तरह से पारदर्शी व ईमानदार प्रशासन स्थापित किया जाएगा।
युवाओं की बर्बादी पर चिंता
नायब सिंह सैनी ने पंजाब में फैल रहे नशे के जाल पर गहरी चिंता प्रकट की है। उन्होंने कहा कि यह समस्या आज समाज के लिए एक नासूर बन चुकी है, जिसने न केवल युवाओं के भविष्य को दांव पर लगा दिया है, बल्कि कई परिवारों की खुशियां भी उजाड़ दी हैं। सैनी ने भरोसा दिलाया कि बीजेपी सत्ता में आते ही न केवल तस्करों पर कानूनी कार्रवाई करेगी, बल्कि नशे की दलदल में फंसे युवाओं को नई जिंदगी देने और उन्हें वापस मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बड़े स्तर पर ठोस योजनाएं भी लागू की जाएंगी।
आप सरकार पर तीखा हमला
पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सीएम सैनी ने कहा कि मौजूदा नेतृत्व जनता से किए गए वादों को पूरा करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के वक्त ईमानदार शासन का जो वादा किया गया था, वह कोरी घोषणा बनकर रह गया है। सैनी का आरोप है कि भगवंत मान के नेतृत्व वाली यह सरकार भ्रष्टाचार के मामले में पिछली कांग्रेस सरकार के सभी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। उन्होंने सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि जांच में यह बात सामने आई है कि हमलावर पंजाब में नशे के बढ़ते प्रभाव से काफी नाराज था, जो प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान है।
चुनाव की संभावित तारीखें और अटकलें
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सामान्य कार्यक्रम के अनुसार, चुनाव 2027 की शुरुआत यानी फरवरी महीने में होने की संभावना है। हालांकि, भारतीय निर्वाचन आयोग की तरफ से अभी तक आधिकारिक तौर पर तारीखों का ऐलान नहीं किया गया है। राज्य की राजनीति में इन दिनों चुनाव समय से पहले होने की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं। बठिंडा में एक रोड शो के दौरान अरविंद केजरीवाल द्वारा दिए गए संकेतों के बाद इस बहस को और बल मिला है कि क्या मतदान नवंबर के महीने में करवाए जा सकते हैं।
Comments
0 comment