CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने दिल्ली हाई कोर्ट में दी दस्तक, न्यायिक हिरासत को दी चुनौती दिल्ली 2 घंटे पहले 5
कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक हिरासत के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जंतर-मंतर मामले में गिरफ्तारी के बाद से ही दोनों नेताओं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो बड़े नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रांका की कानूनी परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा घटनाक्रम में, दोनों नेताओं ने अपनी न्यायिक हिरासत को चुनौती देते हुए सीधे दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। जानकारी के मुताबिक, उनके वकील ने हाई कोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर कर इस पूरे मामले में तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई है। यह कदम तब उठाया गया है जब दिल्ली की एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने सोमवार को दोनों की न्यायिक हिरासत की अवधि को 2 दिन के लिए और बढ़ा दिया है। साथ ही, अब इस पूरे मामले की जांच का जिम्मा दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है, जो जंतर-मंतर पर हुई कथित ट्रेसपासिंग की बारीकी से पड़ताल करेगी।

न्यायिक हिरासत का पूरा घटनाक्रम

गौरतलब है कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने रविवार को ही सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत को 21 अक्टूबर तक के लिए विस्तारित करने का निर्णय लिया था। इससे पूर्व, उन्हें 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने उनकी हिरासत में और विस्तार कर दिया, जिसके खिलाफ अब वे हाई कोर्ट पहुंचे हैं।

क्या है पूरा विवाद और गिरफ्तारी की वजह

सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। पुलिस का आरोप है कि ये नेता जंतर-मंतर क्षेत्र में बिना अनुमति के जबरन दाखिल हुए थे। दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, 13 अक्टूबर की सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और पार्टी के 11 अन्य सदस्य एक निजी परिसर का इस्तेमाल करके जंतर-मंतर तक पहुंचे थे। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची में शामिल नहीं है। हालांकि इस प्रकरण में गिरफ्तार किए गए अजिंक्य शिंदे को शांति व्यवस्था बनाए रखने और अच्छे व्यवहार की शर्तों के साथ जमानत मिल चुकी है, लेकिन सौरव दास और आशुतोष रांका अभी भी सलाखों के पीछे हैं।

धमकी का मामला और आरोपों की राजनीति

इस कानूनी लड़ाई के बीच, एक सनसनीखेज खुलासा भी हुआ है। जमानत याचिका पर सुनवाई करने वाले विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने यह दावा किया था कि उन्हें अज्ञात लोगों की ओर से धमकियां मिल रही हैं। इस गंभीर आरोप के बाद पुलिस ने एक गैर-संज्ञेय मामला भी दर्ज किया है। दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इन गिरफ्तारियों को पूरी तरह से अवैध करार दिया है। उन्होंने सरकार पर सीधा आरोप लगाया है कि प्रशासन जानबूझकर कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेकर सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने का प्रयास कर रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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